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अलीगढ़ में मुस्लिम दलित गठजोड़ के सहारे जीत की उम्मीद
Updated Sat, 28 Oct 2017 01:26 AM IST
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मुस्लिम-दलित वोटों के गठजोड़ के सहारे जीत की उम्मीद
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
मो. फुरकान को मेयर पद प्रत्याशी बनाकर बसपा मुस्लिम-दलित गठजोड़ को आधार बनाकर चुनाव जीतने की जुगत में है। पार्टी को जहां अपने परंपरागत वोटबैंक पर भरोसा है, वहीं मुस्लिम चेहरे पर दांव लगाकर मुस्लिमों को अपने पक्ष में करने की कोशिश भी की है।
पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में बसपा का प्रदर्शन फीका रहा। पार्टी के खाते में कोई सीट नहीं आई। इस स्थित को लेकर बसपा गंभीर है। महत्वपूर्ण सीटों पर पार्टी सुप्रीमो मायावती खुद प्रत्याशियों को फाइनल कर रही हैं।
फुरकान को प्रत्याशी बनाने के पीछे पार्टी की रणनीति यह भी है कि मुस्लिम-दलित गठजोड़ की स्थिति ऐसी हो जाएगी कि भाजपा का विरोधी वोट बसपा के प्रत्याशी को ही मिले।
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कोशिश यह भी है कि पिछड़ों और कुछ अगड़ी जातियों के वोटरों को भी अपने पक्ष में कर लिया जाए, तो जीत पक्की हो सकती है। वैसे भी पिछले कई चुनावों में मेयर सीट पर बसपा ने ही भाजपा को टक्कर दी है। इधर, बसपा द्वारा प्रत्याशी घोषित करने के बाद अब अन्य पार्टियां अपने दावेदारों के नामों पर मंथन कर रही हैं।
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ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
मो. फुरकान को मेयर पद प्रत्याशी बनाकर बसपा मुस्लिम-दलित गठजोड़ को आधार बनाकर चुनाव जीतने की जुगत में है। पार्टी को जहां अपने परंपरागत वोटबैंक पर भरोसा है, वहीं मुस्लिम चेहरे पर दांव लगाकर मुस्लिमों को अपने पक्ष में करने की कोशिश भी की है।
पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में बसपा का प्रदर्शन फीका रहा। पार्टी के खाते में कोई सीट नहीं आई। इस स्थित को लेकर बसपा गंभीर है। महत्वपूर्ण सीटों पर पार्टी सुप्रीमो मायावती खुद प्रत्याशियों को फाइनल कर रही हैं।
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फुरकान को प्रत्याशी बनाने के पीछे पार्टी की रणनीति यह भी है कि मुस्लिम-दलित गठजोड़ की स्थिति ऐसी हो जाएगी कि भाजपा का विरोधी वोट बसपा के प्रत्याशी को ही मिले।
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कोशिश यह भी है कि पिछड़ों और कुछ अगड़ी जातियों के वोटरों को भी अपने पक्ष में कर लिया जाए, तो जीत पक्की हो सकती है। वैसे भी पिछले कई चुनावों में मेयर सीट पर बसपा ने ही भाजपा को टक्कर दी है। इधर, बसपा द्वारा प्रत्याशी घोषित करने के बाद अब अन्य पार्टियां अपने दावेदारों के नामों पर मंथन कर रही हैं।