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जिला अस्पताल के तीन डाक्टरों ने दिया इस्तीफा
Updated Fri, 22 Sep 2017 01:51 AM IST
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जिला अस्पताल के तीन डाक्टरों ने दिया इस्तीफा
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
पहले से ही डाक्टरों की कमी से जूझ रहे मलखान सिंह जिला अस्पताल में तीन और डाक्टरों के इस्तीफा देने से संकट और भी गहरा गया है। अस्पताल में डाक्टरों की अचानक बेहद कमी होने से चिकित्सा कार्य में बाधा उत्पन्न हो रही है। अस्पताल में दबी जुबान में इसके लिए अस्पताल प्रशासन की सख्ती और काम को गति प्रदान करने के उठाए कदमों के असर को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
कुछ दिनों पहले जिला अस्पताल में नए सीएमएस डॉ. रामकिशन ने प्रभार संभाला। उन्होंने सबसे पहले यहां की बदहाली दूर करने के कदम उठाने शुरू किए और अस्पताल परिसर में ही रहने की व्यवस्था की। 24 घंटे की उपलब्धता और स्टाफ से पूरा काम करवाने की कवायद के चलते स्टाफ के ही कुछ लोग इस नई व्यवस्था में खुद को असहज अनुभव करने लगे। इसके बाद सीएमएस के समक्ष अस्पताल में सक्रिय एक दलाल द्वारा मरीज से पैसे ऐंठने का मामला सामने आया। इस दलाल का संबंध अस्पताल के ही कुछ डाक्टरों से था। यह डाक्टर मरीजों को बाहर की दवा लिखने और अन्य मामलों में पहले ही विवादित हो चुके हैं। इस मामले के सामने आते ही सीएमएस डॉ. रामकिशन ने व्यवस्था को और सख्त कर दिया। दूसरी ओर मरीजों के तीमारदारों की भी डाक्टरों के साथ टकराव की घटनाएं बढ़ रही हैं। इन्हीं सब हालातों के चलते जिला अस्पताल के तीन डाक्टरों ने इस्तीफा दे दिया है।
इसलिए भी बढ़ रहा है काम का दबाव
अलीगढ़। जिला अस्पताल के डाक्टरों पर काम का दबाव बढ़ने का एक कारण यह भी है कि मेडिकल परीक्षण के मामले पीएचसी और सीएचसी पर डील न होकर जिला अस्पताल आ रहे हैं। भाजपा के पूर्व प्रदेश मंत्री राजेंद्र वार्ष्णेय चीफ ने महानिदेशक स्वास्थ्य को लिखे पत्र में कहा है कि जिले में 13 सीएचसी और 29 पीएचसी हैं। नियमानुसार यहां पर मेडिकल परीक्षण के निर्देश हैं। लेकिन यहां पर तैनात चिकित्सक केंद्र पर रहते ही नहीं हैं। इसलिए मेडिकल परीक्षण के लिए लोग जिला अस्पताल में आते हैं। जिससे यहां पर चिकित्सा कार्य में लगे डाक्टर पर अनावश्यक ही दबाव बढ़ जाता है।
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ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
पहले से ही डाक्टरों की कमी से जूझ रहे मलखान सिंह जिला अस्पताल में तीन और डाक्टरों के इस्तीफा देने से संकट और भी गहरा गया है। अस्पताल में डाक्टरों की अचानक बेहद कमी होने से चिकित्सा कार्य में बाधा उत्पन्न हो रही है। अस्पताल में दबी जुबान में इसके लिए अस्पताल प्रशासन की सख्ती और काम को गति प्रदान करने के उठाए कदमों के असर को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
कुछ दिनों पहले जिला अस्पताल में नए सीएमएस डॉ. रामकिशन ने प्रभार संभाला। उन्होंने सबसे पहले यहां की बदहाली दूर करने के कदम उठाने शुरू किए और अस्पताल परिसर में ही रहने की व्यवस्था की। 24 घंटे की उपलब्धता और स्टाफ से पूरा काम करवाने की कवायद के चलते स्टाफ के ही कुछ लोग इस नई व्यवस्था में खुद को असहज अनुभव करने लगे। इसके बाद सीएमएस के समक्ष अस्पताल में सक्रिय एक दलाल द्वारा मरीज से पैसे ऐंठने का मामला सामने आया। इस दलाल का संबंध अस्पताल के ही कुछ डाक्टरों से था। यह डाक्टर मरीजों को बाहर की दवा लिखने और अन्य मामलों में पहले ही विवादित हो चुके हैं। इस मामले के सामने आते ही सीएमएस डॉ. रामकिशन ने व्यवस्था को और सख्त कर दिया। दूसरी ओर मरीजों के तीमारदारों की भी डाक्टरों के साथ टकराव की घटनाएं बढ़ रही हैं। इन्हीं सब हालातों के चलते जिला अस्पताल के तीन डाक्टरों ने इस्तीफा दे दिया है।
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इसलिए भी बढ़ रहा है काम का दबाव
अलीगढ़। जिला अस्पताल के डाक्टरों पर काम का दबाव बढ़ने का एक कारण यह भी है कि मेडिकल परीक्षण के मामले पीएचसी और सीएचसी पर डील न होकर जिला अस्पताल आ रहे हैं। भाजपा के पूर्व प्रदेश मंत्री राजेंद्र वार्ष्णेय चीफ ने महानिदेशक स्वास्थ्य को लिखे पत्र में कहा है कि जिले में 13 सीएचसी और 29 पीएचसी हैं। नियमानुसार यहां पर मेडिकल परीक्षण के निर्देश हैं। लेकिन यहां पर तैनात चिकित्सक केंद्र पर रहते ही नहीं हैं। इसलिए मेडिकल परीक्षण के लिए लोग जिला अस्पताल में आते हैं। जिससे यहां पर चिकित्सा कार्य में लगे डाक्टर पर अनावश्यक ही दबाव बढ़ जाता है।
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