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सरकारी पिच पर निजी एकेडमी की बैटिंग
Updated Wed, 28 Feb 2018 01:40 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
जो दिखता है वह होता नहीं है और जो होता है वह दिखता नहीं। ऐसा ही कुछ स्पोर्ट्स स्टेडियम में भी देखने को मिल रहा है। एक लाख रुपये से ज्यादा की लागत से बने कवर्ड नेट की सरकारी पिच पर निजी एकेडमी बैटिंग कर रही है। प्रशिक्षण के नाम पर प्रशिक्षु खिलाड़ियों से शुल्क भी वसूल किया जाता है।
एक तरफ केंद्र सरकार खेलो इंडिया का नारा दे रही है तो दूसरी तरफ सरकारी व्यवस्थाएं दम तोड़ रही हैं। जिस टर्फ विकेट पर पंजीकृत कोच को प्रशिक्षण देना चाहिए, उस विकेट पर निजी एकेडमी के कोच खिलाड़ियों से हर महीने 500 से 1000 रुपये लेकर उन्हें प्रशिक्षित कर रहे हैं।
यह अवैध कारोबार काफी समय से चल रहा है। खेल में ‘खेल’ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है स्टेडियम में दिनभर खिलाड़ी अभ्यास करते रहते हैं, जबकि खेल विशेषज्ञों की मानें तो खिलाड़ी सुबह-शाम अभ्यास करते हैं।
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सनद रहे कि स्टेडियम को क्रिकेट कैंप और कोच भी मिला था। कोच ने ज्वाइन भी कर लिया था, लेकिन कुछ दिन के बाद कोच ने यहां आने से मना कर दिया, जिसके बाद से निजी एकेडमी के कोच ने पांव पसारना शुरू कर दिया।
नाम न छापने की शर्त पर खिलाड़ियों ने बताया कि बिना फीस के कौन सिखाता है। इस समय क्रिकेट में 47 प्रशिक्षु खिलाड़ी पंजीकृत हैं।
ये बात सच है कि पहले निजी एकेडमी के कोच अपनी दुकानें चला रहे थे। जांच पड़ताल और शिकायत के बाद ऐसी एकेडमी के संचालन पर रोक लगा दी गई थी। अगर अभी भी एकेडमी संचालन की बात सामने आ रही है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
-रानी प्रकाश, क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी
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जो दिखता है वह होता नहीं है और जो होता है वह दिखता नहीं। ऐसा ही कुछ स्पोर्ट्स स्टेडियम में भी देखने को मिल रहा है। एक लाख रुपये से ज्यादा की लागत से बने कवर्ड नेट की सरकारी पिच पर निजी एकेडमी बैटिंग कर रही है। प्रशिक्षण के नाम पर प्रशिक्षु खिलाड़ियों से शुल्क भी वसूल किया जाता है।
एक तरफ केंद्र सरकार खेलो इंडिया का नारा दे रही है तो दूसरी तरफ सरकारी व्यवस्थाएं दम तोड़ रही हैं। जिस टर्फ विकेट पर पंजीकृत कोच को प्रशिक्षण देना चाहिए, उस विकेट पर निजी एकेडमी के कोच खिलाड़ियों से हर महीने 500 से 1000 रुपये लेकर उन्हें प्रशिक्षित कर रहे हैं।
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यह अवैध कारोबार काफी समय से चल रहा है। खेल में ‘खेल’ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है स्टेडियम में दिनभर खिलाड़ी अभ्यास करते रहते हैं, जबकि खेल विशेषज्ञों की मानें तो खिलाड़ी सुबह-शाम अभ्यास करते हैं।
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सनद रहे कि स्टेडियम को क्रिकेट कैंप और कोच भी मिला था। कोच ने ज्वाइन भी कर लिया था, लेकिन कुछ दिन के बाद कोच ने यहां आने से मना कर दिया, जिसके बाद से निजी एकेडमी के कोच ने पांव पसारना शुरू कर दिया।
नाम न छापने की शर्त पर खिलाड़ियों ने बताया कि बिना फीस के कौन सिखाता है। इस समय क्रिकेट में 47 प्रशिक्षु खिलाड़ी पंजीकृत हैं।
ये बात सच है कि पहले निजी एकेडमी के कोच अपनी दुकानें चला रहे थे। जांच पड़ताल और शिकायत के बाद ऐसी एकेडमी के संचालन पर रोक लगा दी गई थी। अगर अभी भी एकेडमी संचालन की बात सामने आ रही है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
-रानी प्रकाश, क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी