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खुफिया तंत्र की नाकामी से बिगड़े हालात
Updated Thu, 03 May 2018 03:16 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
एएमयू के बाब-ए-सैयद पर बुधवार को हुआ घटनाक्रम खुफिया तंत्र की नाकामी की ओर बड़ा इशारा कर रहा है। दो दिन से जिन्ना की तस्वीर को लेकर चल रहे विवाद के बाद भी खुफिया तंत्र की नजर विरोधी स्वर उठा रहे संगठनों पर नहीं थी। ऊपर से इन संगठनों ने ऐसी जिद ठान ली कि पलटवार में एएमयू छात्र भी अड़ गए। पुलिस व प्रशासनिक अमला इसके लिए कतई तैयार न था। अधिकारियों को मौके से पुलिस बल बुलाने में खासी कवायद करनी पड़ी। वह तो गनीमत कि समय रहते कई थानों की पुलिस व आरएएफ पहुंच गई। अगर जरा भी देर हो जाती को एएमयू के छात्र बरगद हाउस से आगे निकल जाते। ऐसे में बवाल ज्यादा हो सकता था।
कमजोर पड़ गई थी सिविल लाइंस पुलिस
एएमयू सर्किल पर दोपहर में हिंदू जागरण मंच व अन्य संगठनों के पदाधिकारी एकत्रित हो गए। इस बात की भनक किसी को न थी। उन्हें पुतला फूंकने व रजिस्ट्रार आफिस में प्रवेश करते देख एएमयू बुल हरकत में आए। सबसे पहले उन्होंने प्रॉक्टर को अवगत कराया। फिर प्रॉक्टर के माध्यम से थाने पर सूचना दी गई। खैर किसी तरह नोकझोंक के बाद उन्हें थाने ले जाया गया। मगर वह फिर एएमयू में घुसने और जिन्ना का पुतला फूंकने की जिद पर अड़ गए।
इस दौरान मात्र एक इंस्पेक्टर सिविल लाइंस जावेद खान तीन-चार सिपाहियों के साथ उन्हें रोकते व घेरने की नाकाम कोशिश करते हुए सर्किल तक लाए। मगर हिंदूवादी यहां से उन्हें धकियाते हुए एएमयू गेट तक पहुंच गए। बस वहां छात्रों से आमना-सामना हो गया। वह तो गनीमत कि उस समय छात्रों की संख्या मात्र चार-पांच थी। इसी बीच सीओ तृतीय संजीव दीक्षित पहुंच गए और किसी तरह इन युवाओं को वापस पहले एएमयू सर्किल लेकर आए। बाद में एसपी सिटी अतुल श्रीवास्तव भी आ गए और वहां पुतला फूंकने के बाद उन्हें थाना सिविल लाइंस भेजा गया। अगर पुलिस को इनके आने की पहले से सूचना होती तो शायद बात इस हद तक न बढ़ती।
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छात्रों को रोकने में खूब हुआ गुरिल्ला युद्ध
हिंदुवादियों को थाने भेजने के बाद पुलिस ने राहत महसूस की। मगर तब तक कैंपस के अंदर हिंदुवादियों के एएमयू गेट तक आने की खबर जंगल में लगी आग की तरह फैल गई। बस फिर क्या था, धीरे-धीरे छात्रों व छात्र नेताओं की भीड़ यहां जमा होने लगी। शुरुआती दौर में तो यह तत्काल गिरफ्तारी की बात कह रहे थे। मगर बाद में इन्होंने शर्त रख दी कि अगर 30 मिनट में गिरफ्तारी न हुई तो वह थाने जाकर प्रदर्शन करेंगे और खुद गिरफ्तारी देंगे।
बस इस शर्त ने बात बिगाड़ दी और करीब आधा घंटे तक पहले बाब-ए-सैयद पर, फिर रजिस्ट्रार आफिस के सामने, इसके बाद एएमयू सर्किल पर जबरदस्त धक्का-मुक्की, खींचतान और नारेबाजी के बाद भी छात्रों को रोका न जा सका। वह जिद करके जब थाने की ओर बढ़े तो बरगद हाउस पर फिर जबरन रोका गया। बस वहां हंगामे के बीच उधर से ईंट पत्थर चले और पुलिस ने लाठी चला दी। इसके बाद फिर बात बिगड़ गई।
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एएमयू के बाब-ए-सैयद पर बुधवार को हुआ घटनाक्रम खुफिया तंत्र की नाकामी की ओर बड़ा इशारा कर रहा है। दो दिन से जिन्ना की तस्वीर को लेकर चल रहे विवाद के बाद भी खुफिया तंत्र की नजर विरोधी स्वर उठा रहे संगठनों पर नहीं थी। ऊपर से इन संगठनों ने ऐसी जिद ठान ली कि पलटवार में एएमयू छात्र भी अड़ गए। पुलिस व प्रशासनिक अमला इसके लिए कतई तैयार न था। अधिकारियों को मौके से पुलिस बल बुलाने में खासी कवायद करनी पड़ी। वह तो गनीमत कि समय रहते कई थानों की पुलिस व आरएएफ पहुंच गई। अगर जरा भी देर हो जाती को एएमयू के छात्र बरगद हाउस से आगे निकल जाते। ऐसे में बवाल ज्यादा हो सकता था।
कमजोर पड़ गई थी सिविल लाइंस पुलिस
एएमयू सर्किल पर दोपहर में हिंदू जागरण मंच व अन्य संगठनों के पदाधिकारी एकत्रित हो गए। इस बात की भनक किसी को न थी। उन्हें पुतला फूंकने व रजिस्ट्रार आफिस में प्रवेश करते देख एएमयू बुल हरकत में आए। सबसे पहले उन्होंने प्रॉक्टर को अवगत कराया। फिर प्रॉक्टर के माध्यम से थाने पर सूचना दी गई। खैर किसी तरह नोकझोंक के बाद उन्हें थाने ले जाया गया। मगर वह फिर एएमयू में घुसने और जिन्ना का पुतला फूंकने की जिद पर अड़ गए।
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इस दौरान मात्र एक इंस्पेक्टर सिविल लाइंस जावेद खान तीन-चार सिपाहियों के साथ उन्हें रोकते व घेरने की नाकाम कोशिश करते हुए सर्किल तक लाए। मगर हिंदूवादी यहां से उन्हें धकियाते हुए एएमयू गेट तक पहुंच गए। बस वहां छात्रों से आमना-सामना हो गया। वह तो गनीमत कि उस समय छात्रों की संख्या मात्र चार-पांच थी। इसी बीच सीओ तृतीय संजीव दीक्षित पहुंच गए और किसी तरह इन युवाओं को वापस पहले एएमयू सर्किल लेकर आए। बाद में एसपी सिटी अतुल श्रीवास्तव भी आ गए और वहां पुतला फूंकने के बाद उन्हें थाना सिविल लाइंस भेजा गया। अगर पुलिस को इनके आने की पहले से सूचना होती तो शायद बात इस हद तक न बढ़ती।
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छात्रों को रोकने में खूब हुआ गुरिल्ला युद्ध
हिंदुवादियों को थाने भेजने के बाद पुलिस ने राहत महसूस की। मगर तब तक कैंपस के अंदर हिंदुवादियों के एएमयू गेट तक आने की खबर जंगल में लगी आग की तरह फैल गई। बस फिर क्या था, धीरे-धीरे छात्रों व छात्र नेताओं की भीड़ यहां जमा होने लगी। शुरुआती दौर में तो यह तत्काल गिरफ्तारी की बात कह रहे थे। मगर बाद में इन्होंने शर्त रख दी कि अगर 30 मिनट में गिरफ्तारी न हुई तो वह थाने जाकर प्रदर्शन करेंगे और खुद गिरफ्तारी देंगे।
बस इस शर्त ने बात बिगाड़ दी और करीब आधा घंटे तक पहले बाब-ए-सैयद पर, फिर रजिस्ट्रार आफिस के सामने, इसके बाद एएमयू सर्किल पर जबरदस्त धक्का-मुक्की, खींचतान और नारेबाजी के बाद भी छात्रों को रोका न जा सका। वह जिद करके जब थाने की ओर बढ़े तो बरगद हाउस पर फिर जबरन रोका गया। बस वहां हंगामे के बीच उधर से ईंट पत्थर चले और पुलिस ने लाठी चला दी। इसके बाद फिर बात बिगड़ गई।