{"_id":"5b870d9f42c792462d134f64","slug":"181535577503-aligarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जज्बे को सलाम : हॉकी खिलाड़ी बनने की खातिर छोड़ा गांव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जज्बे को सलाम : हॉकी खिलाड़ी बनने की खातिर छोड़ा गांव
Updated Thu, 30 Aug 2018 02:56 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
अक्सर, अच्छी पढ़ाई के लिए बच्चों को गांव छोड़ने की खबरें पढ़ते रहते हैं। मगर, इससे इतर दो भाइयों ने हॉकी खिलाड़ी बनने के लिए गांव छोड़ दिया। महानगर के रामबाग कॉलोनी में किराये पर मकान लेकर दोनों भाई स्टेडियम में अभ्यास कर रहे हैं, जिन्हें रोजाना उनकी दादी सिया देवी (70) स्टेडियम लाती-ले जाती हैं।
हाथरस जिले के गांव जरीनपुर भुर्रका (सिकंदराराऊ) के किसान वीरपाल सिंह के बेटे शिवम व श्रीकृष्ण ने गांव में हॉकी मैदान व प्रशिक्षक की सुविधा न होने के चलते अलीगढ़ आने का मन बना लिया। बेटे अपने ख्वाब पूरा करें, इसकी रजामंदी पिता ने भी दे दी। बकौल शिवम-श्रीकृष्ण, ‘पापा ने कहा कि अगर हॉकी पसंद है, तो पसंद को कैरियर भी बनाएं और अच्छा खिलाड़ी बनें’। महानगर स्थित स्मार्ट किड्ज स्कूल में शिवम कक्षा 6 व श्रीकृष्ण कक्षा 5 में पढ़ रहे हैं। दोनों भाई अग्रिम पंक्ति के खिलाड़ी बनना चाहते हैं।
नाती के साथ दादी भी कर रहीं मेहनत
दोनों भाई अपनी दादी सिया देवी (70) के साथ रहते हैं। दादी ही उनके लिए भोजन पकाती हैं। सिया देवी ने बताया कि परिवार में दो नाती व तीन नातिन हैं। उन्होंने कहा कि मुझे खेल के बारे में कोई जानकारी नहीं है। न ही परिवार में कोई खिलाड़ी है। जुलाई 2018 में अलीगढ़ आई हूं। बच्चों को अच्छा खिलाड़ी बनते देखना चाहती हूं, तभी इस उम्र में उनके साथ मैं भी मेहनत कर रही हूं।
विज्ञापन
हॉकी के लिए अच्छी खबर है। हॉकी के लिए गांव छोड़ दिया। जुलाई में दोनों बच्चे स्टेडियम आए थे। उन्हें कौन सा खेल पसंद है, इसकी जानकारी ली। दोनों भाइयों ने हॉकी खेलने की इच्छा जाहिर की। फौरन, उन्हें पंजीकृत कर दिया।
- नसरीन बानो, प्रभारी क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी
विज्ञापन
अक्सर, अच्छी पढ़ाई के लिए बच्चों को गांव छोड़ने की खबरें पढ़ते रहते हैं। मगर, इससे इतर दो भाइयों ने हॉकी खिलाड़ी बनने के लिए गांव छोड़ दिया। महानगर के रामबाग कॉलोनी में किराये पर मकान लेकर दोनों भाई स्टेडियम में अभ्यास कर रहे हैं, जिन्हें रोजाना उनकी दादी सिया देवी (70) स्टेडियम लाती-ले जाती हैं।
हाथरस जिले के गांव जरीनपुर भुर्रका (सिकंदराराऊ) के किसान वीरपाल सिंह के बेटे शिवम व श्रीकृष्ण ने गांव में हॉकी मैदान व प्रशिक्षक की सुविधा न होने के चलते अलीगढ़ आने का मन बना लिया। बेटे अपने ख्वाब पूरा करें, इसकी रजामंदी पिता ने भी दे दी। बकौल शिवम-श्रीकृष्ण, ‘पापा ने कहा कि अगर हॉकी पसंद है, तो पसंद को कैरियर भी बनाएं और अच्छा खिलाड़ी बनें’। महानगर स्थित स्मार्ट किड्ज स्कूल में शिवम कक्षा 6 व श्रीकृष्ण कक्षा 5 में पढ़ रहे हैं। दोनों भाई अग्रिम पंक्ति के खिलाड़ी बनना चाहते हैं।
विज्ञापन
नाती के साथ दादी भी कर रहीं मेहनत
दोनों भाई अपनी दादी सिया देवी (70) के साथ रहते हैं। दादी ही उनके लिए भोजन पकाती हैं। सिया देवी ने बताया कि परिवार में दो नाती व तीन नातिन हैं। उन्होंने कहा कि मुझे खेल के बारे में कोई जानकारी नहीं है। न ही परिवार में कोई खिलाड़ी है। जुलाई 2018 में अलीगढ़ आई हूं। बच्चों को अच्छा खिलाड़ी बनते देखना चाहती हूं, तभी इस उम्र में उनके साथ मैं भी मेहनत कर रही हूं।
विज्ञापन
हॉकी के लिए अच्छी खबर है। हॉकी के लिए गांव छोड़ दिया। जुलाई में दोनों बच्चे स्टेडियम आए थे। उन्हें कौन सा खेल पसंद है, इसकी जानकारी ली। दोनों भाइयों ने हॉकी खेलने की इच्छा जाहिर की। फौरन, उन्हें पंजीकृत कर दिया।
- नसरीन बानो, प्रभारी क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी