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केरल के छात्रों ने जमा किये 2.65 लाख रुपये
Updated Wed, 22 Aug 2018 02:24 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
केरल में वर्षा, बाढ़ एवं भूस्खलन से भारी तबाही हुई है। इसकी वजह से अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले केरल के छात्र, शिक्षक एवं कर्मचारी बेहद दुखी हैं। कुछ तो बकरीद की छुट्टी में घर जा चुके हैं, जबकि कई छात्र अपने परिजन एवं संबंधियों को लेकर चिंतित हैं। बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए एएमयू मलयाली एसोसिएशन के सदस्यों ने करीब 2.65 लाख रुपये जमा कर लिए हैं।
एएमयू के आधुनिक भाषा विभाग के प्रो. सतीशन कहते हैं कि करीब 94 वर्ष बाद केरल में भयावह तबाही मची है। 1924 में वहां बाढ़ आई थी, जिसकी वजह से बेहद नुकसान हुआ था। इस बार केरल की जनता पर दो तरफा मार पड़ी है।
तटीय क्षेत्रों में बाढ़ से तबाही हुई है। वहीं पहाड़ों पर भूस्खलन से लोगों के घर तबाह हुए हैं। केरल के पलक्कड़ के निवासी प्रो. सतीशन ने कहा कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद स्थिति का सही आकलन हो सकेगा। फिलहाल पानी कम होने के बाद वहां बीमारी फैलने का डर है। दूरसंचार व्यवस्था ठप है।
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सड़के व पुल आदि टूट गए हैं। बाढ़ का पानी लोगों के घरों के अंदर तक है। घर में सांप आदि निकलने एवं डंसने की खबरें आ रही हैं। इसी विभाग के सफरूल हक कन्नूर के निवासी हैं। उनका कहना है कि उनके एरिया में बाढ़ से ज्यादा भूस्खलन से नुकसान हुआ है।
उन्होंने बताया कि अभी तक के आकलन के अनुसार 20 से 22 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है। इसकी भरपाई एवं सामान्य जीवन चर्चा पटरी पर आने में वक्त लगेगा। लोग घर छोड़कर राहत शिविरों में हैं। एएमयू के शोध छात्र विपिन एंथनी भी केरल के हालात से बेहद दुखी हैं और ईश्वर से जल्द हालात सामान्य होने की प्रार्थना कर रहे हैं।
एएमयू में करीब 250 छात्र केरल के
एएमयू में केरल के करीब 250 छात्र हैं। छात्रों ने एएमयू मलयाली एसोसिएशन नाम से एक संगठन भी बनाया है। इसी संगठन के माध्यम से बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए राशि जमा की जा रही है। ईद मुहम्मद हनीफ इसके अध्यक्ष हैं। एएमयू छात्र संघ के पूर्व कैबिनेट सदस्य वसील के एवं शोध छात्र तौयब भी बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए धन राशि जुटा रहे हैं। एएमयू के केरल के छात्रों का एक दल सोमवार को यहां से रवाना हुआ है। दूसरा दल एक-दो दिन में जाएगा। ये लोग वहां जाकर मालूम करेंगे कि राहत की ज्यादा जरूरत किन इलाकों में है। उसके बाद यहां से जरूरी सामान या पैसा लेकर जाएंगे। सफरूल हक ने बताया कि बेसिक जरूरत के हिसाब से आगे का निर्णय लिया जाएगा। पैसा या उसके बदले जरूरी सामान खरीद कर बाढ़ पीड़ितों की मदद की जा सकती है।
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केरल में वर्षा, बाढ़ एवं भूस्खलन से भारी तबाही हुई है। इसकी वजह से अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले केरल के छात्र, शिक्षक एवं कर्मचारी बेहद दुखी हैं। कुछ तो बकरीद की छुट्टी में घर जा चुके हैं, जबकि कई छात्र अपने परिजन एवं संबंधियों को लेकर चिंतित हैं। बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए एएमयू मलयाली एसोसिएशन के सदस्यों ने करीब 2.65 लाख रुपये जमा कर लिए हैं।
एएमयू के आधुनिक भाषा विभाग के प्रो. सतीशन कहते हैं कि करीब 94 वर्ष बाद केरल में भयावह तबाही मची है। 1924 में वहां बाढ़ आई थी, जिसकी वजह से बेहद नुकसान हुआ था। इस बार केरल की जनता पर दो तरफा मार पड़ी है।
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तटीय क्षेत्रों में बाढ़ से तबाही हुई है। वहीं पहाड़ों पर भूस्खलन से लोगों के घर तबाह हुए हैं। केरल के पलक्कड़ के निवासी प्रो. सतीशन ने कहा कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद स्थिति का सही आकलन हो सकेगा। फिलहाल पानी कम होने के बाद वहां बीमारी फैलने का डर है। दूरसंचार व्यवस्था ठप है।
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सड़के व पुल आदि टूट गए हैं। बाढ़ का पानी लोगों के घरों के अंदर तक है। घर में सांप आदि निकलने एवं डंसने की खबरें आ रही हैं। इसी विभाग के सफरूल हक कन्नूर के निवासी हैं। उनका कहना है कि उनके एरिया में बाढ़ से ज्यादा भूस्खलन से नुकसान हुआ है।
उन्होंने बताया कि अभी तक के आकलन के अनुसार 20 से 22 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है। इसकी भरपाई एवं सामान्य जीवन चर्चा पटरी पर आने में वक्त लगेगा। लोग घर छोड़कर राहत शिविरों में हैं। एएमयू के शोध छात्र विपिन एंथनी भी केरल के हालात से बेहद दुखी हैं और ईश्वर से जल्द हालात सामान्य होने की प्रार्थना कर रहे हैं।
एएमयू में करीब 250 छात्र केरल के
एएमयू में केरल के करीब 250 छात्र हैं। छात्रों ने एएमयू मलयाली एसोसिएशन नाम से एक संगठन भी बनाया है। इसी संगठन के माध्यम से बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए राशि जमा की जा रही है। ईद मुहम्मद हनीफ इसके अध्यक्ष हैं। एएमयू छात्र संघ के पूर्व कैबिनेट सदस्य वसील के एवं शोध छात्र तौयब भी बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए धन राशि जुटा रहे हैं। एएमयू के केरल के छात्रों का एक दल सोमवार को यहां से रवाना हुआ है। दूसरा दल एक-दो दिन में जाएगा। ये लोग वहां जाकर मालूम करेंगे कि राहत की ज्यादा जरूरत किन इलाकों में है। उसके बाद यहां से जरूरी सामान या पैसा लेकर जाएंगे। सफरूल हक ने बताया कि बेसिक जरूरत के हिसाब से आगे का निर्णय लिया जाएगा। पैसा या उसके बदले जरूरी सामान खरीद कर बाढ़ पीड़ितों की मदद की जा सकती है।