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इकलौता चिराग था अंकुर, अब सिर्फ बूढ़ी मां और बहन परिवार में
Updated Sun, 08 Jul 2018 01:36 AM IST
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क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
पीएसी के मैदान पर पुलिस भर्ती में दौड़ के दौरान मौत का शिकार हुआ सिपाही अंकुर अहलावत अपने घर का इकलौता चिराग था। अब उसके बाद घर में उसकी बूढ़ी मां और एक बहन बची है। जिसकी शान से शादी करने का सपना अंकुर देखा करता था। शनिवार को पोस्टमार्टम हाउस पर जब अंकुर के मौसा और बुआ उसका शव लेने आए तो पथराए हुए चेहरों से कुछ भी कहना उनके लिए संभव नहीं हो रहा था।
अंकुर की मौत की सूचना मिलने के बाद शनिवार की शाम को अंकुर के मौसा श्रृषिपाल और बुआ रेखा पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंची। इस दौरान जो भी संवाद अंकुर के मौसा और बुआ से संभव हो सका उसके मुताबिक अंकुर के पिता रामवीर सिंह का निधन पहले ही हो चुका है। घर में वह इकलौता था जिस पर सभी की उम्मीदें टिकी थीं।
सन 2016 में उसकी उत्तर प्रदेश पुलिस में बतौर सिपाही भर्ती हुई तो घर में खुशियां आ गईं। सभी खुश थे। अंकुर की भी ख्वाहिश थी कि वह अपनी बहन की शादी बेहद धूमधाम से करेगा। इस दौरान जब प्रदेश में दरोगा के पदों पर नियुक्तियां आईं तो उसने भी आवेदन किया। विभाग में होने के कारण उसे इसका लाभ भी मिलता। घर में भी बहुत उम्मीद थी कि अंकुर दरोगा बन जाएगा तो और भी अच्छा रहेगा।
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इन्हीं लक्ष्यों को हासिल करने के लिए शनिवार को अंकुर ने दौड़ शुरू की लेकिन यह उसके जीवन की आखिरी दौड़ साबित हुई और वह मौत को पीछे नहीं छोड़ सका। ऋषिपाल का कहना था कि यह विधि का विधान है। इसमें किसको दोष दें। अब जो होना था हो गया। किसी से क्या कहें। बेहद दुखी मन से वह अंकुर का पार्थिव शरीर अपने साथ ले गए।
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पीएसी के मैदान पर पुलिस भर्ती में दौड़ के दौरान मौत का शिकार हुआ सिपाही अंकुर अहलावत अपने घर का इकलौता चिराग था। अब उसके बाद घर में उसकी बूढ़ी मां और एक बहन बची है। जिसकी शान से शादी करने का सपना अंकुर देखा करता था। शनिवार को पोस्टमार्टम हाउस पर जब अंकुर के मौसा और बुआ उसका शव लेने आए तो पथराए हुए चेहरों से कुछ भी कहना उनके लिए संभव नहीं हो रहा था।
अंकुर की मौत की सूचना मिलने के बाद शनिवार की शाम को अंकुर के मौसा श्रृषिपाल और बुआ रेखा पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंची। इस दौरान जो भी संवाद अंकुर के मौसा और बुआ से संभव हो सका उसके मुताबिक अंकुर के पिता रामवीर सिंह का निधन पहले ही हो चुका है। घर में वह इकलौता था जिस पर सभी की उम्मीदें टिकी थीं।
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सन 2016 में उसकी उत्तर प्रदेश पुलिस में बतौर सिपाही भर्ती हुई तो घर में खुशियां आ गईं। सभी खुश थे। अंकुर की भी ख्वाहिश थी कि वह अपनी बहन की शादी बेहद धूमधाम से करेगा। इस दौरान जब प्रदेश में दरोगा के पदों पर नियुक्तियां आईं तो उसने भी आवेदन किया। विभाग में होने के कारण उसे इसका लाभ भी मिलता। घर में भी बहुत उम्मीद थी कि अंकुर दरोगा बन जाएगा तो और भी अच्छा रहेगा।
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इन्हीं लक्ष्यों को हासिल करने के लिए शनिवार को अंकुर ने दौड़ शुरू की लेकिन यह उसके जीवन की आखिरी दौड़ साबित हुई और वह मौत को पीछे नहीं छोड़ सका। ऋषिपाल का कहना था कि यह विधि का विधान है। इसमें किसको दोष दें। अब जो होना था हो गया। किसी से क्या कहें। बेहद दुखी मन से वह अंकुर का पार्थिव शरीर अपने साथ ले गए।