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5000 लोग आयकर रडार पर, 2000 के केस दोबारा खुलेंगे

Sat, 07 Jul 2018 01:44 AM IST
Updated Sat, 07 Jul 2018 01:44 AM IST
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5000 लोग आयकर रडार पर, 2000 के केस दोबारा खुलेंगे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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आयकर विभाग वर्तमान में 13 सरकारी विभागों के माध्यम से मोटी रकम खर्च करने और बड़ा निवेश करने वालों की सूचनाएं एकत्र करा रहा है। ये सूचनाएं आयकर विभाग की जांच एवं अन्वेषण शाखा को भेजी जा रही हैं। आयकर विभाग ने इन 13 विभागों को खर्च और निवेश का एक निश्चित दायरा बता दिया है। उस दायरे को पार कर खर्च या निवेश करने वाले सभी लोगों को जांच शाखा नोटिस दे रही है।

अलीगढ़ में अब तक ऐसे पांच हजार लोगों की सूचनाएं एकत्र हुई हैं। जांच करने के बाद 2 हजार लोगों के केस खोले जा रहे हैं। इन लोगों के वो केस खोले जाएंगे, जिसमें पूर्व में जमा कराए रिटर्न में खर्च और निवेश की पूरी जानकारी नहीं दी गई है। जांच शाखा इन सभी की पड़ताल कर रही है।
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जांच शाखा के माध्यम से ये केस वार्ड वार अधिकारियों को दिए जा रहे हैं, जो अब नोटिस की कार्रवाई कर रहे हैं। नोटिस में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई होगी।
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13 विभाग जो दे रहे हैं आपके खर्च निवेश की खबर
गुजरी 26 फरवरी को आयकर विभाग ने केंद्र सरकार, बैंक, रजिस्ट्री सहित अन्य 13 विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ बैठक की थी। जिसमें उनसे एक तयशुदा प्रारूप में खर्च और निवेश की सूचनाएं मांगी गई थीं। वित्तीय वर्ष 2017-18 की ये सूचनाएं 31 मई 2018 तक मांगी गई थी। ये सूचनाएं अब आयकर विभाग की जांच शाखा को मिलने लगी है। सूचना देने में देरी होने पर 100 रुपये प्रति दिन और बाद में 500 रुपये प्रति दिन का जुर्माना लगाने का प्रावधान है। बहुत देरी या गलत सूचना देनेवाले विभाग पर 50 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है।

1-30 लाख या उससे ऊपर का मकान, दुकान, फ्लैट या जमीन की रजिस्ट्री कराने पर रजिस्ट्री विभाग से
2-50 लाख या उससे ऊपर की रकम चालू खाते में जमा करने या उससे निकालने पर संबंधित बैंक से
3-10 लाख या उससे ऊपर की रकम बचत खाते में जमा करने या उससे निकालने पर संबंधित बैंक से
4-10 लाख या उससे ऊपर का म्यूचुअल फंड या सरकारी बांड खरीदने या बेचने पर संबंधित कंपनी से
5-10 लाख या उससे ऊपर की एफडी बनवाने या भुनाने पर संबंधित बैंक या पोस्ट आफिस से
6- 02 लाख या उससे ऊपर का भी मोटर व्हीकल लेने पर संभागीय परिवहन विभाग से
7- शेयर बाजार में कोई भी कंपनी अपने ही शेयर बाईबैक करे तो 10 लाख से ऊपर के सौदे पर
8- क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड से 10 लाख या उससे ऊपर की विदेशी मुद्रा के लेन देन पर
9- सालाना आयकर आडिट करानेवाले व्यापारी की ओर से दो लाख या उससे ऊपर का नगद लेनदेन करने पर
10-2.50 लाख रुपये या इससे ऊपर की रकम पोस्ट आफिस के बचते खाते में जमा या निकासी होने पर
11-12.50 लाख रुपये या इससे ऊपर की रकम पोस्ट आफिस के चालू खाते से जमा या निकासी होने पर
12-10 हजार या उससे ऊपर का नगद खर्च संबंधित व्यापारी द्वारा करने पर
13- किसी भी दुकान से सीधे दो लाख रुपये से ऊपर की खरीददारी करने पर

नोटबंदी के बाद से 500 लोग जांच की जद में
नवंबर 2016 में नोटबंदी होने के बाद बचत खातों में तयशुदा ढाई लाख रुपये और चालू खातों में 12.50 लाख रुपये से अधिक की रकम जमा करने वाले बड़े खातेदारों की कुल संख्या 1245 तक पहुंच गई थी। इसमें पांच खातेदार एक करोड़ रुपये से ऊपर की धनराशि जमा कराने वाले थे। इन सभी खातेदारों को दिसंबर 2016 से मार्च 2017 के बीच नोटिस देकर जमा की गई रकम का स्रोत पूछा गया था। जिसमें धीरे धीरे ही सही एक वर्ष बाद मार्च 2018 तक तकरीबन 700 लोगों ने अपने रिटर्न में जवाब दे दिए हैं। शेष 545 खातेदारों में 400 को आयकर नोटिस दिए गए हैं। इसमें कुछ खातेदारों के बारे में बैंकों से ही सही नाम, पता या मोबाइल नंबर नहीं मिल रहा है। जिससे माना जा रहा है कि कुछ खातों में बैंकों की ओर से सही सूचनाएं नहीं दी जा रही है। मौके पर भेजे गए कई आयकर नोटिस भी रिसीव नहीं हो रहे हैं। माना ये भी जा रहा है कि ऐसे बैंकों के प्रबंधन पर भी कार्रवाई हो सकती है। क्योंकि गुजरे पांच वर्ष से बैंकों में नो योर कस्टमर स्कीम के तहत सभी ग्राहकों का केवाईसी जमा कराया जा रहा हैे। जिनका केवाईसी ठीक नहीं है उनका खाता तक बंद करा दिया गया है। आमतौर पर चालू खाते में 50 लाख रुपये और बचत खाते में 10 लाख रुपये जमा होने पर आयकर विभाग सूचनाएं मांगता है। लेकिन नोटबंदी की विशेष परिस्थिति में इस लिमिट को कम कर दिया गया था।

रिटर्न जमा करने वाले बढ़े
वर्ष 2016-17 में आयकर रिटर्न जमा करने वाले 2.28 लाख
वर्ष 2017-18 में आयकर रिटर्न जमा करने वाले 3.15 लाख

आयकर की वसूली भी बढ़ी
वित्तीय वर्ष 2016-17 में आयकर वसूली 191 करोड़ रुपये
वित्तीय वर्ष 2017-18 में आयकर वसूली 266 करोड़ रुपये
वित्तीय वर्ष 2018-19 में आयकर वसूली लक्ष्य 274 करोड़ रुपये

आईडीएस ने दिए 92 करोड़ रुपये
वित्तीय वर्ष 2016-17 में इन्कम डीक्लरेशन स्कीम में मिला टैक्स 46 करोड़ रुपये
वित्तीय वर्ष 2017-18 में इन्कम डीक्लरेशन स्कीम में मिला टैक्स 46 करोड़ रुपये

अलीगढ़ आयकर रेंज में पांच जिले
अलीगढ़, हाथरस, एटा, मैनपुरी, फर्रुखाबाद और कन्नौज जिला शामिल

एडवांस टैक्स जरूर जमा करें
आयकर विभाग अलीगढ़ के प्रधान आयकर आयुक्त आनंद सरन सिंह ने कहा है कि बड़े आयकर दाता अपना एडवांस कर समय से जमा करा दें। हर वर्ष की तरह इस बार भी 15 जून, 15 सितंबर, 15 दिसंबर और 15 मार्च को अपना एडवांस टैक्स जमा करा दें। जिससे समय से काम पूरा हो सके।

आईडीएस अब बंद
आयकर विभाग की इन्कम डीक्लरेशन स्कीम आईडीएस अब बंद हो गई है। इस स्कीम से गुजरे दो वित्तीय वर्ष में विभाग को लगभग 92 करोड़ रुपये का टैक्स मिला था। अब ये स्कीम दोबारा कभी भी शुरू हो सकती है।


आयकर विभाग ने 31 मई 2018 तक 13 संबंधित विभागों और बैंकों से अलग अलग सूचनाएं मांगी गई थी। जिसमें 5000 लोग ऐसे मिले हैं, जिन्होंने तयशुदा सीमा से अधिक का खर्च या निवेश किया है। ऐसे 2000 लोगों के केस दोबारा से खोले जा रहे हैं ताकि ये पता लग सके उन्होंने रिटर्न में सही जानकारी दी है या नहीं। इसके अलावा नोटबंदी के दौरान नगद जमा करने वाले 400 लोग अब सघन जांच के दायरे में हैं। कुछ लोगाें के नाम, पता और मोबाइल नंबर सही नहीं मिला है, जिससे उनको खोजना मुश्किल हो गया है। इन्कम डीक्लरेशन स्कीम बंद हो गई है। इस वितीय वर्ष का लक्ष्य 274 करोड़ रुपये है। आयकर रिटर्न जमा करने वालों की संख्या 2.28 लाख से 3.15 लाख तक पहुंच गई है। - आनंद सरन सिंह, प्रधान आयकर आयुक्त अलीगढ़।
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