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ठंडे बस्ते में डॉ. माखन लाल को एएमयू में प्रोफेसर बनाने का प्रस्ताव
Updated Fri, 18 Aug 2017 01:31 AM IST
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ठंडे बस्ते में डॉ. माखन लाल को एएमयू में प्रोफेसर बनाने का प्रस्ताव
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
अलीगढ़। आरएसएस एवं भाजपा के करीबी माने जाने वाले आर्किलोजिस्ट डॉ. माखन लाल को एएमयू में एडजंट प्रोफेसर बनाने के प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
एएमयू कुलपति प्रो. तारिक मंसूर के पास डॉ. माखन लाल को इतिहास विभाग में एडजंट प्रोफेसर बनाने का प्रस्ताव कुछ लोगों ने भेजा था। डॉ. लाल पहले एएमयू के इतिहास विभाग में सेवा दे चुके है। वर्तमान में दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ हेरिटेज रिसर्च एंड मैनेजमेंट के डायरेक्टर है। इसकी भनक लगने के बाद ही विरोध शुरू हो गया। विरोध करने वाले लोग डॉ. लाल पर लगे आरोपों का हवाला दे रहे है। कुछ लोग यह भी कह रहे है कि डॉ. लाल ने हिस्ट्री ऑफ जनसंघ लिखा था।
विवाद के बाद बुक की बिक्री रोक दी गई थी। कुछ लोग डॉ. लाल के लेखन को विवादित मानते है। यह भी कह रहे है कि इन्होंने ही लिखा है कि हिंदुस्तानी वहीं है जिसका तीर्थ स्थल हिंदुस्तान में है। बहरहाल विवाद के बाद डॉ. लाल को एएमयू के इतिहास विभाग में एडजंट प्रोफेसर बनाने के प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
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एएमयू पीआरओ आफिस के एमआईसी प्रो. शाफे किदवई ने बताया कि कुछ लोगों ने डॉ. माखन लाल को एडजंट प्रोफेसर बनाने का प्रस्ताव दिया था लेकिन विरोध के बाद उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। एडजंट प्रोफेसर नियुक्त करने के लिए बोर्ड ऑफ स्टडीज से प्रपोजल आता है। लेकिन डॉ. लाल का कोई प्रपोजल भी विभाग या बोर्ड ऑफ स्टडीज से नहीं आया था। एएमयू इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. सैरूद अली नदीम रिजवी ने बताया कि इतिहास विभाग में डॉ. माखन लाल की नियुक्ति की बात बेबुनियाद है। बोर्ड ऑफ स्टडीज में कभी उनके नाम पर चर्चा ही नहीं हुई।
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ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
अलीगढ़। आरएसएस एवं भाजपा के करीबी माने जाने वाले आर्किलोजिस्ट डॉ. माखन लाल को एएमयू में एडजंट प्रोफेसर बनाने के प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
एएमयू कुलपति प्रो. तारिक मंसूर के पास डॉ. माखन लाल को इतिहास विभाग में एडजंट प्रोफेसर बनाने का प्रस्ताव कुछ लोगों ने भेजा था। डॉ. लाल पहले एएमयू के इतिहास विभाग में सेवा दे चुके है। वर्तमान में दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ हेरिटेज रिसर्च एंड मैनेजमेंट के डायरेक्टर है। इसकी भनक लगने के बाद ही विरोध शुरू हो गया। विरोध करने वाले लोग डॉ. लाल पर लगे आरोपों का हवाला दे रहे है। कुछ लोग यह भी कह रहे है कि डॉ. लाल ने हिस्ट्री ऑफ जनसंघ लिखा था।
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विवाद के बाद बुक की बिक्री रोक दी गई थी। कुछ लोग डॉ. लाल के लेखन को विवादित मानते है। यह भी कह रहे है कि इन्होंने ही लिखा है कि हिंदुस्तानी वहीं है जिसका तीर्थ स्थल हिंदुस्तान में है। बहरहाल विवाद के बाद डॉ. लाल को एएमयू के इतिहास विभाग में एडजंट प्रोफेसर बनाने के प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
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एएमयू पीआरओ आफिस के एमआईसी प्रो. शाफे किदवई ने बताया कि कुछ लोगों ने डॉ. माखन लाल को एडजंट प्रोफेसर बनाने का प्रस्ताव दिया था लेकिन विरोध के बाद उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। एडजंट प्रोफेसर नियुक्त करने के लिए बोर्ड ऑफ स्टडीज से प्रपोजल आता है। लेकिन डॉ. लाल का कोई प्रपोजल भी विभाग या बोर्ड ऑफ स्टडीज से नहीं आया था। एएमयू इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. सैरूद अली नदीम रिजवी ने बताया कि इतिहास विभाग में डॉ. माखन लाल की नियुक्ति की बात बेबुनियाद है। बोर्ड ऑफ स्टडीज में कभी उनके नाम पर चर्चा ही नहीं हुई।
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