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ठंडे बस्ते में पहुंचा 25 प्रधानाचार्यों के निलंबन का मामला
Updated Wed, 06 Dec 2017 02:02 AM IST
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ठंडे बस्ते में पहुंचा 25 प्रधानाचार्यों के निलंबन का मामला
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
पिछले शैक्षिक सत्र में यूपी बोर्ड परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले 25 प्रधानाचार्यों के निलंबन का मामला ठंडे बस्ते में चला गया है। अभी तक इन प्रधानाचार्यों का निलंबन नहीं हुआ है। हालांकि अधिकारी दबी जुबां से यह भी कह रहे हैं कि इन प्रधानाचार्यों के खिलाफ शासन ने रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश भी कर दिए हैं, लेकिन इसका आदेश अभी तक यहां नहीं आया है। ऐसे में सवाल यह है कि जब शासन का ढाई महीने पुराना आदेश ही दब गया तो आखिर रिपोर्ट का आदेश आ भी जाएगा तो उस पर भी शायद ही अमल हो।
उल्लेखनीय है कि पिछले शैक्षिक सत्र में यहां यूपी बोर्ड परीक्षा में जमकर गड़बड़ी हुई थी। बिना अर्हता वाले परीक्षार्थियोें को परीक्षा में शामिल करा दिया गया। इसकी शिकायत जब शासन से की गई तोे शासन ने जांच हुई। यहां भी 25 अग्रसारण केंद्र इसकी जद में आए। इनके खिलाफ तब शासन ने आदेश कर दिया कि यह विद्यालय डिबार कर दिए जाएं। इनके प्रधानाचार्यों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाए और परीक्षा सहायकों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई कर उनका गैरजनपद तबादला किया जाए। तत्कालीन डीआईओएस के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। उस समय यहां राजू राना डीआईओएस थे। उसके बाद वह मेरठ के डीआईओएस बने।
उन्हें तो शासन ने इस प्रकरण से पहले ही निलंबित कर दिया, लेकिन इन प्रधानाचार्यों के खिलाफ कार्रवाई को अमल में लाने के लिए यहां डीआईओएस कार्यालय से कई बिंदुओं पर आख्या मांगी गई। डीआईओएस ने यह आख्या भी क्षेत्रीय कार्यालय मेरठ को भेज दी, लेकिन अभी तक शासन व परिषद के कार्यालय से प्रधानाचार्यों के निलंबन का कोई आदेश नहीं आया है। बता दें कि वित्तपोषित व अन्य विद्यालयों में निलंबन की कार्रवाई प्रबंध समिति द्वारा की जाती है। ऐसे में शासन का जब कोई आदेश नहीं आया तो मामला ठंडे बस्ते में चला गया। हालांकि अब यह चर्चा भी हो रही है कि इन प्रधानाचार्यों के खिलाफ एफआईआर के आदेश भी शासन ने दिए हैं, लेकिन अधिकारी इसकी पुष्टि नहीं कर रहे। इस मामले में डीआईओएस डॉ. धर्मेंद्र शर्मा का कहना है कि शासन का जो भी अगला आदेश होगा। उस पर कार्रवाई की जाएगी।
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ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
पिछले शैक्षिक सत्र में यूपी बोर्ड परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले 25 प्रधानाचार्यों के निलंबन का मामला ठंडे बस्ते में चला गया है। अभी तक इन प्रधानाचार्यों का निलंबन नहीं हुआ है। हालांकि अधिकारी दबी जुबां से यह भी कह रहे हैं कि इन प्रधानाचार्यों के खिलाफ शासन ने रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश भी कर दिए हैं, लेकिन इसका आदेश अभी तक यहां नहीं आया है। ऐसे में सवाल यह है कि जब शासन का ढाई महीने पुराना आदेश ही दब गया तो आखिर रिपोर्ट का आदेश आ भी जाएगा तो उस पर भी शायद ही अमल हो।
उल्लेखनीय है कि पिछले शैक्षिक सत्र में यहां यूपी बोर्ड परीक्षा में जमकर गड़बड़ी हुई थी। बिना अर्हता वाले परीक्षार्थियोें को परीक्षा में शामिल करा दिया गया। इसकी शिकायत जब शासन से की गई तोे शासन ने जांच हुई। यहां भी 25 अग्रसारण केंद्र इसकी जद में आए। इनके खिलाफ तब शासन ने आदेश कर दिया कि यह विद्यालय डिबार कर दिए जाएं। इनके प्रधानाचार्यों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाए और परीक्षा सहायकों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई कर उनका गैरजनपद तबादला किया जाए। तत्कालीन डीआईओएस के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। उस समय यहां राजू राना डीआईओएस थे। उसके बाद वह मेरठ के डीआईओएस बने।
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उन्हें तो शासन ने इस प्रकरण से पहले ही निलंबित कर दिया, लेकिन इन प्रधानाचार्यों के खिलाफ कार्रवाई को अमल में लाने के लिए यहां डीआईओएस कार्यालय से कई बिंदुओं पर आख्या मांगी गई। डीआईओएस ने यह आख्या भी क्षेत्रीय कार्यालय मेरठ को भेज दी, लेकिन अभी तक शासन व परिषद के कार्यालय से प्रधानाचार्यों के निलंबन का कोई आदेश नहीं आया है। बता दें कि वित्तपोषित व अन्य विद्यालयों में निलंबन की कार्रवाई प्रबंध समिति द्वारा की जाती है। ऐसे में शासन का जब कोई आदेश नहीं आया तो मामला ठंडे बस्ते में चला गया। हालांकि अब यह चर्चा भी हो रही है कि इन प्रधानाचार्यों के खिलाफ एफआईआर के आदेश भी शासन ने दिए हैं, लेकिन अधिकारी इसकी पुष्टि नहीं कर रहे। इस मामले में डीआईओएस डॉ. धर्मेंद्र शर्मा का कहना है कि शासन का जो भी अगला आदेश होगा। उस पर कार्रवाई की जाएगी।
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