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अलीगढ़ महोत्सव में कोहिनूर मंच हंसराज की करिश्माई आवाज से बना कोहिनूर
Updated Sun, 28 Jan 2018 02:16 AM IST
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कोहिनूर मंच हंसराज की करिश्माई आवाज से बना ‘कोहिनूर’
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
कोहिनूर मंच पर जाने माने पंजाबी गायक हंसराज हंस ने अपनी जादुई आवाज से महफिल सजा दी। उनके करिश्माई और सूफियान कलाम ने सर्द मौसम में गुनगुनी तपिश का एहसास करा दिया।
सूफी नाइट हंसराज हंस का शुभारंभ शहर विधायक संजीव राजा व कोल विधायक अनिल पाराशर दीप जलाकर किया। यूं तो सूफी नाइट का आगाज शाम सात बजे हो जाना चाहिए, लेकिन साढ़े तीन घंटे बाद रात 10:27 मिनट पर हंसराज हंस ने मंच पर मुस्कराते हुए दस्तक दी। उन्होंने गजल ‘मेरे मालिक, मेरे भगवान मेरे जज्बात पर काबू दे दे’ से सूफी नाइट का आगाज किया।
हंसराज हंस ने फिल्म ‘बिच्छू’ का अंखियां हो लड़ी हो बीच बाजार, दिल लुट गया पहली बार’ ‘कच्चे धागे’ का गीत ‘खाली दिल नहीं जान भी ये मंगदा’ सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद उन्होंने ‘जिंदगी तूने ली, राखो मेरी लाज’ एक से बढ़कर एक गाने सुनाकर समां बांध दिया।
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गानों की धुन पर पंडाल में मौजूद लोग के पैर थिरकने लगे। बीच-बीच में टीम में शामिल कलाकारों ने ग्रुप डांस प्रस्तुत करके सभी का मन मोह लिया। जैसे-जैसे रात बढ़ती गई, कोहिनूर मंच ‘कोहिनूर’ में बदलता गया।
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
कोहिनूर मंच पर जाने माने पंजाबी गायक हंसराज हंस ने अपनी जादुई आवाज से महफिल सजा दी। उनके करिश्माई और सूफियान कलाम ने सर्द मौसम में गुनगुनी तपिश का एहसास करा दिया।
सूफी नाइट हंसराज हंस का शुभारंभ शहर विधायक संजीव राजा व कोल विधायक अनिल पाराशर दीप जलाकर किया। यूं तो सूफी नाइट का आगाज शाम सात बजे हो जाना चाहिए, लेकिन साढ़े तीन घंटे बाद रात 10:27 मिनट पर हंसराज हंस ने मंच पर मुस्कराते हुए दस्तक दी। उन्होंने गजल ‘मेरे मालिक, मेरे भगवान मेरे जज्बात पर काबू दे दे’ से सूफी नाइट का आगाज किया।
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हंसराज हंस ने फिल्म ‘बिच्छू’ का अंखियां हो लड़ी हो बीच बाजार, दिल लुट गया पहली बार’ ‘कच्चे धागे’ का गीत ‘खाली दिल नहीं जान भी ये मंगदा’ सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद उन्होंने ‘जिंदगी तूने ली, राखो मेरी लाज’ एक से बढ़कर एक गाने सुनाकर समां बांध दिया।
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गानों की धुन पर पंडाल में मौजूद लोग के पैर थिरकने लगे। बीच-बीच में टीम में शामिल कलाकारों ने ग्रुप डांस प्रस्तुत करके सभी का मन मोह लिया। जैसे-जैसे रात बढ़ती गई, कोहिनूर मंच ‘कोहिनूर’ में बदलता गया।