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आखिर किन परिस्थितियों में दी गई छर्रा अड्डे पेट्रोल पंप को एनओसी
Updated Thu, 13 Sep 2018 01:13 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
छर्रा अड्डा के साथ ध्वस्त किये गए पेट्रोल पंप को लेकर तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं। सभी के मन में यह सवाल है कि यदि यह पेट्रोल पंप सरकारी भूमि पर बना था तो वर्षों पुराने इस पंप को आखिर क्यों और किन परिस्थितियों में एनओसी दी। अगर गलत तरीके से एनओसी दी गई तो इसके पीछे कौन लोग हैं।
बताते चलें कि छर्रा अड्डा के समीप मैसर्स अलीगढ़ आटो सर्विस स्टेशन के नाम का पेट्रोल पंप वर्ष 1957 में स्थापित हुआ था। मंगलवार को इसे ध्वस्त कर दिया गया। प्रशासन का तर्क था कि यह पंप सरकारी भूमि घेर कर बनाया गया था।
लेकिन यह तथ्य आसानी से किसी के गले नहीं उतर रहा है। लोगों का सवाल है कि यदि यह पंप सरकारी भूमि पर बना था तो उसे उस समय आखिर क्यों और किन परिस्थितियों में खोले जाने की एनओसी दी गई। यदि नियमविरुद्घ एनओसी दी गई तो कौन-कौन लोग इसके लिए जिम्मेदार हैं और प्रशासन उनके खिलाफ क्या कार्रवाई करेगा।
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सवालों के इस झंझावत के बीच पूर्ति विभाग इस पंप के रिकार्ड खंगालने में जुटा हुआ है। बुधवार को दिनभर विभाग के कर्मचारी एवं अधिकारी पंप का रिकार्ड ढूंढ़ने में जुटे हुए थे।
जिला पूर्ति अधिकारी नीरज सिंह ने स्वीकार किया कि इतना पुराना रिकार्ड ढूंढने में दिक्कत आ रही है। लेकिन हम इसे ढूंढ लेंगे। फिलहाल पंप स्वामी को सरकारी भूमि पर पंप बनाने के मामले में नोटिस जारी कर दिया गया है।
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छर्रा अड्डा के साथ ध्वस्त किये गए पेट्रोल पंप को लेकर तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं। सभी के मन में यह सवाल है कि यदि यह पेट्रोल पंप सरकारी भूमि पर बना था तो वर्षों पुराने इस पंप को आखिर क्यों और किन परिस्थितियों में एनओसी दी। अगर गलत तरीके से एनओसी दी गई तो इसके पीछे कौन लोग हैं।
बताते चलें कि छर्रा अड्डा के समीप मैसर्स अलीगढ़ आटो सर्विस स्टेशन के नाम का पेट्रोल पंप वर्ष 1957 में स्थापित हुआ था। मंगलवार को इसे ध्वस्त कर दिया गया। प्रशासन का तर्क था कि यह पंप सरकारी भूमि घेर कर बनाया गया था।
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लेकिन यह तथ्य आसानी से किसी के गले नहीं उतर रहा है। लोगों का सवाल है कि यदि यह पंप सरकारी भूमि पर बना था तो उसे उस समय आखिर क्यों और किन परिस्थितियों में खोले जाने की एनओसी दी गई। यदि नियमविरुद्घ एनओसी दी गई तो कौन-कौन लोग इसके लिए जिम्मेदार हैं और प्रशासन उनके खिलाफ क्या कार्रवाई करेगा।
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सवालों के इस झंझावत के बीच पूर्ति विभाग इस पंप के रिकार्ड खंगालने में जुटा हुआ है। बुधवार को दिनभर विभाग के कर्मचारी एवं अधिकारी पंप का रिकार्ड ढूंढ़ने में जुटे हुए थे।
जिला पूर्ति अधिकारी नीरज सिंह ने स्वीकार किया कि इतना पुराना रिकार्ड ढूंढने में दिक्कत आ रही है। लेकिन हम इसे ढूंढ लेंगे। फिलहाल पंप स्वामी को सरकारी भूमि पर पंप बनाने के मामले में नोटिस जारी कर दिया गया है।