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बिजौली और चंडौस इस वर्ष होंगे टीबी मुक्त
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
टीबी से मुक्त करने के बड़े अभियान के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग ने 2019 में जिले के दो विकास खंड बिजौली और चंडौस को टीबी से मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत यहां पर टीबी के एक्टिव केस फाइंड करके निक्षय योजना के तहत उपचार के साथ ही पोषण देने का काम शुरू किया गया है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अनुपम भास्कर ने बताया कि टीबी मुक्त भारत अभियान की शुरुआत के बाद से ही विभिन्न अभियान चलाए जा रहे हैं। इसी कार्यक्रम के तहत देश को 2025 तक टीबी से मुक्त करना है।
अलीगढ़ में भी 12 विकास खंडों में आरएनटीसीपी के तहत टीबी के मरीजों को खोजकर उनका इलाज किया जा रहा है। साथ ही सरकार की ओर से उन्हें निक्षय योजना के तहत प्रतिमाह 500 रुपये पोषण भत्ता भी दिया जा रहा है। इसी क्रम में सबसे पहले अब वर्ष 2019 में विकास खंड बिजौली और चंडौस को टीबी से मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। जिले में कुल 7846 टीबी के मरीज पंजीकृत हैं। इनका सरकारी डॉट सेंटर में इलाज चल रहा है। गंभीर मरीजों को भर्ती करने के लिए जेएन मेडिकल कालेज में अलग वार्ड भी बनाया गया है। डॉ. भास्कर कहते हैं कि प्रत्येक तीन महीने बाद एक्टिव केस फाइडिंग का कार्यक्रम चलाया जाता है। जिसमें नए मरीज खोजकर उनका इलाज कराया जाता है।
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टीबी से मुक्त करने के बड़े अभियान के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग ने 2019 में जिले के दो विकास खंड बिजौली और चंडौस को टीबी से मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत यहां पर टीबी के एक्टिव केस फाइंड करके निक्षय योजना के तहत उपचार के साथ ही पोषण देने का काम शुरू किया गया है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अनुपम भास्कर ने बताया कि टीबी मुक्त भारत अभियान की शुरुआत के बाद से ही विभिन्न अभियान चलाए जा रहे हैं। इसी कार्यक्रम के तहत देश को 2025 तक टीबी से मुक्त करना है।
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अलीगढ़ में भी 12 विकास खंडों में आरएनटीसीपी के तहत टीबी के मरीजों को खोजकर उनका इलाज किया जा रहा है। साथ ही सरकार की ओर से उन्हें निक्षय योजना के तहत प्रतिमाह 500 रुपये पोषण भत्ता भी दिया जा रहा है। इसी क्रम में सबसे पहले अब वर्ष 2019 में विकास खंड बिजौली और चंडौस को टीबी से मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। जिले में कुल 7846 टीबी के मरीज पंजीकृत हैं। इनका सरकारी डॉट सेंटर में इलाज चल रहा है। गंभीर मरीजों को भर्ती करने के लिए जेएन मेडिकल कालेज में अलग वार्ड भी बनाया गया है। डॉ. भास्कर कहते हैं कि प्रत्येक तीन महीने बाद एक्टिव केस फाइडिंग का कार्यक्रम चलाया जाता है। जिसमें नए मरीज खोजकर उनका इलाज कराया जाता है।
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