{"_id":"5a8496cb4f1c1ba2268ba54e","slug":"171518638795-aligarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"छह साल में 2418 मौत, 3920 हुए घायल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छह साल में 2418 मौत, 3920 हुए घायल
Updated Thu, 15 Feb 2018 01:36 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
वर्ष 2012 से अब तक के छह सालों में 2418 मौत और 3920 दोपहिया वाहन चालक घायल, फिर भी हेलमेट क्यों नहीं पहनते हो भाई। यह सवाल हर किसी के जेहन में है। परंतु हेलमेट पहनना फिर भी शान के खिलाफ है।
लकदक बाइकों पर हुर्र-हुर्र करते युवा महानगर में हर रास्ते पर रैश बाइक ड्राइविंग करते दिख जाएंगे। यही अदा उन्हें मौत के मुंह में ले जाती है या जिंदगी भर अपाहिज बनने को मजबूर करती है।
पुलिस फाइलों में दर्ज आंकड़ों भी बताते हैं कि ज्यादातर मौतों का सबब रैश ड्राइविंग और उससे हुई हैड इंजरी ही है। इस मामले में यातायात पुलिस के जागरूकता अभियान नाकाफी साबित हुए हैं तो हर बुधवार को हेलमेट की चेकिंग भी इन युवाओं के जोश को कम नहीं कर सकी है।
विज्ञापन
दैनिक अमर उजाला ‘जिंदगी अनमोल है। इसे व्यर्थ ही न गवां देना’ सूत्रवाक्य को समझाने का प्रयास कर रही है तो उनमें जागरूकता लाकर महानगर के हजारों परिवारों के चिराग बुझने से बचाने का पुनीत काम भी कर रहा है।
क्या कहते हैं नागरिक
दोपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट सुरक्षा कवच की तरह है। भले ही यह युवाओं को बोझ की तरह लगता हो, लेकिन यही वह चीज है जो हमारे अनमोल जीवन की रक्षा करने में काफी हद तक सक्षम है।
राज सक्सेना, व्यापारी सासनी गेट
युवाओं को हेलमेट की महत्ता समझाने के लिए ट्रैफिक पुलिस को समय-समय पर वर्ष पर्यंत जागरूकता अभियान चलाने चाहिए। उन्हें दंड देने के बजाय समझाना चाहिए कि अगर आप नहीं रहोगे तो आपके परिवार पर क्या बीतेगी। उन्होंने आपको जान गंवाने के बजाय बाइक इसलिए दी थी कि आप अपनी शिक्षा, व्यवसाय और रोजमर्रा के काम तुरत फु रत कर सको।
अजय लिथो, व्यापारी अचल ताल
विज्ञापन
वर्ष 2012 से अब तक के छह सालों में 2418 मौत और 3920 दोपहिया वाहन चालक घायल, फिर भी हेलमेट क्यों नहीं पहनते हो भाई। यह सवाल हर किसी के जेहन में है। परंतु हेलमेट पहनना फिर भी शान के खिलाफ है।
लकदक बाइकों पर हुर्र-हुर्र करते युवा महानगर में हर रास्ते पर रैश बाइक ड्राइविंग करते दिख जाएंगे। यही अदा उन्हें मौत के मुंह में ले जाती है या जिंदगी भर अपाहिज बनने को मजबूर करती है।
विज्ञापन
पुलिस फाइलों में दर्ज आंकड़ों भी बताते हैं कि ज्यादातर मौतों का सबब रैश ड्राइविंग और उससे हुई हैड इंजरी ही है। इस मामले में यातायात पुलिस के जागरूकता अभियान नाकाफी साबित हुए हैं तो हर बुधवार को हेलमेट की चेकिंग भी इन युवाओं के जोश को कम नहीं कर सकी है।
विज्ञापन
दैनिक अमर उजाला ‘जिंदगी अनमोल है। इसे व्यर्थ ही न गवां देना’ सूत्रवाक्य को समझाने का प्रयास कर रही है तो उनमें जागरूकता लाकर महानगर के हजारों परिवारों के चिराग बुझने से बचाने का पुनीत काम भी कर रहा है।
क्या कहते हैं नागरिक
दोपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट सुरक्षा कवच की तरह है। भले ही यह युवाओं को बोझ की तरह लगता हो, लेकिन यही वह चीज है जो हमारे अनमोल जीवन की रक्षा करने में काफी हद तक सक्षम है।
राज सक्सेना, व्यापारी सासनी गेट
युवाओं को हेलमेट की महत्ता समझाने के लिए ट्रैफिक पुलिस को समय-समय पर वर्ष पर्यंत जागरूकता अभियान चलाने चाहिए। उन्हें दंड देने के बजाय समझाना चाहिए कि अगर आप नहीं रहोगे तो आपके परिवार पर क्या बीतेगी। उन्होंने आपको जान गंवाने के बजाय बाइक इसलिए दी थी कि आप अपनी शिक्षा, व्यवसाय और रोजमर्रा के काम तुरत फु रत कर सको।
अजय लिथो, व्यापारी अचल ताल