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बिगड़ गया नए नालों का फ्लो, हाई की जगह हो गया लो
Updated Tue, 18 Jul 2017 01:26 AM IST
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बिगड़ गया नए नालों का फ्लो, हाई की जगह हो गया लो
ब्यूरो, अमर उजाला
शहर में जलभराव की समस्या के समाधान के लिए बनाए गए नए नालों के फ्लो (पानी का ढलान की ओर बहना) में समस्या आ रही है। अधिकांश नालों के तल की लेबलिंग इस प्रकार की गई है कि उनका पानी आगे की ओर फ्लो नहीं हो रहा है। इस समस्या की ओर वरिष्ठ सभासद और नगर निगम कार्यकारिणी के उप सभापति कुलदीप पांडे ने ध्यान दिलाया है। उन्होंने कहा कि उनके ही क्षेत्र में नाला निर्माण पर आपत्ति किए जाने के बाद भी संबंधित ठेकेदार को आधा भुगतान कर दिया गया।
शहर में बरसात के समय में होने वाले जलभराव और तेजी से पानी की निकासी के लिए योजना बनाई गई कि सभी नालों को आपस में जोड़ दिया जाए। इसी के चलते बारहद्वारी, सुरक्षा विहार, सिटी स्कूल, फायर ब्रिगेड जीटी रोड, नई बस्ती आदि में नालों का निर्माण किया गया। लेकिन निर्माण के समय नाले के ढलान का ध्यान नहीं रखा गया। इसका नतीजा यह हुआ कि पानी आगे की ओर जाने के बजाए पीछे की और बैक कर रहा है।
इससे समस्या और भी बढ़ गई है। नगर निगम बोर्ड कार्यकारिणी के उप सभापति कुलदीप पांडे कहते हैं कि उनके इलाके में ही निशात सिनेमा के सामने करीब 14 लाख रुपये की लागत से नाले का निर्माण हुआ है। लेकिन इस नाले का पानी पीछे की ओर बह रहा है। इस पर उन्होंने आपत्ति करते हुए ठेकेदार का भुगतान रोकने की मांग की थी, लेकिन उसका आधा भुगतान कर दिया गया। इसमें निगम के कुछ कर्मचारियों की भी मिली भगत रही। यही स्थिति शहर में अन्य स्थानों पर बने नालों की भी है। कुलदीप पांडे कहते हैं कि इस तरह जलभराव की समस्या के समाधान के रूप में देखे जा रहे यह नाले अब अपने आप में समस्या बन गए हैं।
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ब्यूरो, अमर उजाला
शहर में जलभराव की समस्या के समाधान के लिए बनाए गए नए नालों के फ्लो (पानी का ढलान की ओर बहना) में समस्या आ रही है। अधिकांश नालों के तल की लेबलिंग इस प्रकार की गई है कि उनका पानी आगे की ओर फ्लो नहीं हो रहा है। इस समस्या की ओर वरिष्ठ सभासद और नगर निगम कार्यकारिणी के उप सभापति कुलदीप पांडे ने ध्यान दिलाया है। उन्होंने कहा कि उनके ही क्षेत्र में नाला निर्माण पर आपत्ति किए जाने के बाद भी संबंधित ठेकेदार को आधा भुगतान कर दिया गया।
शहर में बरसात के समय में होने वाले जलभराव और तेजी से पानी की निकासी के लिए योजना बनाई गई कि सभी नालों को आपस में जोड़ दिया जाए। इसी के चलते बारहद्वारी, सुरक्षा विहार, सिटी स्कूल, फायर ब्रिगेड जीटी रोड, नई बस्ती आदि में नालों का निर्माण किया गया। लेकिन निर्माण के समय नाले के ढलान का ध्यान नहीं रखा गया। इसका नतीजा यह हुआ कि पानी आगे की ओर जाने के बजाए पीछे की और बैक कर रहा है।
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इससे समस्या और भी बढ़ गई है। नगर निगम बोर्ड कार्यकारिणी के उप सभापति कुलदीप पांडे कहते हैं कि उनके इलाके में ही निशात सिनेमा के सामने करीब 14 लाख रुपये की लागत से नाले का निर्माण हुआ है। लेकिन इस नाले का पानी पीछे की ओर बह रहा है। इस पर उन्होंने आपत्ति करते हुए ठेकेदार का भुगतान रोकने की मांग की थी, लेकिन उसका आधा भुगतान कर दिया गया। इसमें निगम के कुछ कर्मचारियों की भी मिली भगत रही। यही स्थिति शहर में अन्य स्थानों पर बने नालों की भी है। कुलदीप पांडे कहते हैं कि इस तरह जलभराव की समस्या के समाधान के रूप में देखे जा रहे यह नाले अब अपने आप में समस्या बन गए हैं।
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