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अब भूखी नहीं रहेंगी गायें
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
जिले की पंजीकृत 11 गोशाला, 11 अपंजीकृत गोशाला एवं ग्राम पंचायत स्तर पर बने 165 गो सेवा केंद्रों पर रह रहा गोवंश भूखा प्यासा नहीं रहेगा। इसके लिए 1.57 करोड़ रुपये जारी किए हैं। यही नहीं शासन स्तर से भी नगर निगम को एक करोड़ रुपये दिए गए हैं।
इस एक करोड़ से नगर निगम की गोशाला को चारे पानी और टीनशेड के साथ अन्य व्यवस्थाओं से लैस किया जाएगा। 57 लाख रुपये की रकम से जिले के ग्रामीण अंचलों में संचालित गोशालाओं में चारे और पानी की व्यवस्था की जाएगी। यही नहीं गो सेवा केंद्रों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए यहां गायों के गोबर से बर्मी कंपोस्ट खाद बनाने के भी निर्देश दिए गए हैं।
इस मामले में अफसरों की बैठक लेते हुए डीएम चंद्रभूषण सिंह ने कहा कि गोवंश की रक्षा एवं उनके भरण-पोषण हेतु शासन द्वारा पंजीकृत गौशालाओं को सीधे धनराशि भेजी जा रही है। जबकि अपंजीकृत गोशाला संचालक अपने संसाधनों द्वारा गोवंश की रक्षा कर रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि विभिन्न ग्राम एवं नगर पंचायतों में गोवंश की रक्षा हेतु गोवंश की जियो टैगिंग कर के उनको धनराशि दी जा रही है। उन्होंने बताया कि 1 करोड़ रुपये नगर निगम को नगरीय क्षेत्र में गोवंश की रक्षा हेतु दिया गया है।
ग्राम पंचायतों में संचालित गोशालाओं के संचालन हेतु 1 करोड़ रुपया पूर्व में दिया जा चुका है। जबकि 57 लाख रुपये की धनराशि शुक्रवार को आवंटित कर दी गयी है। उ
न्होंने बताया कि गौशालाओं में गर्मी वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाने की तैयारी की जा रही है। उप जिलाधिकारियों के माध्यम से गोशालाओं में चौकीदारों की नियुक्ति की जा रही है। प्रत्येक गोशाला में प्रतिमाह गौवंश के स्वास्थ्य परीक्षण हेतु पशु चिकित्सकों को क्षेत्रवार तैनात किया गया है।
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जिले की पंजीकृत 11 गोशाला, 11 अपंजीकृत गोशाला एवं ग्राम पंचायत स्तर पर बने 165 गो सेवा केंद्रों पर रह रहा गोवंश भूखा प्यासा नहीं रहेगा। इसके लिए 1.57 करोड़ रुपये जारी किए हैं। यही नहीं शासन स्तर से भी नगर निगम को एक करोड़ रुपये दिए गए हैं।
इस एक करोड़ से नगर निगम की गोशाला को चारे पानी और टीनशेड के साथ अन्य व्यवस्थाओं से लैस किया जाएगा। 57 लाख रुपये की रकम से जिले के ग्रामीण अंचलों में संचालित गोशालाओं में चारे और पानी की व्यवस्था की जाएगी। यही नहीं गो सेवा केंद्रों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए यहां गायों के गोबर से बर्मी कंपोस्ट खाद बनाने के भी निर्देश दिए गए हैं।
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इस मामले में अफसरों की बैठक लेते हुए डीएम चंद्रभूषण सिंह ने कहा कि गोवंश की रक्षा एवं उनके भरण-पोषण हेतु शासन द्वारा पंजीकृत गौशालाओं को सीधे धनराशि भेजी जा रही है। जबकि अपंजीकृत गोशाला संचालक अपने संसाधनों द्वारा गोवंश की रक्षा कर रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि विभिन्न ग्राम एवं नगर पंचायतों में गोवंश की रक्षा हेतु गोवंश की जियो टैगिंग कर के उनको धनराशि दी जा रही है। उन्होंने बताया कि 1 करोड़ रुपये नगर निगम को नगरीय क्षेत्र में गोवंश की रक्षा हेतु दिया गया है।
ग्राम पंचायतों में संचालित गोशालाओं के संचालन हेतु 1 करोड़ रुपया पूर्व में दिया जा चुका है। जबकि 57 लाख रुपये की धनराशि शुक्रवार को आवंटित कर दी गयी है। उ
न्होंने बताया कि गौशालाओं में गर्मी वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाने की तैयारी की जा रही है। उप जिलाधिकारियों के माध्यम से गोशालाओं में चौकीदारों की नियुक्ति की जा रही है। प्रत्येक गोशाला में प्रतिमाह गौवंश के स्वास्थ्य परीक्षण हेतु पशु चिकित्सकों को क्षेत्रवार तैनात किया गया है।