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आज गंगा दशहरा पर हजारों श्रद्धालु करेंगे गंगा में स्नान
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
आज (बुधवार) गंगा दशहरा है। जिले में गंगा दशहरा धूमधाम से मनाया जाएगा। शहर से लेकर देहात तक के श्रद्धालु गंगा स्नान करने जाएंगे। नरौरा घाट, नरवर घाट, रामघाट जाने का मार्ग चूंकि रामघाट रोड होकर ही है। इस कारण शहर का रामघाट रोड अति व्यस्त भी रहेगा। वहीं कई श्रद्धालु जगह-जगह पानी व शरबत की प्याऊ लगाएंगे। घरों में पूजा पाठ के बाद दान पुण्य किया जाएगा।
श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान के अध्यक्ष पंडित हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि वराह पुराण के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन हस्त नक्षत्र में गंगा स्वर्ग से धरती पर आई थीं। इसलिए इस दिन को हिंदू धर्म में मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन गंगा स्नान के साथ दान का बहुत महत्व होता है।
इस तरह करें पूजा पाठ
यह दिन संवत्सर का मुख माना गया है। इसलिए गंगा स्नान करके दूध, बताशा, जल, रोली, नारियल, धूप, दीप से पूजन करके दान देना चाहिए। इस दिन गंगा, शिव, ब्रह्मा, सूर्य देवता, भागीरथी तथा हिमालय की प्रतिमा बनाकर पूजन करने से विशेष फल प्राप्त होता है। इस दिन गंगा आदि का स्नान, अन्न-वस्त्र का दान, जप-तप, उपासना और उपवास किया जाता है। इससे दस प्रकार के पापों से छुटकारा मिलता है। मौसम भरपूर गर्मी का होता है। इस कारण छतरी, वस्त्र, जूते-चप्पल आदि दान में देना ज्यादा लाभदायक है। गंगाजी अथवा अन्य किसी पवित्र नदी पर सपरिवार स्नान के लिए जाएं। यदि संभव न हो तब घर पर ही गंगाजली को सम्मुख रखकर गंगाजी की पूजा-अराधना कर ली जाती है। अनेक परिवारों में दरवाजे पर पांच पत्थर रखकर पांच पीर पूजे जाते हैं। इसी प्रकार परिवार के प्रत्येक व्यक्ति के हिसाब से सवा सेर चूरमा बनाकर साधुओं, फकीरों और ब्राह्मणों में बांटने का भी रिवाज है। ब्राह्मणों को बड़ी मात्रा में दशहरा के दिन ही अनाज का दान दिया जाता है। आज ही के दिन आम खाने और आम दान करने को भी विशेष महत्व है।
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आज (बुधवार) गंगा दशहरा है। जिले में गंगा दशहरा धूमधाम से मनाया जाएगा। शहर से लेकर देहात तक के श्रद्धालु गंगा स्नान करने जाएंगे। नरौरा घाट, नरवर घाट, रामघाट जाने का मार्ग चूंकि रामघाट रोड होकर ही है। इस कारण शहर का रामघाट रोड अति व्यस्त भी रहेगा। वहीं कई श्रद्धालु जगह-जगह पानी व शरबत की प्याऊ लगाएंगे। घरों में पूजा पाठ के बाद दान पुण्य किया जाएगा।
श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान के अध्यक्ष पंडित हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि वराह पुराण के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन हस्त नक्षत्र में गंगा स्वर्ग से धरती पर आई थीं। इसलिए इस दिन को हिंदू धर्म में मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन गंगा स्नान के साथ दान का बहुत महत्व होता है।
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इस तरह करें पूजा पाठ
यह दिन संवत्सर का मुख माना गया है। इसलिए गंगा स्नान करके दूध, बताशा, जल, रोली, नारियल, धूप, दीप से पूजन करके दान देना चाहिए। इस दिन गंगा, शिव, ब्रह्मा, सूर्य देवता, भागीरथी तथा हिमालय की प्रतिमा बनाकर पूजन करने से विशेष फल प्राप्त होता है। इस दिन गंगा आदि का स्नान, अन्न-वस्त्र का दान, जप-तप, उपासना और उपवास किया जाता है। इससे दस प्रकार के पापों से छुटकारा मिलता है। मौसम भरपूर गर्मी का होता है। इस कारण छतरी, वस्त्र, जूते-चप्पल आदि दान में देना ज्यादा लाभदायक है। गंगाजी अथवा अन्य किसी पवित्र नदी पर सपरिवार स्नान के लिए जाएं। यदि संभव न हो तब घर पर ही गंगाजली को सम्मुख रखकर गंगाजी की पूजा-अराधना कर ली जाती है। अनेक परिवारों में दरवाजे पर पांच पत्थर रखकर पांच पीर पूजे जाते हैं। इसी प्रकार परिवार के प्रत्येक व्यक्ति के हिसाब से सवा सेर चूरमा बनाकर साधुओं, फकीरों और ब्राह्मणों में बांटने का भी रिवाज है। ब्राह्मणों को बड़ी मात्रा में दशहरा के दिन ही अनाज का दान दिया जाता है। आज ही के दिन आम खाने और आम दान करने को भी विशेष महत्व है।
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