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फराज की मौत मामले में कमेटी ने शुरू की जांच
Updated Wed, 26 Jul 2017 01:22 AM IST
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एएमयू में फैक्ट फाइडिंग कमेटी ने शुरू की जांच
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
अलीगढ़। एएमयू प्रशासन द्वारा गठित दो सदस्यीय फैक्ट फाइडिंग कमेटी ने एनआरआई छात्र फराज मुहम्मद तारिक (बीटेक फाइनल ईयर) की कथित आत्महत्या मामले की जांच शुरू कर दी है। घटना क्रम की जटिलता को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि जांच पूरी होने में दो सप्ताह तक लग जाएंगे।
एएमयू के पूर्व प्रॉक्टर एवं सेवानिवृत्त प्रो. नफीस अहमद की अध्यक्षता वाली कमेटी ने पहले दिन कई लोगों के बयान लिये। टीम के सदस्य फिलहाल इसका पता लगाने में जुटे है कि फराज के परिजनों को किस आधार पर कह रहे है कि यह आत्महत्या नहीं हत्या है। तथ्य सामने आने के बाद इससे संबंधित लोगों के बयान दर्ज होंगे। उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह एनआरआई छात्र फराज को गंभीर हालत में जेएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था।
उसके गंभीर हालात को देखते हुए दिल्ली रेफर कर दिया गया, जहां उसका इंतकाल हो गया। फराज ने जेएन मेडिकल कॉलेज में बयान दिया था कि बैक लगने के कारण उसने आत्महत्या का प्रयास किया है। जबकि फराज के परिजनों को आशंका है कि उसका मर्डर हुआ है। किसी दबाव में बयान देने की भी आशंका परिजन जता रहे है। घटना के दिन इस बात की चर्चा थी कि फराज एएमयू के सुलेमान हॉल की छत पर स्वयं के शरीर में आग लगाकर छत से कूद गया था।
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इंटरनल जांच से संतुष्ट नहीं, स्वतंत्र एजेंसी से हो जांच
एएमयू एग्जीक्यूटिव काउंसिल में राष्ट्रपति एवं राज्यपाल द्वारा नामित सदस्यों ने फराज मुहम्मद तारिक मामले की जांच उच्चस्तरीय स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की है।
इससे संबंधित पत्र ईसी सदस्यों ने कुलपति प्रो. तारिक मंसूर को लिखा है। ईसी सदस्य तनवीर हैदर उस्मानी ने बताया कि पत्र उनके अतिरिक्त प्रो. आरआर सिंह एवं डॉ. उमेश कदम की ओर से लिखा गया है।
तनवीर हैदर उस्मानी ने बताया कि इंटरनल जांच ध्येय को पूरा नहीं करता है। तरह-तरह के सवाल भी उठते है। उनका कहना है कि जब फराज पिछले चार साल से लगातार फेल हो रहा था तो यूनिवर्सिटी के नियमों के अनुसार उसके अभिभावक को क्यों नहीं सूचना दी गई। एडमिशन के समय छात्रों से चार लिफाफा इसी उद्देश्य से लिया जाता है।
ईसी सदस्यों ने यह भी सवाल उठाया है कि इस तरह की समस्याओं के लिए काउंसलिंग सेल होता है। यूजीसी गाइड लाइन भी सेल के लिए है। क्या फराज को काउंसलिंग दी गई। उन्होंने कहा कि सबसे गंभीर सवाल यह है कि जब हॉस्टल बंद थे तो फराज छत पर पहुंचा कैसे और सुरक्षा गार्डों से यह चूक कैसे हुई।
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ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
अलीगढ़। एएमयू प्रशासन द्वारा गठित दो सदस्यीय फैक्ट फाइडिंग कमेटी ने एनआरआई छात्र फराज मुहम्मद तारिक (बीटेक फाइनल ईयर) की कथित आत्महत्या मामले की जांच शुरू कर दी है। घटना क्रम की जटिलता को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि जांच पूरी होने में दो सप्ताह तक लग जाएंगे।
एएमयू के पूर्व प्रॉक्टर एवं सेवानिवृत्त प्रो. नफीस अहमद की अध्यक्षता वाली कमेटी ने पहले दिन कई लोगों के बयान लिये। टीम के सदस्य फिलहाल इसका पता लगाने में जुटे है कि फराज के परिजनों को किस आधार पर कह रहे है कि यह आत्महत्या नहीं हत्या है। तथ्य सामने आने के बाद इससे संबंधित लोगों के बयान दर्ज होंगे। उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह एनआरआई छात्र फराज को गंभीर हालत में जेएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था।
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उसके गंभीर हालात को देखते हुए दिल्ली रेफर कर दिया गया, जहां उसका इंतकाल हो गया। फराज ने जेएन मेडिकल कॉलेज में बयान दिया था कि बैक लगने के कारण उसने आत्महत्या का प्रयास किया है। जबकि फराज के परिजनों को आशंका है कि उसका मर्डर हुआ है। किसी दबाव में बयान देने की भी आशंका परिजन जता रहे है। घटना के दिन इस बात की चर्चा थी कि फराज एएमयू के सुलेमान हॉल की छत पर स्वयं के शरीर में आग लगाकर छत से कूद गया था।
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इंटरनल जांच से संतुष्ट नहीं, स्वतंत्र एजेंसी से हो जांच
एएमयू एग्जीक्यूटिव काउंसिल में राष्ट्रपति एवं राज्यपाल द्वारा नामित सदस्यों ने फराज मुहम्मद तारिक मामले की जांच उच्चस्तरीय स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की है।
इससे संबंधित पत्र ईसी सदस्यों ने कुलपति प्रो. तारिक मंसूर को लिखा है। ईसी सदस्य तनवीर हैदर उस्मानी ने बताया कि पत्र उनके अतिरिक्त प्रो. आरआर सिंह एवं डॉ. उमेश कदम की ओर से लिखा गया है।
तनवीर हैदर उस्मानी ने बताया कि इंटरनल जांच ध्येय को पूरा नहीं करता है। तरह-तरह के सवाल भी उठते है। उनका कहना है कि जब फराज पिछले चार साल से लगातार फेल हो रहा था तो यूनिवर्सिटी के नियमों के अनुसार उसके अभिभावक को क्यों नहीं सूचना दी गई। एडमिशन के समय छात्रों से चार लिफाफा इसी उद्देश्य से लिया जाता है।
ईसी सदस्यों ने यह भी सवाल उठाया है कि इस तरह की समस्याओं के लिए काउंसलिंग सेल होता है। यूजीसी गाइड लाइन भी सेल के लिए है। क्या फराज को काउंसलिंग दी गई। उन्होंने कहा कि सबसे गंभीर सवाल यह है कि जब हॉस्टल बंद थे तो फराज छत पर पहुंचा कैसे और सुरक्षा गार्डों से यह चूक कैसे हुई।