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रफ्तार न कर दे कहीं जिंदगी पर वार
Updated Sat, 17 Feb 2018 09:36 PM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
बिना हेलमेट और वह भी तेज रफ्तार। यही वह स्थिति है जब जिंदगी के लिए खतरनाक हालात बनते हैं। जानकार कहते हैं कि 99 फीसदी मामलों में तेज रफ्तार की जरूरत नहीं होती है। इसे सिर्फ लापरवाही कह सकते हैं। बिना हेलमेट के यही तेज रफ्तार 95 फीसदी मामलों में जान जाने का सबब साबित होती है।
आटोमोबाइल के जानकार नारायण सरीन कहते हैं कि दो पहिया वाहन और बाइक के लिए 45 से 50 किलोमीटर की रफ्तार एक आदर्श रफ्तार है। इससे आगे बढ़ने पर जैसे-जैसे रफ्तार बढ़ती है खतरा भी बढ़ता जाता है।
80 किलोमीटर से अधिक की रफ्तार पर नार्मल बाइकें बाइब्रेट करने लगती हैं, क्योंकि उनका डिजायन और बाइक चलाने वाले का कास्ट्यूम (कपड़े) एयरोडायनामिक नहीं होते। यही कारण है कि संतुलन खराब होता जाता है। हवा का दबाव वाहन चलाने वाले और बाइक दोनों के लिए परेशानी पैदा करता है। सड़क खराब हो या भीड़ भाड़ हो तो संतुलन करना और भी मुश्किल होता है।
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इसके अलावा कारों के संबंध में भी सुरक्षित रफ्तार बेहद मायने रखती है। कार के लिए 80 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार खुली सड़क पर एक आदर्श रफ्तार है। 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार के बाद जैसे जैसे रफ्तार बढ़ती है वैसे वैसे खतरा भी बढ़ता है। इसके अलावा गाड़ी की फिटनेस, सीट बेल्ट का पहनना, टायरों का दबाव और ब्रेकिंग सिस्टम भी सुरक्षित रफ्तार के लिए मायने रखते हैं।
लहराते हुए बाइक राहगीरों को खतरा
कभी-कभी कुछ युवा भीड़ भरे इलाकों में लहराते हुए बाइक चलाते हैं। यह न सिर्फ उनके लिए बल्कि सड़क पर चल रहे राहगीरों के लिए भी खतरनाक स्थिति है। कई बार देखा गया है कि ऐसी बाइकों की चपेट में आकर राहगीर बुरी तरह घायल हुए हैं।
80 फीसदी हादसे तेज गति के कारण ही होते हैं। अनियंत्रित वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लगाने और पकड़ने के लिए हमारे पास इंटरसेप्टर है। इसमें स्पीडोमीटर भी लगा हुआ है। हम लोगों की जान जोखिम में डालने से रोकें, इससे अच्छा है लोग स्वयं भी इस ओर जागरूक हों।
- राजेश कुमार पांडेय, एसएसपी
ये हैं मानक
20 से 40 किमी प्रति घंटा रफ्तार आबादी क्षेत्र में
40 से 60 किमी प्रति घंटा रफ्तार एक्सीडेंट प्रभावित क्षेत्र में
80 से 100 किमी प्रति घंटा रफ्तार हाईवे पर
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बिना हेलमेट और वह भी तेज रफ्तार। यही वह स्थिति है जब जिंदगी के लिए खतरनाक हालात बनते हैं। जानकार कहते हैं कि 99 फीसदी मामलों में तेज रफ्तार की जरूरत नहीं होती है। इसे सिर्फ लापरवाही कह सकते हैं। बिना हेलमेट के यही तेज रफ्तार 95 फीसदी मामलों में जान जाने का सबब साबित होती है।
आटोमोबाइल के जानकार नारायण सरीन कहते हैं कि दो पहिया वाहन और बाइक के लिए 45 से 50 किलोमीटर की रफ्तार एक आदर्श रफ्तार है। इससे आगे बढ़ने पर जैसे-जैसे रफ्तार बढ़ती है खतरा भी बढ़ता जाता है।
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80 किलोमीटर से अधिक की रफ्तार पर नार्मल बाइकें बाइब्रेट करने लगती हैं, क्योंकि उनका डिजायन और बाइक चलाने वाले का कास्ट्यूम (कपड़े) एयरोडायनामिक नहीं होते। यही कारण है कि संतुलन खराब होता जाता है। हवा का दबाव वाहन चलाने वाले और बाइक दोनों के लिए परेशानी पैदा करता है। सड़क खराब हो या भीड़ भाड़ हो तो संतुलन करना और भी मुश्किल होता है।
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इसके अलावा कारों के संबंध में भी सुरक्षित रफ्तार बेहद मायने रखती है। कार के लिए 80 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार खुली सड़क पर एक आदर्श रफ्तार है। 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार के बाद जैसे जैसे रफ्तार बढ़ती है वैसे वैसे खतरा भी बढ़ता है। इसके अलावा गाड़ी की फिटनेस, सीट बेल्ट का पहनना, टायरों का दबाव और ब्रेकिंग सिस्टम भी सुरक्षित रफ्तार के लिए मायने रखते हैं।
लहराते हुए बाइक राहगीरों को खतरा
कभी-कभी कुछ युवा भीड़ भरे इलाकों में लहराते हुए बाइक चलाते हैं। यह न सिर्फ उनके लिए बल्कि सड़क पर चल रहे राहगीरों के लिए भी खतरनाक स्थिति है। कई बार देखा गया है कि ऐसी बाइकों की चपेट में आकर राहगीर बुरी तरह घायल हुए हैं।
80 फीसदी हादसे तेज गति के कारण ही होते हैं। अनियंत्रित वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लगाने और पकड़ने के लिए हमारे पास इंटरसेप्टर है। इसमें स्पीडोमीटर भी लगा हुआ है। हम लोगों की जान जोखिम में डालने से रोकें, इससे अच्छा है लोग स्वयं भी इस ओर जागरूक हों।
- राजेश कुमार पांडेय, एसएसपी
ये हैं मानक
20 से 40 किमी प्रति घंटा रफ्तार आबादी क्षेत्र में
40 से 60 किमी प्रति घंटा रफ्तार एक्सीडेंट प्रभावित क्षेत्र में
80 से 100 किमी प्रति घंटा रफ्तार हाईवे पर
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