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भीड़ हिंसा में मारे गए लोगों के 6 बच्चे ले रहे खेलकूद का प्रशिक्षण
Sat, 05 Oct 2019 01:58 AM IST
राजेश सिंह
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
Published by: राजेश सिंह
Updated Sat, 05 Oct 2019 01:58 AM IST
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मदरसा चाचा नेहरू में बॉक्सिंग का अभ्यास करते बच्चे।
- फोटो : Amar Ujala
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भीड़ हिंसा में मारे गए लोगों के 6 बच्चे अलीगढ़ के मदरसा चाचा नेहरू में अपना ठिकाना पा चुके हैं। एएमयू के छात्र आमिर मिंटो ने इनको ढूंढा और अपने एनजीओ के माध्यम से इनको चाचा नेहरू मदरसे में पहुंचाया। अब यहां इनको खाना, पीना, पढ़ाई, खेलकूद के साथ बेहतर जीवन जीने के सभी तौर तरीके सिखाए जा रहे हैं।
इनको अपनी रक्षा करने और किसी भी आपात परिस्थिति से निपटने का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मदरसे के प्रिंसिपल मो. राशिद ने बताया कि छह बच्चे हैं, जिनके वालिद भीड़ हिंसा का शिकार हुए हैं। इनके अलावा 48 के करीब यतीम बच्चे भी हैं। जिनकी सभी तरह की रोजमर्रा की जरूरतें यहां पूरी होती हैं। मदरसे की संचालिका पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की पत्नी सलमा अंसारी इनके कपड़ों तक का पूरा इंतजाम कर रही हैं।
पढ़ने के साथ बॉक्सिंग, कराटे, किक, कैरम सहित और खेलकूद आदि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह बच्चे राज्य स्तर पर मेडल भी जीत चुके हैं। अब इनका चयन राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए हो गया है। मदरसे में अलवर (राजस्थान) में भीड़ हिंसा के शिकार अकबर के 3 बच्चे व हरियाणा में मारे गए उमर का बेटा सरफराज सहित 6 बच्चे हैं। मोहम्मद राशिद ने बताया कि भीड़ हिंसा के शिकार लोगों के बच्चों को सर्वे करने के बाद लाया गया है।
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मदरसे में इन बच्चों का बेहतर भविष्य बनाने की कोशिश की जा रही है। बच्चों की बेहतर माहौल में परवरिश हो रही है, जिससे बच्चों के जेहन से उनके पिता की हत्या की पुरानी यादें कम कर उनको एक संभ्रांत नागरिक बनाया जाए। मदरसा अपने स्तर पर इनकी परवरिश में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता है। इनको बेहतर से बेहतर मार्गदर्शन देकर एक आदर्श नागरिक के रूप में प्रस्तुत करना ही मदरसे का लक्ष्य है।
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इनको अपनी रक्षा करने और किसी भी आपात परिस्थिति से निपटने का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मदरसे के प्रिंसिपल मो. राशिद ने बताया कि छह बच्चे हैं, जिनके वालिद भीड़ हिंसा का शिकार हुए हैं। इनके अलावा 48 के करीब यतीम बच्चे भी हैं। जिनकी सभी तरह की रोजमर्रा की जरूरतें यहां पूरी होती हैं। मदरसे की संचालिका पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की पत्नी सलमा अंसारी इनके कपड़ों तक का पूरा इंतजाम कर रही हैं।
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पढ़ने के साथ बॉक्सिंग, कराटे, किक, कैरम सहित और खेलकूद आदि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह बच्चे राज्य स्तर पर मेडल भी जीत चुके हैं। अब इनका चयन राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए हो गया है। मदरसे में अलवर (राजस्थान) में भीड़ हिंसा के शिकार अकबर के 3 बच्चे व हरियाणा में मारे गए उमर का बेटा सरफराज सहित 6 बच्चे हैं। मोहम्मद राशिद ने बताया कि भीड़ हिंसा के शिकार लोगों के बच्चों को सर्वे करने के बाद लाया गया है।
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मदरसे में इन बच्चों का बेहतर भविष्य बनाने की कोशिश की जा रही है। बच्चों की बेहतर माहौल में परवरिश हो रही है, जिससे बच्चों के जेहन से उनके पिता की हत्या की पुरानी यादें कम कर उनको एक संभ्रांत नागरिक बनाया जाए। मदरसा अपने स्तर पर इनकी परवरिश में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता है। इनको बेहतर से बेहतर मार्गदर्शन देकर एक आदर्श नागरिक के रूप में प्रस्तुत करना ही मदरसे का लक्ष्य है।