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ओमान से लंका दहन को आए हैं रामलीला में हनुमान
Updated Sun, 01 Oct 2017 05:32 PM IST
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ओमान से लंका दहन को आए हैं रामलीला में हनुमान
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
रामलीला गोशाला कमेटी द्वारा आयोजित रामलीला महोत्सव में भगवान राम सहित अन्य देवताओं का स्वरूप बने सभी कलाकार शिक्षित हैं। लेकिन इनमें हनुमान की भूमिका निभाने वाले विजय चतुर्वेदी की बात ही अलग है। वह खाड़ी देश ओमान के मस्कट शहर में एक बड़ी कंपनी में अकाउंटेंट हैं। वह रामलीला में अपनी भूमिका को निभाने के लिए साल में तीन महीने के लिए वहां से छुट्टी लेकर भारत आते हैं।
रामलीला में राम का किरदार निभाने वाले मथुरा के बीकॉम द्वितीय वर्ष के छात्र हैं। यह पिछले तीन साल से राम का किरदार निभा रहे है। जबकि रामलीला में पिछले आठ वर्षों से अलग अलग भूमिकाएं निभा रहे हैं। इनकी इच्छा है कि शिक्षा पूरी करके पुलिस सेवा में जाएं। इसी प्रकार लक्ष्मण की भूमिका निभा रहे मथुरा के ही सूरज देव चतुर्वेदी कक्षा 10 के छात्र हैं और चार्टेड अकाउंटेंट बनना चाहते हैं। सीता की भूमिका निभा रहीं शिखा पाठक ग्रेजुएशन कर चुकी हैं और सरकारी सेवा में जाना चाहती हैं। पिछले 20 वर्षों से रावण की भूमिका निभा रहे सुनील चतुर्वेदी बीकॉम किए हुए हैं। पेशे से सुनील मथुरा नगर पालिका में ठेकेदार हैं। रावण की भूमिका ही इनकी पहचान बन गई है। सुनील कहते हैं कि रावण के लिए ही भगवान राम को पृथ्वी पर जन्म लेना पड़ा। वरना राम धरती पर नहीं आते।
हनुमान का त्याग बेजोड़ है: विजय
अलीगढ़। हनुमान का किरदार निभाने वाले विजय कहते हैं कि पूरी रामायण में हनुमान की भक्ति बिना किसी लोभ या प्रतिफल के है। सीता और लक्ष्मण अपना पत्नी धर्म और भ्राता धर्म निभाते हुए राम के साथ वन जाते हैं, लेकिन हनुमान केवल भक्त होने के नाते भगवान के साथ हैं। इसके एवज में कुछ प्राप्त करने की लालसा भी नहीं है। लंका दहन के बाद विभीषण को लंका, राम को सीता, अयोध्या को राजा, लक्ष्मण को अपना घर मिला। लेकिन हनुमान जहां थे, वहीं रहे।
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ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
रामलीला गोशाला कमेटी द्वारा आयोजित रामलीला महोत्सव में भगवान राम सहित अन्य देवताओं का स्वरूप बने सभी कलाकार शिक्षित हैं। लेकिन इनमें हनुमान की भूमिका निभाने वाले विजय चतुर्वेदी की बात ही अलग है। वह खाड़ी देश ओमान के मस्कट शहर में एक बड़ी कंपनी में अकाउंटेंट हैं। वह रामलीला में अपनी भूमिका को निभाने के लिए साल में तीन महीने के लिए वहां से छुट्टी लेकर भारत आते हैं।
रामलीला में राम का किरदार निभाने वाले मथुरा के बीकॉम द्वितीय वर्ष के छात्र हैं। यह पिछले तीन साल से राम का किरदार निभा रहे है। जबकि रामलीला में पिछले आठ वर्षों से अलग अलग भूमिकाएं निभा रहे हैं। इनकी इच्छा है कि शिक्षा पूरी करके पुलिस सेवा में जाएं। इसी प्रकार लक्ष्मण की भूमिका निभा रहे मथुरा के ही सूरज देव चतुर्वेदी कक्षा 10 के छात्र हैं और चार्टेड अकाउंटेंट बनना चाहते हैं। सीता की भूमिका निभा रहीं शिखा पाठक ग्रेजुएशन कर चुकी हैं और सरकारी सेवा में जाना चाहती हैं। पिछले 20 वर्षों से रावण की भूमिका निभा रहे सुनील चतुर्वेदी बीकॉम किए हुए हैं। पेशे से सुनील मथुरा नगर पालिका में ठेकेदार हैं। रावण की भूमिका ही इनकी पहचान बन गई है। सुनील कहते हैं कि रावण के लिए ही भगवान राम को पृथ्वी पर जन्म लेना पड़ा। वरना राम धरती पर नहीं आते।
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हनुमान का त्याग बेजोड़ है: विजय
अलीगढ़। हनुमान का किरदार निभाने वाले विजय कहते हैं कि पूरी रामायण में हनुमान की भक्ति बिना किसी लोभ या प्रतिफल के है। सीता और लक्ष्मण अपना पत्नी धर्म और भ्राता धर्म निभाते हुए राम के साथ वन जाते हैं, लेकिन हनुमान केवल भक्त होने के नाते भगवान के साथ हैं। इसके एवज में कुछ प्राप्त करने की लालसा भी नहीं है। लंका दहन के बाद विभीषण को लंका, राम को सीता, अयोध्या को राजा, लक्ष्मण को अपना घर मिला। लेकिन हनुमान जहां थे, वहीं रहे।
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