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आईसीयू में उपन्यास लिखते थे काजी साहब
Updated Tue, 30 Oct 2018 02:48 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
कलम का बादशाह एवं शब्दों के जादूगर...। पद्मश्री प्रो. काजी अब्दुल सत्तार के बेहद करीबी लोग उनको तरह-तरह की उपमा देते हैं। वह अपनी रचनाओं के साथ-साथ अपने स्टाइल एवं बेबाकी के लिए भी मशहूर हैं।
प्रो. काजी अब्दुल सत्तार के जीवन पर ‘बातों मुलाकातों में’ पुस्तक लिखने वाले डॉ. प्रेम कुमार कहते हैं कि काजी साहब उर्दू के वरेण्य रचनाकार हैं। ऐतिहासिक उपन्यासों के लेखन की दृष्टि से उनका स्थान, स्तर और महत्व अन्य रचनाकारों से कही अधिक बड़ा, अलग और अनूठा है।
भाषा के लिहाज से उन्हें शब्दों का जादूगर माना जाता है। प्रेम कुमार कहते हैं कि उस आदमी की चाल, ढाल, अकड़ और तड़क अद्भुत थी। अपने आप को जमींदार मानना कभी नहीं छोड़ा। आखिरी समय तक उसी ठसक से जीते रहे। उनको जिंदगी में हर चीज उम्दा एवं खूबसूरत चाहिए थी।
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वह स्वयं अपने बारे में कहा करते थे कि मुझे तन्हाई से इश्क है। मुझे मालूम है कि मैं गुस्सैल हूं। मुझे लोग अहंकारी कहते हैं। लेकिन वे लोग नहीं समझते कि मैं किस स्तर पर लिटरेचर को जीता हूं और लिखता हूं। डॉ. प्रेम कहते है कि सचमुच जिंदगी के प्रति इतना लापरवाह आदमी नहीं दिखा।
साहित्य के लिए समर्पित और इश्क के लिए पागल। हृदय रोग से पीड़ित होने पर जेएन मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में भर्ती थे। डॉक्टरों से छिपाकर ‘ताजम सुल्तान’ लिखते थे। यह घटना करीब तीन साल पहले की है। यह उनका आखिरी उपन्यास है। संगीत, कला, इतिहास, भूगोल, संस्कृति, क्रिकेट का उन्हें गजब का ज्ञान था।
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कलम का बादशाह एवं शब्दों के जादूगर...। पद्मश्री प्रो. काजी अब्दुल सत्तार के बेहद करीबी लोग उनको तरह-तरह की उपमा देते हैं। वह अपनी रचनाओं के साथ-साथ अपने स्टाइल एवं बेबाकी के लिए भी मशहूर हैं।
प्रो. काजी अब्दुल सत्तार के जीवन पर ‘बातों मुलाकातों में’ पुस्तक लिखने वाले डॉ. प्रेम कुमार कहते हैं कि काजी साहब उर्दू के वरेण्य रचनाकार हैं। ऐतिहासिक उपन्यासों के लेखन की दृष्टि से उनका स्थान, स्तर और महत्व अन्य रचनाकारों से कही अधिक बड़ा, अलग और अनूठा है।
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भाषा के लिहाज से उन्हें शब्दों का जादूगर माना जाता है। प्रेम कुमार कहते हैं कि उस आदमी की चाल, ढाल, अकड़ और तड़क अद्भुत थी। अपने आप को जमींदार मानना कभी नहीं छोड़ा। आखिरी समय तक उसी ठसक से जीते रहे। उनको जिंदगी में हर चीज उम्दा एवं खूबसूरत चाहिए थी।
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वह स्वयं अपने बारे में कहा करते थे कि मुझे तन्हाई से इश्क है। मुझे मालूम है कि मैं गुस्सैल हूं। मुझे लोग अहंकारी कहते हैं। लेकिन वे लोग नहीं समझते कि मैं किस स्तर पर लिटरेचर को जीता हूं और लिखता हूं। डॉ. प्रेम कहते है कि सचमुच जिंदगी के प्रति इतना लापरवाह आदमी नहीं दिखा।
साहित्य के लिए समर्पित और इश्क के लिए पागल। हृदय रोग से पीड़ित होने पर जेएन मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में भर्ती थे। डॉक्टरों से छिपाकर ‘ताजम सुल्तान’ लिखते थे। यह घटना करीब तीन साल पहले की है। यह उनका आखिरी उपन्यास है। संगीत, कला, इतिहास, भूगोल, संस्कृति, क्रिकेट का उन्हें गजब का ज्ञान था।