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अलीगढ़ः चंदा से जीते 91 का चुनाव, बची रकम से खरीदी खुद की कार

Tue, 18 Jan 2022 01:15 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 18 Jan 2022 01:15 AM IST
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1991 election won by donation, bought own car with remaining amount
डॉ राम सिंह। - फोटो : CITY OFFICE
भूपेंद्र चौधरी
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सन 1991 में गंगीरी विधानसभा सीट से पहली बार चुनाव जीतने वाले डॉ. राम सिंह को जनता ने चंदा एकत्रित करके चुनाव लड़ाया था। चुनाव में उन्हें जीत भी मिली और रकम भी बहुत कम खर्च हुई थी। चुनावी खर्च के बाद बचे रुपयों से विधायक डॉ. राम सिंह ने तब अपने लिए कार खरीदी थी।
उस वक्त के चुनावों को याद करते हुए भाजपा के वयोवृद्ध नेता डॉ. राम सिंह बताते हैं कि उनके पास खुद की एक यजदी मोटरसाइकिल थी। उसी से चुनाव प्रचार करने क्षेत्र में जाते थे। रात अधिक हो जाती थी तो वहीं किसी गांव में समर्थक के साथ सो जाते थे। फिर एक कार किराए पर ली, ताकि समर्थकों के बीच आसानी से गांवों तक प्रचार के लिए पहुंच सकें। 1991 में वह भाजपा के टिकट पर पहली बार विधायक बने। तब जनता ने इतना चंदा दिया कि खुद का एक पैसा खर्च होना तो दूर चंदे की रकम भी बच गई। तब समर्थकों ने कहा कि विधायक बन गए हो क्षेत्र में आना जाना रहेगा। खुद की कार खरीद लो। विधायक बनने के बाद भी सादगी ऐसी थी कि हर कोई कहीं भी रोक लेता। मुहर पैड भी हर वक्त जेब में रखते जिसे जहां भी लेटर लिखवाना होता या किसी अन्य कागज पर विधायक के हस्ताक्षर मुहर लगवाने होते तो वह रास्ते में ही लोगों का काम कर देते थे। उनके इसी व्यवहार के चलते तीन बार जनता ने विधानसभा पहुंचाया। हालांकि चार चुनावों में हार भी उन्हें मिली, लेकिन अंतर बेहद मामूली रहा। ग्राम पंचायत सदस्य से लेकर ब्लॉक प्रमुख और फिर विधायक बनने तक का सफर तय किया। दो बार भाजपा के जिलाध्यक्ष भी रहे।
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अटल बिहारी वाजपेयी को दी 91455 रुपये की थैली
डॉ. राम सिंह शुरू से ही जनसंघ और भाजपा से जुड़े रहे। 14 अप्रैल 1981 को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने छर्रा में जनसभा की। तब डॉ. राम सिंह ने जनता से चंदा एकत्रित कर 91455 रुपये की थैली भेंट की। जनसभा में भारी भीड़ भी उन्होंने एकत्रित की। तब अटल बिहारी वाजपेयी ने उनकी काफी तारीफ की।
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कल्याण सिंह के साथ लखनऊ में दिया धरना
डॉ. राम सिंह पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बेहद करीबी थे। कल्याण सिंह के साथ राम मंदिर आंदोलन के दौरान सन 1990 में लखनऊ में उन्होंने धरना दिया था। तब 125 लोग जेल गए थे जिनमें डॉ. राम सिंह भी थे। उन्हें 13 दिन जेल में रहना पड़ा। बताते हैं कि कल्याण सिंह बाबूजी को कई बार वह अपनी यजदी मोटर साइकिल पर बैठाकर मीटिंग या चुनाव प्रचार में लेकर जाते थे।
राजनीतिक सफर
1972 में पैतृक गांव सुनपहर एदलपुर में ग्राम पंचायत सदस्य बने।
1973 में बरौली न्याय पंचायत के सरपंच चुने गए।
1982 व 1987 में गंगीरी के ब्लॉक प्रमुख बने।
1989 में निर्दलीय विधानसभा का चुनाव लड़े हारे।
1991, 1996 व 2007 में गंगीरी से तीन बार विधायक निर्वाचित।
1993, 2002 व 2012 में विधानसभा चुनाव में हार मिली।
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