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जीएसटी में हार्डवेयर पर टैक्स की दर 18 प्रतिशत करें
Updated Tue, 25 Jul 2017 01:38 AM IST
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जीएसटी में हार्डवेयर पर टैक्स की दर 28 से 18 प्रतिशत करें
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
अलीगढ़। हार्डवेयर के लिए देश दुनिया में नाम कमा रहे अलीगढ़ के व्यापारी और एक्सपोर्टर जीएसटी लागू होने के बाद खासे परेशान हैं। उनकी परेशानी प्रमुख सचिव कुमार कमलेश के सामने भी दिखी। जीएसटी लागू होेने के बाद पहली बार सोमवार को वे व्यापारियों और अधिकारियों से संवाद करने आए थे। कलक्ट्रेट सभागार में हुई बैठक में उन्होंने व्यापारियों के सवाल सुने, कुछ जवाब दिए और कुछ डायरी में नोट किए। व्यापारियों ने एकसाथ मांग उठाई कि हार्डवेयर को 28 प्रतिशत की कर दर से 18 फीसदी के दायरे में लाया जाए। कुछ व्यापारियाें ने ताले पर कर की दर को 18 से 12 फीसदी करने की मांग की। प्रमुख सचिव ने कहा कि इस संबंध में जीएसटी कौंसिल से बात की जाएगी।
उनके सामने ई वे बिल, पुराना स्टाक क्लियर करने, बिल बुक को लेकर भी कई सवाल उठे। जिस पर एडिशनल कमिश्नर ग्रेड वन एके जैन और जीएसटी के नोडल अधिकारी आरएस विद्यार्थी ने जवाब दिए। जीएसटी पंजीयन तीन दिन में कराने का भी मुद्दा उठा। व्यापारियों ने कहा कि तीन दिन में पंजीयन नहीं मिल रहा है।
7-8 दिन में नोटिस मिलते हैं, जबकि नियमानुसार तीन दिन में पंजीयन की प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए। दि अलीगढ़ युवा अधिवक्ता संघ की ओर से इस संबंध में ज्ञापन भी दिया गया। अलीगढ़ उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के जिलाध्यक्ष भूपेंद्र वार्ष्णेय ने कहा कि जिस तरह से आयकर में हिसाब किताब नहीं रखने वालों को एक करोड़ रुपये के टर्नओवर पर 6 फीसदी का कर देना होता है। उसी तरह का सिस्टम जीएसटी में भी रखा जाए।
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व्यापारियों के कुछ सवालों के जवाब जिलाधिकारी ऋषिकेश भास्कर याशोद ने भी दिए। उनके साथ एडीएम सिटी श्याम बहादुर सिंह और एडीएम फाइनेंस बच्चू सिंह भी उपस्थित रहे। यहां पर यूपी स्टेट टैक्स विभाग से सीबी सिंह, जीएसटी के नोडल अधिकारी आरएस विद्यार्थी, संजीव मोहन, प्रमुख ताला एवं हार्डवेयर उद्यमी विजय बजाज, चंद्रशेखर शर्मा, पवन खंडेलवाल, नेकराम शर्मा, लल्लू सिंह, विवेक बगाई, शमन माहेश्वरी, सौरभ बालजीवन, ओम प्रकाश मास्टर, ओपी राठी, कमल गुप्ता आदि कारोबारी मौजूद रहे।
मंडी और स्थानीय निकाय के टैक्स बंद नहीं
बैठक में सवाल उठा कि जब जीएसटी लागू होने के बाद और सभी कर वसूली को बंद कर दिया गया है तो फिर मंडी शुल्क और स्थानीय निकाय एवं नगर निगम के शुल्क बंद क्यों नहीं हुए। इस पर जवाब दिया गया कि मंडी शुल्क या स्थानीय निकाय से लागू शुल्क जीएसटी में बंद नहीं हुए हैं। इसका फैसला राज्य सरकार को करना है।
सदी का सबसे बड़ा कर परिवर्तन
प्रमुख सचिव कुमार कमलेश ने कहा कि ये भारत के इतिहास में सदी का सबसे बड़ा कर परिवर्तन है। बैठक में मौजूद अधिकारी और व्यापारी रिटायर होने के बाद इसको याद करेंगे और इसके किस्से सुनाएंगे। इसलिए थोड़ा धैर्य रखें और इस कर की कुछ कमियों को दूर करने के लिए सुझाव देते रहें।
प्रमुख सचिव करेंगे निगरानी
प्रदेश सरकार ने हरेक जिले में जीएसटी की निगरानी के लिए तीन महीने तक प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारियों की तैनाती कर दी है, जो जीएसटी के बाद सामने आ रही नई समस्याओं का जमीनी स्तर पर अवलोकन करेंगे। व्यापारियों और अधिकारियों की समस्याओं को सीधे सरकार तक पहुंचा कर उनका निदान कराने में अहम भूमिका अदा करेंगे। अलीगढ़ में प्रमुख सचिव कुमार कमलेश तीन महीने तक व्यापारियों से संवाद करेंगे।
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ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
अलीगढ़। हार्डवेयर के लिए देश दुनिया में नाम कमा रहे अलीगढ़ के व्यापारी और एक्सपोर्टर जीएसटी लागू होने के बाद खासे परेशान हैं। उनकी परेशानी प्रमुख सचिव कुमार कमलेश के सामने भी दिखी। जीएसटी लागू होेने के बाद पहली बार सोमवार को वे व्यापारियों और अधिकारियों से संवाद करने आए थे। कलक्ट्रेट सभागार में हुई बैठक में उन्होंने व्यापारियों के सवाल सुने, कुछ जवाब दिए और कुछ डायरी में नोट किए। व्यापारियों ने एकसाथ मांग उठाई कि हार्डवेयर को 28 प्रतिशत की कर दर से 18 फीसदी के दायरे में लाया जाए। कुछ व्यापारियाें ने ताले पर कर की दर को 18 से 12 फीसदी करने की मांग की। प्रमुख सचिव ने कहा कि इस संबंध में जीएसटी कौंसिल से बात की जाएगी।
उनके सामने ई वे बिल, पुराना स्टाक क्लियर करने, बिल बुक को लेकर भी कई सवाल उठे। जिस पर एडिशनल कमिश्नर ग्रेड वन एके जैन और जीएसटी के नोडल अधिकारी आरएस विद्यार्थी ने जवाब दिए। जीएसटी पंजीयन तीन दिन में कराने का भी मुद्दा उठा। व्यापारियों ने कहा कि तीन दिन में पंजीयन नहीं मिल रहा है।
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7-8 दिन में नोटिस मिलते हैं, जबकि नियमानुसार तीन दिन में पंजीयन की प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए। दि अलीगढ़ युवा अधिवक्ता संघ की ओर से इस संबंध में ज्ञापन भी दिया गया। अलीगढ़ उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के जिलाध्यक्ष भूपेंद्र वार्ष्णेय ने कहा कि जिस तरह से आयकर में हिसाब किताब नहीं रखने वालों को एक करोड़ रुपये के टर्नओवर पर 6 फीसदी का कर देना होता है। उसी तरह का सिस्टम जीएसटी में भी रखा जाए।
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व्यापारियों के कुछ सवालों के जवाब जिलाधिकारी ऋषिकेश भास्कर याशोद ने भी दिए। उनके साथ एडीएम सिटी श्याम बहादुर सिंह और एडीएम फाइनेंस बच्चू सिंह भी उपस्थित रहे। यहां पर यूपी स्टेट टैक्स विभाग से सीबी सिंह, जीएसटी के नोडल अधिकारी आरएस विद्यार्थी, संजीव मोहन, प्रमुख ताला एवं हार्डवेयर उद्यमी विजय बजाज, चंद्रशेखर शर्मा, पवन खंडेलवाल, नेकराम शर्मा, लल्लू सिंह, विवेक बगाई, शमन माहेश्वरी, सौरभ बालजीवन, ओम प्रकाश मास्टर, ओपी राठी, कमल गुप्ता आदि कारोबारी मौजूद रहे।
मंडी और स्थानीय निकाय के टैक्स बंद नहीं
बैठक में सवाल उठा कि जब जीएसटी लागू होने के बाद और सभी कर वसूली को बंद कर दिया गया है तो फिर मंडी शुल्क और स्थानीय निकाय एवं नगर निगम के शुल्क बंद क्यों नहीं हुए। इस पर जवाब दिया गया कि मंडी शुल्क या स्थानीय निकाय से लागू शुल्क जीएसटी में बंद नहीं हुए हैं। इसका फैसला राज्य सरकार को करना है।
सदी का सबसे बड़ा कर परिवर्तन
प्रमुख सचिव कुमार कमलेश ने कहा कि ये भारत के इतिहास में सदी का सबसे बड़ा कर परिवर्तन है। बैठक में मौजूद अधिकारी और व्यापारी रिटायर होने के बाद इसको याद करेंगे और इसके किस्से सुनाएंगे। इसलिए थोड़ा धैर्य रखें और इस कर की कुछ कमियों को दूर करने के लिए सुझाव देते रहें।
प्रमुख सचिव करेंगे निगरानी
प्रदेश सरकार ने हरेक जिले में जीएसटी की निगरानी के लिए तीन महीने तक प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारियों की तैनाती कर दी है, जो जीएसटी के बाद सामने आ रही नई समस्याओं का जमीनी स्तर पर अवलोकन करेंगे। व्यापारियों और अधिकारियों की समस्याओं को सीधे सरकार तक पहुंचा कर उनका निदान कराने में अहम भूमिका अदा करेंगे। अलीगढ़ में प्रमुख सचिव कुमार कमलेश तीन महीने तक व्यापारियों से संवाद करेंगे।