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अब एनआरसी में होगा कुपोषित बेटी का इलाज
Updated Sun, 14 Jan 2018 01:21 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
अब तक हरियाणा राज्य के आसरे रही अलीगढ़ की कुपोषित बेटी का उपचार मेडिकल कालेज स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र, एनआरसी में होगा। अमर उजाला में शनिवार को खबर प्रकाशित होने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम आरबीएसके की टीम सोमवार को बिटिया को केंद्र में भर्ती करा देगी।
शनिवार को टीम ने गांव में ही कुपोषण की शिकार लक्ष्मी का रुटीन चेकअप किया। पुराना रिकार्ड खंगालने पर पता चला कि टीकाकरण में लापरवाही एवं लेटलतीफी के चलते बच्ची का वजन छह वर्षों में महज छह किलोग्राम ही बढ़ा है।
बिजौली के गांव सिरसा निवासी हरिकिशन पुत्र शिवलाल अपनी कुपोषित बेटी लक्ष्मी के इलाज के लिए अब तक दूसरे राज्य हरियाणा के आसरे था। अमर उजाला में इसका खुलासा होने पर बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग सहित स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया।
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संबंधित एएनएम रेनू और आशा बहन अल्का रानी को सुबह से ही लक्ष्मी की जांच पड़ताल में लगा दिया गया। शुक्रवार तक जिस बेटी का नाम बेस लाइन सर्वे के आंकड़ों से गायब था, शनिवार को उसका सारा रिकॉर्ड खोज लिया गया। बिजौली सीएचसी अधीक्षक डॉ. विनोद कुमार ने स्वीकारा कि लक्ष्मी बेहद कमजोर है। लेकिन उनका मानना है कि इस कदर कुपोषण की वजह है बेटी के तालु में छेद। इसी कारण वो जरूरी डायट नहीं ले पाई है।
डॉ विनोद ने बताया कि लक्ष्मी का रिकॉर्ड जुटाकर रूटीन चेकअप भी कर लिया है। अब सोमवार को आरबीएसके की टीम बुलवाकर बिटिया को बेहतर उपचार के लिए मेडिकल कालेज स्थित एनआरसी में भर्ती कराएंगे। सीएमओ डॉ. एमएल अग्रवाल ने कहा कि जो जरूरत होगी, वो करेंगे। छह माह में लक्ष्मी को कुपोषण से बाहर लाएंगे।
छह वर्षों में बढ़ा महज छह किग्रा वजन
स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड से पता लगा कि लक्ष्मी का जन्म स्वास्थ्य केंद्र में 21 मार्च 2012 की दोपहर 1.33 बजे हुआ था। तब उसका वजन तीन किग्रा था। जन्म के 42 दिन बाद वजन साढे़ तीन किग्रा हो गया था। अब छह वर्ष होने को हैं, लेकिन वजन महज नौ किग्रा है। दूसरी ओर टीकाकरण के रिकॉर्ड से स्पष्ट हुआ कि बिटिया को बीसीजी का टीका जन्म के तीन दिन बाद 24 मार्च को लगा था। इसके बाद जन्म के डेढ़ माह बाद लगने वाला डीपीटी व हैपीटाइटिस का पहला टीका चार माह बाद 28 जुलाई को लगा था। इसी तरह हर टीके में लेटलतीफी हुई और काली खांसी का आखिरी टीका 24 मई 2014 को लगा।
आपराधिक पृष्ठभूमि के गांव का है लाचार पिता
लक्ष्मी का पिता गांव सिरसा निवासी हरिकिशन आपराधिक पृष्ठभूमि के गांव का है। इस गांव को चोट्टा सिरसा के नाम से भी जाना जाता है। इस वजह से इस गांव के लोगों को कोई आसानी से रोजी रोजगार तक नहीं देता। हरिकिशन पर भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। हालांकि समय के साथ इस गांव के लोगों के प्रति लोगों का नजरिया बदला है। हरिकिशन भी रोजगार के लिए पुलिस द्वारा पकड़ी गई लावारिस गायों को पालकर उनके दूध से अपना और परिवार का पेट पालता है।
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अब तक हरियाणा राज्य के आसरे रही अलीगढ़ की कुपोषित बेटी का उपचार मेडिकल कालेज स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र, एनआरसी में होगा। अमर उजाला में शनिवार को खबर प्रकाशित होने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम आरबीएसके की टीम सोमवार को बिटिया को केंद्र में भर्ती करा देगी।
शनिवार को टीम ने गांव में ही कुपोषण की शिकार लक्ष्मी का रुटीन चेकअप किया। पुराना रिकार्ड खंगालने पर पता चला कि टीकाकरण में लापरवाही एवं लेटलतीफी के चलते बच्ची का वजन छह वर्षों में महज छह किलोग्राम ही बढ़ा है।
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बिजौली के गांव सिरसा निवासी हरिकिशन पुत्र शिवलाल अपनी कुपोषित बेटी लक्ष्मी के इलाज के लिए अब तक दूसरे राज्य हरियाणा के आसरे था। अमर उजाला में इसका खुलासा होने पर बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग सहित स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया।
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संबंधित एएनएम रेनू और आशा बहन अल्का रानी को सुबह से ही लक्ष्मी की जांच पड़ताल में लगा दिया गया। शुक्रवार तक जिस बेटी का नाम बेस लाइन सर्वे के आंकड़ों से गायब था, शनिवार को उसका सारा रिकॉर्ड खोज लिया गया। बिजौली सीएचसी अधीक्षक डॉ. विनोद कुमार ने स्वीकारा कि लक्ष्मी बेहद कमजोर है। लेकिन उनका मानना है कि इस कदर कुपोषण की वजह है बेटी के तालु में छेद। इसी कारण वो जरूरी डायट नहीं ले पाई है।
डॉ विनोद ने बताया कि लक्ष्मी का रिकॉर्ड जुटाकर रूटीन चेकअप भी कर लिया है। अब सोमवार को आरबीएसके की टीम बुलवाकर बिटिया को बेहतर उपचार के लिए मेडिकल कालेज स्थित एनआरसी में भर्ती कराएंगे। सीएमओ डॉ. एमएल अग्रवाल ने कहा कि जो जरूरत होगी, वो करेंगे। छह माह में लक्ष्मी को कुपोषण से बाहर लाएंगे।
छह वर्षों में बढ़ा महज छह किग्रा वजन
स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड से पता लगा कि लक्ष्मी का जन्म स्वास्थ्य केंद्र में 21 मार्च 2012 की दोपहर 1.33 बजे हुआ था। तब उसका वजन तीन किग्रा था। जन्म के 42 दिन बाद वजन साढे़ तीन किग्रा हो गया था। अब छह वर्ष होने को हैं, लेकिन वजन महज नौ किग्रा है। दूसरी ओर टीकाकरण के रिकॉर्ड से स्पष्ट हुआ कि बिटिया को बीसीजी का टीका जन्म के तीन दिन बाद 24 मार्च को लगा था। इसके बाद जन्म के डेढ़ माह बाद लगने वाला डीपीटी व हैपीटाइटिस का पहला टीका चार माह बाद 28 जुलाई को लगा था। इसी तरह हर टीके में लेटलतीफी हुई और काली खांसी का आखिरी टीका 24 मई 2014 को लगा।
आपराधिक पृष्ठभूमि के गांव का है लाचार पिता
लक्ष्मी का पिता गांव सिरसा निवासी हरिकिशन आपराधिक पृष्ठभूमि के गांव का है। इस गांव को चोट्टा सिरसा के नाम से भी जाना जाता है। इस वजह से इस गांव के लोगों को कोई आसानी से रोजी रोजगार तक नहीं देता। हरिकिशन पर भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। हालांकि समय के साथ इस गांव के लोगों के प्रति लोगों का नजरिया बदला है। हरिकिशन भी रोजगार के लिए पुलिस द्वारा पकड़ी गई लावारिस गायों को पालकर उनके दूध से अपना और परिवार का पेट पालता है।