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कभी भी गिर सकती है राजकीय पशु चिकित्सालय की इमारत
Updated Mon, 14 Aug 2017 02:07 AM IST
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कभी भी गिर सकती राजकीय पशु चिकित्सालय की इमारत
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
अतरौली। तहसील क्षेत्र के गांव तेवथू में बना राजकीय पशु चिकित्सालय और सामुदायिक केंद्र बदहाली की कगार पर पहुंच चुके हैं। अनदेखी का आलम यह है कि राजकीय पशु चिकित्सालय की बिल्डिंग कभी भी गिर सकती है। साथ ही सामुदायिक केंद्र की सफाई नहीं होने से बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं। गंदगी का आलम है। लोगों को सरकारी सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
गांव तेवथू में पशु चिकित्सा विभाग ने राजकीय पशु चिकित्सालय का निर्माण कराया था। पशु चिकित्सालय के लिए जमीन नहीं होने पर गांव के बौहरे शिवकुमार शर्मा व उनके भाई ने अपनी जमीन दान में दी थी। जिससे कि स्थानीय लोगों को सरकारी सेवाओं का लाभ मिल सके। इस अस्पताल से तेवथू, कलियान नगर, मेहगवां, गूलापुर, खेड़िया, बहादुरपुर, पैंडरा, आनंदपुर, राजगांव समेत कई गांवों के लोगों को लाभ मिल रहा था। पिछले कुछ समय से यहां स्टाफ की कमी के चलते अस्पताल बंद होने के कगार पर पहुंच गया। लोगों ने अपना भूसा और लकड़ी आदि रखने के लिए अस्पताल का प्रयोग करना शुरू कर दिया। आलम यह हुआ कि अस्पताल की बिल्डिंग बिना देखरेख के गिरने के कगार पर पहुंच गई है।
वहीं गांव में सामुदायिक केंद्र भी बना हुआ है। यहां एएनएम आती तो है, मगर वह सामुदायिक केंद्र की बजाए अन्य जगहों पर बैठकर अपनी ड्यूटी निभाती है।
- बुजुर्गों ने अस्पताल के लिए जमीन दान दी थी, ताकि अस्पताल बनकर स्थानीय लोगों को लाभ मिले। लेकिन अब अस्पताल और सामुदायिक केंद्र की अनदेखी से काफी दुख होता है। - चुनमुन शर्मा, तेवथू
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- बजट के अभाव में अस्पताल की मरम्मत नहीं हो सकी है। अस्पताल से अवैध कब्जा हटवाया जाएगा। हमारा प्रयास है लोगों को सरकारी सेवाओं का बेहतर लाभ मिले। - डॉ. मेघश्याम, उपमुख्य पशुचिकित्साधिकारी
- गांव में बना सरकारी अस्पताल की मरम्मत हो। साथ ही यहां स्टाफ की भी तैनाती की जानी चाहिए। जिससे लोगों को लाभ मिले। हमने कई बार इसकी मांग भी की है। - कुंवर बहादुर बघेल, प्रधान
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ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
अतरौली। तहसील क्षेत्र के गांव तेवथू में बना राजकीय पशु चिकित्सालय और सामुदायिक केंद्र बदहाली की कगार पर पहुंच चुके हैं। अनदेखी का आलम यह है कि राजकीय पशु चिकित्सालय की बिल्डिंग कभी भी गिर सकती है। साथ ही सामुदायिक केंद्र की सफाई नहीं होने से बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं। गंदगी का आलम है। लोगों को सरकारी सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
गांव तेवथू में पशु चिकित्सा विभाग ने राजकीय पशु चिकित्सालय का निर्माण कराया था। पशु चिकित्सालय के लिए जमीन नहीं होने पर गांव के बौहरे शिवकुमार शर्मा व उनके भाई ने अपनी जमीन दान में दी थी। जिससे कि स्थानीय लोगों को सरकारी सेवाओं का लाभ मिल सके। इस अस्पताल से तेवथू, कलियान नगर, मेहगवां, गूलापुर, खेड़िया, बहादुरपुर, पैंडरा, आनंदपुर, राजगांव समेत कई गांवों के लोगों को लाभ मिल रहा था। पिछले कुछ समय से यहां स्टाफ की कमी के चलते अस्पताल बंद होने के कगार पर पहुंच गया। लोगों ने अपना भूसा और लकड़ी आदि रखने के लिए अस्पताल का प्रयोग करना शुरू कर दिया। आलम यह हुआ कि अस्पताल की बिल्डिंग बिना देखरेख के गिरने के कगार पर पहुंच गई है।
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वहीं गांव में सामुदायिक केंद्र भी बना हुआ है। यहां एएनएम आती तो है, मगर वह सामुदायिक केंद्र की बजाए अन्य जगहों पर बैठकर अपनी ड्यूटी निभाती है।
- बुजुर्गों ने अस्पताल के लिए जमीन दान दी थी, ताकि अस्पताल बनकर स्थानीय लोगों को लाभ मिले। लेकिन अब अस्पताल और सामुदायिक केंद्र की अनदेखी से काफी दुख होता है। - चुनमुन शर्मा, तेवथू
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- बजट के अभाव में अस्पताल की मरम्मत नहीं हो सकी है। अस्पताल से अवैध कब्जा हटवाया जाएगा। हमारा प्रयास है लोगों को सरकारी सेवाओं का बेहतर लाभ मिले। - डॉ. मेघश्याम, उपमुख्य पशुचिकित्साधिकारी
- गांव में बना सरकारी अस्पताल की मरम्मत हो। साथ ही यहां स्टाफ की भी तैनाती की जानी चाहिए। जिससे लोगों को लाभ मिले। हमने कई बार इसकी मांग भी की है। - कुंवर बहादुर बघेल, प्रधान