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बायोमेट्रिक मशीन बनाएगी कैडे्टस का अच्छा सीन
Updated Wed, 18 Apr 2018 02:20 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
एनसीसी कैडे्टस के भुगतान की राह बायोमेट्रिक मशीन से आसान बनेगी। इस मशीन पर कैडेट्स के हर परेड के दौरान हाजिरी लगने से कागजों की जद्दोजहद से हर असिस्टेंट एनसीसी ऑफिसर (एएनओ) बच जाएंगे। वहीं, हर कैडे्टस के बैंक खाते में परेड के हिसाब से रकम पहुंच जाएगी। इसके लिए ग्रुप कमांडर जीएस पुरी उप महानिदेशक (एनसीसी) को पत्र लिखेंगे।
पहले कैडे्टस को परेड के दौरान उसे मौके पर ही नाश्ता मिल जाता था। पर, इसमें धांधली की शिकायतें सामने आने लगी थीं। एक कैडेट की शिकायत पर करीब चार साल पहले शासन ने नाश्ते के रूप में मिलने वाले 15 रुपये को कैडेट के बैंक खाते में सीधे भेजने की व्यवस्था कर दी।
उसके बाद से धनराशि बैंक खाते में जाने लगी। मगर इस धनराशि को पाने के लिए ढेर सारे प्रपत्र से लेकर तमाम कार्रवाई पूरी करनी पड़ जाती है, फिर भी कहीं न कहीं कमी ही रह जाती है।
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ऐसे में कुछ कैडेट के खाते में धनराशि नहीं पहुंच पाती है। इस बारे में जब ग्रुप कमांडर (एनसीसी) जीएस पुरी से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि बायोमेट्रिक मशीन के लिए पत्र लिखेंगे। कैडेट का लेखा-जोखा कोषागार को उपलब्ध कराया जाएगा।
बायोमेट्रिक मशीन पर हाजिरी लगते ही उसके खाते में रुपये हस्तांतरित हो जाएं। कागजी कार्रवाई से एएनओ बच सकते हैं और हर कैडेट का भला हो जाएगा। खास बात यह मशीन मिलीभगत, अनुशासनहीनता पर भी लगाम लगाएगी।
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एनसीसी कैडे्टस के भुगतान की राह बायोमेट्रिक मशीन से आसान बनेगी। इस मशीन पर कैडेट्स के हर परेड के दौरान हाजिरी लगने से कागजों की जद्दोजहद से हर असिस्टेंट एनसीसी ऑफिसर (एएनओ) बच जाएंगे। वहीं, हर कैडे्टस के बैंक खाते में परेड के हिसाब से रकम पहुंच जाएगी। इसके लिए ग्रुप कमांडर जीएस पुरी उप महानिदेशक (एनसीसी) को पत्र लिखेंगे।
पहले कैडे्टस को परेड के दौरान उसे मौके पर ही नाश्ता मिल जाता था। पर, इसमें धांधली की शिकायतें सामने आने लगी थीं। एक कैडेट की शिकायत पर करीब चार साल पहले शासन ने नाश्ते के रूप में मिलने वाले 15 रुपये को कैडेट के बैंक खाते में सीधे भेजने की व्यवस्था कर दी।
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उसके बाद से धनराशि बैंक खाते में जाने लगी। मगर इस धनराशि को पाने के लिए ढेर सारे प्रपत्र से लेकर तमाम कार्रवाई पूरी करनी पड़ जाती है, फिर भी कहीं न कहीं कमी ही रह जाती है।
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ऐसे में कुछ कैडेट के खाते में धनराशि नहीं पहुंच पाती है। इस बारे में जब ग्रुप कमांडर (एनसीसी) जीएस पुरी से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि बायोमेट्रिक मशीन के लिए पत्र लिखेंगे। कैडेट का लेखा-जोखा कोषागार को उपलब्ध कराया जाएगा।
बायोमेट्रिक मशीन पर हाजिरी लगते ही उसके खाते में रुपये हस्तांतरित हो जाएं। कागजी कार्रवाई से एएनओ बच सकते हैं और हर कैडेट का भला हो जाएगा। खास बात यह मशीन मिलीभगत, अनुशासनहीनता पर भी लगाम लगाएगी।