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तेजाबी हमले की पीड़ित को बच्ची की फीस का संकट
Updated Fri, 21 Jul 2017 01:46 AM IST
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तेजाबी हमले की पीड़ित को बच्ची की फीस का संकट
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
तेजाबी हमले से झुलसी महिला ने अपने जख्मों के दर्द को दरकिनार कर अपनी एक मात्र बेटी को शिक्षा के माध्यम से ताकत देना शुरू किया। लेकिन अब इस महिला को आर्थिक संकट का तेजाब जख्म दे रहा है। इसके चलते उसकी बेटी की स्कूल में फीस जमा नहीं हो पा रही है। जिससे बेटी के शिक्षा के लक्ष्य में बाधा पैदा हो रही है। हालात को देखते हुए दो नौजवान अधिवक्ताओं, प्रदीप कुमार और विधि शर्मा ने उसके दर्द को विधिक सेवा प्राधिकरण के समक्ष रखा है। इसके बाद अब महिला को सामाजिक संगठनों और समाजसेवियों का इंतजार है।
कोतवाली के मदार गेट मोहल्ला में फाटक वाली गली निवासी डॉली (47) को 1998 में आरोपियों ने तेजाब से हमला कर जख्मी कर दिया था। इस मामले में जान लेवा हमले का मुकदमा भी दर्ज हुआ और अदालत ने दो दोषियों को सजा भी सुनाई। हालांकि तेजाब पीड़िताओं के मामले में राज्य सरकारों ने मुआवजा बतौर आर्थिक सहायता का प्रावधान किया, लेकिन डॉली के मामले में वह सहायता नहीं मिली।
वक्त के साथ समझौता करते हुए और अपने सपनों को अपनी एकमात्र बेटी के माध्यम से पूरा करने के इरादे से डॉली ने अपनी बेटी तान्या को शिक्षित कर आत्मनिर्भर बनाने का फैसला किया। इसी के चलते उसने बेटी को मैरिस रोड स्थित बेबी लैंड स्थित स्कूल में भर्ती करा दिया। अब इसी बच्ची की कक्षा तीन की फीस, स्कूल की किताबें, ड्रेस आदि का संकट आ गया है। डॉली की स्थिति को देखते हुए युवा अधिवक्ता प्रदीप कुमार और निधि शर्मा उसकी मदद को आगे आए हैं। प्रदीप और निधि लज्जा वेलफेयर सोसायटी के माध्यम से डॉली के दर्द को विधिक सेवा प्राधिकरण तक ले गए हैं। साथ ही जिलाधिकारी को भी प्रार्थना पत्र दिया है।
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ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
तेजाबी हमले से झुलसी महिला ने अपने जख्मों के दर्द को दरकिनार कर अपनी एक मात्र बेटी को शिक्षा के माध्यम से ताकत देना शुरू किया। लेकिन अब इस महिला को आर्थिक संकट का तेजाब जख्म दे रहा है। इसके चलते उसकी बेटी की स्कूल में फीस जमा नहीं हो पा रही है। जिससे बेटी के शिक्षा के लक्ष्य में बाधा पैदा हो रही है। हालात को देखते हुए दो नौजवान अधिवक्ताओं, प्रदीप कुमार और विधि शर्मा ने उसके दर्द को विधिक सेवा प्राधिकरण के समक्ष रखा है। इसके बाद अब महिला को सामाजिक संगठनों और समाजसेवियों का इंतजार है।
कोतवाली के मदार गेट मोहल्ला में फाटक वाली गली निवासी डॉली (47) को 1998 में आरोपियों ने तेजाब से हमला कर जख्मी कर दिया था। इस मामले में जान लेवा हमले का मुकदमा भी दर्ज हुआ और अदालत ने दो दोषियों को सजा भी सुनाई। हालांकि तेजाब पीड़िताओं के मामले में राज्य सरकारों ने मुआवजा बतौर आर्थिक सहायता का प्रावधान किया, लेकिन डॉली के मामले में वह सहायता नहीं मिली।
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वक्त के साथ समझौता करते हुए और अपने सपनों को अपनी एकमात्र बेटी के माध्यम से पूरा करने के इरादे से डॉली ने अपनी बेटी तान्या को शिक्षित कर आत्मनिर्भर बनाने का फैसला किया। इसी के चलते उसने बेटी को मैरिस रोड स्थित बेबी लैंड स्थित स्कूल में भर्ती करा दिया। अब इसी बच्ची की कक्षा तीन की फीस, स्कूल की किताबें, ड्रेस आदि का संकट आ गया है। डॉली की स्थिति को देखते हुए युवा अधिवक्ता प्रदीप कुमार और निधि शर्मा उसकी मदद को आगे आए हैं। प्रदीप और निधि लज्जा वेलफेयर सोसायटी के माध्यम से डॉली के दर्द को विधिक सेवा प्राधिकरण तक ले गए हैं। साथ ही जिलाधिकारी को भी प्रार्थना पत्र दिया है।
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