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र्ज्ञानी जैल सिंह से मजबूत सुरक्षा घेरा कोविंद का-ᄋᄂ₩ᅦU¢₩
Updated Wed, 07 Mar 2018 01:44 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
32 साल पहले अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह से ज्यादा मजबूत सुरक्षा घेरा रामनाथ कोविंद का होगा। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद आज अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था के बीच एएमयू के दीक्षांत समारोह में शामिल होंगे।
आज एएमयू का 65 वां दीक्षांत समारोह एथलेटिक्स ग्राउंड में 11.30 बजे से आयोजित होने जा रहा है। इसमें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शामिल हो रहे हैं। करीब छह हजार लोगों की मौजूदगी में पांच हजार से अधिक छात्र-छात्राओं को डिग्रियां प्रदान की जाएगी।
रामनाथ कोविंद पांचवें राष्ट्रपति हैं जो एएमयू के दीक्षांत समारोह में शामिल हो रहे हैं। इससे पूर्व 1951 में देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, 1966 में डॉ. एस राधा कृष्णनन, 1976 में फखरुद्दीन अली अहमद एवं 1986 में ज्ञानी जैल सिंह एएमयू के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए थे।
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32 साल पहले जब ज्ञानी जैल सिंह यहां आए थे तो उनके लिए अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किये गये थे। दरअसल ज्ञानी जैल सिंह ऑपरेशन ब्लू स्टार के जमाने में यहां आए थे। जून 1984 में हर मंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) में भारतीय सेना द्वारा ऑपरेशन ब्लू स्टार शुरू कर दिया गया था।
अलगाववादियों की हिट लिस्ट में ज्ञानी जैल सिंह का नाम भी शामिल था। इसलिए जब वह 29 अप्रैल 1986 को एएमयू के दीक्षांत समारोह में पहुंचे तो उनकी सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे।
एएमयू उर्दू अकादमी के डायरेक्टर एवं पूर्व पीआरओ डॉ. राहत अबरार कहते है कि सुरक्षा कारणों से वह बग्घी पर नहीं बैठे थे। उन्हें वीसी आवास में ठहराया गया था।
उस समय सैयद हाशिम अली कुलपति और प्रो. एआर किदवई कुलाधिपति थे। वे वीसी लॉज से कार्यक्रम स्थल एथलेटिक्स ग्राउंड तक गए थे। राइडिंग स्क्वायड उनके साथ-साथ चल रहे थे।
सुरक्षा कारणों से राइडिंग स्क्वायड के हाथ में लोहे के बदले लकड़ी का तलवार देने की पेशकश की गई थी लेकिन तत्कालीन प्रशासन द्वारा स्वीकार नहीं किया गया था।
इस बार राइडिंग स्क्वायड के हाथ में तलवार नहीं होगी और न ही राष्ट्रपति एएमयू की परंपरागत बग्घी पर सवार होकर कार्यक्रम स्थल तक जाएंगे। राइडिंग स्क्वायड का कार्य भी पंडाल तक सिमट कर रह गया है।
एएमयू के अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा अधिकारियों के निर्देश के आधार पर तमाम इंतजाम किए जा रहे हैं। मोबाइल, कैमरा से लेकर किसी तरह का इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस लेकर जाने पर रोक लगा दी गई है।
कार्यक्रम में शामिल होने वाले हर एक आदमी का रिकार्ड इंतजामिया एवं प्रशासन के पास है। सुरक्षा अधिकारी हर कदम फूंक-फूंक कर उठा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि एएमयू के कुछ छात्र नेताओं ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के आगमन को लेकर सवाल उठाए थे। छात्र संघ के उपाध्यक्ष सज्जाद सुभान रॉथर ने भी राष्ट्रपति के कार्यक्रम में हिंसा की आशंका जता कर खलबली मचा दी थी।
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32 साल पहले अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह से ज्यादा मजबूत सुरक्षा घेरा रामनाथ कोविंद का होगा। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद आज अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था के बीच एएमयू के दीक्षांत समारोह में शामिल होंगे।
आज एएमयू का 65 वां दीक्षांत समारोह एथलेटिक्स ग्राउंड में 11.30 बजे से आयोजित होने जा रहा है। इसमें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शामिल हो रहे हैं। करीब छह हजार लोगों की मौजूदगी में पांच हजार से अधिक छात्र-छात्राओं को डिग्रियां प्रदान की जाएगी।
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रामनाथ कोविंद पांचवें राष्ट्रपति हैं जो एएमयू के दीक्षांत समारोह में शामिल हो रहे हैं। इससे पूर्व 1951 में देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, 1966 में डॉ. एस राधा कृष्णनन, 1976 में फखरुद्दीन अली अहमद एवं 1986 में ज्ञानी जैल सिंह एएमयू के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए थे।
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32 साल पहले जब ज्ञानी जैल सिंह यहां आए थे तो उनके लिए अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किये गये थे। दरअसल ज्ञानी जैल सिंह ऑपरेशन ब्लू स्टार के जमाने में यहां आए थे। जून 1984 में हर मंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) में भारतीय सेना द्वारा ऑपरेशन ब्लू स्टार शुरू कर दिया गया था।
अलगाववादियों की हिट लिस्ट में ज्ञानी जैल सिंह का नाम भी शामिल था। इसलिए जब वह 29 अप्रैल 1986 को एएमयू के दीक्षांत समारोह में पहुंचे तो उनकी सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे।
एएमयू उर्दू अकादमी के डायरेक्टर एवं पूर्व पीआरओ डॉ. राहत अबरार कहते है कि सुरक्षा कारणों से वह बग्घी पर नहीं बैठे थे। उन्हें वीसी आवास में ठहराया गया था।
उस समय सैयद हाशिम अली कुलपति और प्रो. एआर किदवई कुलाधिपति थे। वे वीसी लॉज से कार्यक्रम स्थल एथलेटिक्स ग्राउंड तक गए थे। राइडिंग स्क्वायड उनके साथ-साथ चल रहे थे।
सुरक्षा कारणों से राइडिंग स्क्वायड के हाथ में लोहे के बदले लकड़ी का तलवार देने की पेशकश की गई थी लेकिन तत्कालीन प्रशासन द्वारा स्वीकार नहीं किया गया था।
इस बार राइडिंग स्क्वायड के हाथ में तलवार नहीं होगी और न ही राष्ट्रपति एएमयू की परंपरागत बग्घी पर सवार होकर कार्यक्रम स्थल तक जाएंगे। राइडिंग स्क्वायड का कार्य भी पंडाल तक सिमट कर रह गया है।
एएमयू के अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा अधिकारियों के निर्देश के आधार पर तमाम इंतजाम किए जा रहे हैं। मोबाइल, कैमरा से लेकर किसी तरह का इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस लेकर जाने पर रोक लगा दी गई है।
कार्यक्रम में शामिल होने वाले हर एक आदमी का रिकार्ड इंतजामिया एवं प्रशासन के पास है। सुरक्षा अधिकारी हर कदम फूंक-फूंक कर उठा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि एएमयू के कुछ छात्र नेताओं ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के आगमन को लेकर सवाल उठाए थे। छात्र संघ के उपाध्यक्ष सज्जाद सुभान रॉथर ने भी राष्ट्रपति के कार्यक्रम में हिंसा की आशंका जता कर खलबली मचा दी थी।