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बाप-दादा के जमाने के सिलेबस को बदलवाएंगे
Updated Fri, 08 Dec 2017 01:58 AM IST
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बाप-दादा के जमाने के सिलेबस को बदलवाएंगे
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
एएमयू छात्र संघ चुनाव को लेकर मौलाना आजाद लाइब्रेरी कैंटीन पर गुरुवार शाम एएमयू छात्र संघ अदालत का आयोजन हुआ। अध्यक्ष पद के तीनों उम्मीदवार अजय सिंह, अबू बकर और मशकूर उस्मानी ने छात्रों के सवालों के जवाब दिए।
छात्रों का सवाल : आपका चुनावी एजेंडा क्या है?
अबू बकर : कैंपस की स्थिति के अलावा और भी बहुत से मुद्दे हैं, जो कभी हल नहीं होते। हर चुनाव में वही मुद्दे होते हैं, बस उठाने वालों के चेहरे और नाम बदल जाते हैं। लोग जीतकर चले जाते हैं, लेकिन समस्याएं हल नहीं होतीं। मैं जख्मों को कुरेदना नहीं चाहता। बस यकीन दिलाना चाहता हूं कि जीतने के बाद भी मेरी सक्रियता ऐसी ही रहेगी। यही मेरा बड़ा एजेंडा है।
मशकूर उस्मानी : मेरा एजेंडा हर छात्र का भरोसा कायम करना है। अगर भरोसा रहेगा तो समस्याओं का समाधान करा पाएंगे। फैकल्टी में पुराना सिलेबस चल रहा है। हमारे बाप-दादा जो पढ़ रहे थे, वही किताबें आज की पीढ़ी भी पढ़ रही है। जिससे रोजगार नहीं मिल रहा है। इसको बदलने की जरूरत है। नये आने वाले छात्रों को रहने की जगह मिलनी चाहिए। सरकार चाहे किसी की भी हो, हमें मजबूती से सबके सामने खड़े रहना है। शिक्षा जो हम सबका अधिकार है, हम उस पर प्रहार नहीं होने देंगे। हमें बदलाव की जरूरत है।
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अजय सिंह : सर सैयद अहमद खां का मिशन अब अपनी मंजिल के रास्ते से भटक गया है। यहां का हर होनहार छात्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे पहुंचना चाहता है। मगर उसे आगे बढ़ने नहीं दिया जाता है। इंतजामिया, प्रॉक्टर और बड़े पदों पर बैठे अफसरों के लिए सुरक्षा गार्ड तैनात हैं, लेकिन छात्रों की सुरक्षा का ध्यान किसी को नहीं है। अगर कट्टा कल्चर है, तो यकीनन ये चिंताजनक है। छात्राओं की सुरक्षा के नाम पर केवल सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। हम इन्हीं समस्याओं को अपने एजेंडे में शामिल कर रहे हैं।
छात्राें का सवाल : एएमयू छात्र संघ अध्यक्ष एकेडेमिक कौंसिल का पदेन सदस्य बनता है। आप बने तो क्या करेंगे?
अबू बकर : एकेडेमिक कौंसिल का पदेन सदस्य बनने पर मैं जो करूंगा वो दिखाई देगा, अभी कुछ कहना ठीक नहीं है। दो लाख की तनख्वाह लेने वाले प्रोफेसर गूगल से सिलेबस डाउनलोड करते हैं। 1981 के बाद से एकेडेमिक कौंसिल का चुनाव नहीं हुआ। मेरी कोशिश होगी कि चुनाव हो। नये लोगों को मौका मिलेगा, तो बदलाव होना तय है।
मशकूर उस्मानी : पहली बैठक में कहूंगा कि सभी कोर्सों के पुराने सिलेबस अपडेट हों। एक कमेटी बनाकर तीन महीने में नया सिलेबस बने। कमेटी में नीचे से ऊपर तक सभी लोगों का प्रतिनिधित्व हो। छात्र और शिक्षाविद इसमें शामिल हों। विश्व के अन्य प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के सिलेबस और कोर्स को भी देखकर, समझकर नया सिलेबस बनाया जाए। जो छात्रों को केवल डिग्री न दे, बल्कि रोजगार देने में भी सक्षम हो।
अजय सिंह : निश्चित तौर पर एकेडेमिक कौंसिल का चुनाव कराऊंगा। अगर मैं चुनाव नहीं करा पाया, तो अपने पद से इस्तीफा दे दूंगा। सर सैयद अहमद खां को मुख्य आयोजनों पर ही याद किया जाता है। सर सैयद का एक चैप्टर शामिल कर सभी छात्राें को पढ़ाया जाएगा। कोर्स का सिलेबस भी अपडेट कराया जाएगा।
अन्य मुद्दे भी उठाए
इस दौरान डायनिंग में मिलने वाला खाना, हास्टल में कमरों की कमी, नये छात्रों को हास्टल नहीं मिलना, पढ़ाई पूरी होने के बाद कैंपस प्लेसमेंट, पीएचडी की सीटों में कमी सहित अन्य मुद्दों को भी उठाया गया। यहां दो घंटे तक खासी गहमागहमी रही। कार्यक्रम का संचालन छात्र नेता आफाक ने किया।
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ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
एएमयू छात्र संघ चुनाव को लेकर मौलाना आजाद लाइब्रेरी कैंटीन पर गुरुवार शाम एएमयू छात्र संघ अदालत का आयोजन हुआ। अध्यक्ष पद के तीनों उम्मीदवार अजय सिंह, अबू बकर और मशकूर उस्मानी ने छात्रों के सवालों के जवाब दिए।
छात्रों का सवाल : आपका चुनावी एजेंडा क्या है?
अबू बकर : कैंपस की स्थिति के अलावा और भी बहुत से मुद्दे हैं, जो कभी हल नहीं होते। हर चुनाव में वही मुद्दे होते हैं, बस उठाने वालों के चेहरे और नाम बदल जाते हैं। लोग जीतकर चले जाते हैं, लेकिन समस्याएं हल नहीं होतीं। मैं जख्मों को कुरेदना नहीं चाहता। बस यकीन दिलाना चाहता हूं कि जीतने के बाद भी मेरी सक्रियता ऐसी ही रहेगी। यही मेरा बड़ा एजेंडा है।
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मशकूर उस्मानी : मेरा एजेंडा हर छात्र का भरोसा कायम करना है। अगर भरोसा रहेगा तो समस्याओं का समाधान करा पाएंगे। फैकल्टी में पुराना सिलेबस चल रहा है। हमारे बाप-दादा जो पढ़ रहे थे, वही किताबें आज की पीढ़ी भी पढ़ रही है। जिससे रोजगार नहीं मिल रहा है। इसको बदलने की जरूरत है। नये आने वाले छात्रों को रहने की जगह मिलनी चाहिए। सरकार चाहे किसी की भी हो, हमें मजबूती से सबके सामने खड़े रहना है। शिक्षा जो हम सबका अधिकार है, हम उस पर प्रहार नहीं होने देंगे। हमें बदलाव की जरूरत है।
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अजय सिंह : सर सैयद अहमद खां का मिशन अब अपनी मंजिल के रास्ते से भटक गया है। यहां का हर होनहार छात्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे पहुंचना चाहता है। मगर उसे आगे बढ़ने नहीं दिया जाता है। इंतजामिया, प्रॉक्टर और बड़े पदों पर बैठे अफसरों के लिए सुरक्षा गार्ड तैनात हैं, लेकिन छात्रों की सुरक्षा का ध्यान किसी को नहीं है। अगर कट्टा कल्चर है, तो यकीनन ये चिंताजनक है। छात्राओं की सुरक्षा के नाम पर केवल सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। हम इन्हीं समस्याओं को अपने एजेंडे में शामिल कर रहे हैं।
छात्राें का सवाल : एएमयू छात्र संघ अध्यक्ष एकेडेमिक कौंसिल का पदेन सदस्य बनता है। आप बने तो क्या करेंगे?
अबू बकर : एकेडेमिक कौंसिल का पदेन सदस्य बनने पर मैं जो करूंगा वो दिखाई देगा, अभी कुछ कहना ठीक नहीं है। दो लाख की तनख्वाह लेने वाले प्रोफेसर गूगल से सिलेबस डाउनलोड करते हैं। 1981 के बाद से एकेडेमिक कौंसिल का चुनाव नहीं हुआ। मेरी कोशिश होगी कि चुनाव हो। नये लोगों को मौका मिलेगा, तो बदलाव होना तय है।
मशकूर उस्मानी : पहली बैठक में कहूंगा कि सभी कोर्सों के पुराने सिलेबस अपडेट हों। एक कमेटी बनाकर तीन महीने में नया सिलेबस बने। कमेटी में नीचे से ऊपर तक सभी लोगों का प्रतिनिधित्व हो। छात्र और शिक्षाविद इसमें शामिल हों। विश्व के अन्य प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के सिलेबस और कोर्स को भी देखकर, समझकर नया सिलेबस बनाया जाए। जो छात्रों को केवल डिग्री न दे, बल्कि रोजगार देने में भी सक्षम हो।
अजय सिंह : निश्चित तौर पर एकेडेमिक कौंसिल का चुनाव कराऊंगा। अगर मैं चुनाव नहीं करा पाया, तो अपने पद से इस्तीफा दे दूंगा। सर सैयद अहमद खां को मुख्य आयोजनों पर ही याद किया जाता है। सर सैयद का एक चैप्टर शामिल कर सभी छात्राें को पढ़ाया जाएगा। कोर्स का सिलेबस भी अपडेट कराया जाएगा।
अन्य मुद्दे भी उठाए
इस दौरान डायनिंग में मिलने वाला खाना, हास्टल में कमरों की कमी, नये छात्रों को हास्टल नहीं मिलना, पढ़ाई पूरी होने के बाद कैंपस प्लेसमेंट, पीएचडी की सीटों में कमी सहित अन्य मुद्दों को भी उठाया गया। यहां दो घंटे तक खासी गहमागहमी रही। कार्यक्रम का संचालन छात्र नेता आफाक ने किया।