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गृहकर सही कराने के नाम पर 10 हजार ऐंठे
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डेस्क न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़
रावणटीला निवासी एक व्यक्ति से नगर निगम के एक कर्मचारी ने पुराने समय से बकाया चले आ रहे गृह कर को सही करने के नाम पर उससे 10 हजार रुपये ले लिए। नगर निगम के सेवा भवन में आए पीड़ित ने शुक्रवार को पार्षद वीरेंद्र सिंह पूरी बात बताई तो पता चला कि जिस गृह कर को सही करने के पैसे ले लिए गए हैं, वह तो ठीक ही नहीं हो सकता क्योंकि भवन का स्थानांतरण मौजूदा भवन स्वामी के नाम पर नहीं हुआ था।
रावणटीला की संजय गांधी कालोनी निवासी ज्ञानेंद्र कुमार पुत्र फूल चंद ने बताया कि करीब 25 साल पहले उन्होंने मकान खरीदा था। जिनसे मकान लिया उनके पास भी मकान एग्रीमेंट आदि दस्तावेजों के आधार पर ही था। पुराने भवन स्वामी से उनके नाम पर भवन का स्थानांतरण नहीं हुआ है। लेकिन नगर निगम ने उनके नाम पर गृहकर लगा दिया।
यह बात जब नगर निगम के तकनीकी मामलों के जानकार पार्षद वीरेंद्र सिंह को पता लगी तो उन्होंने इसे तकनीकी रूप से गलत बताते हुए कहा कि जारी किए गए बिल पर पीड़ित के नाम के आगे अध्यासी लिख दिया गया है। इसका मतलब यह होता है कि यह मकान में रह रहा है इसका मालिक नहीं है। इसी आधार पर बिल जारी कर दिया गया है। इसे सही करने के नाम पर 10 हजार रुपये ले लिए गए। जबकि बिना स्वामित्व स्थानांतरित हुए बिल मकान मालिक के नाम पर जारी ही नहीं हो सकता।
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रावणटीला निवासी एक व्यक्ति से नगर निगम के एक कर्मचारी ने पुराने समय से बकाया चले आ रहे गृह कर को सही करने के नाम पर उससे 10 हजार रुपये ले लिए। नगर निगम के सेवा भवन में आए पीड़ित ने शुक्रवार को पार्षद वीरेंद्र सिंह पूरी बात बताई तो पता चला कि जिस गृह कर को सही करने के पैसे ले लिए गए हैं, वह तो ठीक ही नहीं हो सकता क्योंकि भवन का स्थानांतरण मौजूदा भवन स्वामी के नाम पर नहीं हुआ था।
रावणटीला की संजय गांधी कालोनी निवासी ज्ञानेंद्र कुमार पुत्र फूल चंद ने बताया कि करीब 25 साल पहले उन्होंने मकान खरीदा था। जिनसे मकान लिया उनके पास भी मकान एग्रीमेंट आदि दस्तावेजों के आधार पर ही था। पुराने भवन स्वामी से उनके नाम पर भवन का स्थानांतरण नहीं हुआ है। लेकिन नगर निगम ने उनके नाम पर गृहकर लगा दिया।
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यह बात जब नगर निगम के तकनीकी मामलों के जानकार पार्षद वीरेंद्र सिंह को पता लगी तो उन्होंने इसे तकनीकी रूप से गलत बताते हुए कहा कि जारी किए गए बिल पर पीड़ित के नाम के आगे अध्यासी लिख दिया गया है। इसका मतलब यह होता है कि यह मकान में रह रहा है इसका मालिक नहीं है। इसी आधार पर बिल जारी कर दिया गया है। इसे सही करने के नाम पर 10 हजार रुपये ले लिए गए। जबकि बिना स्वामित्व स्थानांतरित हुए बिल मकान मालिक के नाम पर जारी ही नहीं हो सकता।
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