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फेल छात्रों की पुनर्परीक्षा कराने से फैलेगी अव्यवस्था
Updated Tue, 22 May 2018 01:48 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
मध्य प्रदेश सरकार ने सेकेंडरी व हायर सेकेंडरी में फेल होने वाले परीक्षार्थियों को दोबारा मौका देने का फैसला लिया। फेल परीक्षार्थियों को जून में दोबारा परीक्षा देनी होगी। सरकार की मंशा विद्यार्थियों का साल और उन्हें मानसिक अवसाद से बचाना है। सरकार के इस फैसले को लेकर शिक्षाविदें ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं।
शिक्षाविद् के बोल
अगर मध्य प्रदेश सरकार को विद्यार्थियों को पास करना ही है, तो ग्रेस मार्क देना चाहिए। दोबारा परीक्षा से अव्यवस्था फैलेगी। वैसे, 33 फीसदी अंक पर परीक्षार्थी को पास कर दिया जाता है, लेकिन अगर इसमें और उदारता बरतनी है तो उत्तीर्ण प्रतिशत 25 या 30 प्रतिशत कर दिया जाए। जिन शिक्षकों की ड्यूटी लगेगी, वह शैक्षिक सत्र में इसके एवज में अवकाश लेंगे, जो उचित नहीं होगा।
-डॉ. रक्षपाल सिंह, शिक्षाविद्
मध्य प्रदेश सरकार का सेकेंडरी व हायर सेकेंडरी की बोर्ड परीक्षाओं में फेल होने वाले छात्रों को उसी सत्र में पुनर्परीक्षा देने का अवसर प्रदान करना छात्र हित में उठाया गया एक सराहनीय कदम है। अक्सर देखने में आता है कि परीक्षा में फेल होने वाले छात्र मानसिक रूप से अवसाद ग्रस्त हो जाते हैं और कभी-कभी अवसाद की सघनता में आत्म हत्या जैसा घातक कदम भी उठा लेते हैं।
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-डॉ. वीपी पांडेय, शिक्षक, एसवी कॉलेज
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मध्य प्रदेश सरकार ने सेकेंडरी व हायर सेकेंडरी में फेल होने वाले परीक्षार्थियों को दोबारा मौका देने का फैसला लिया। फेल परीक्षार्थियों को जून में दोबारा परीक्षा देनी होगी। सरकार की मंशा विद्यार्थियों का साल और उन्हें मानसिक अवसाद से बचाना है। सरकार के इस फैसले को लेकर शिक्षाविदें ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं।
शिक्षाविद् के बोल
अगर मध्य प्रदेश सरकार को विद्यार्थियों को पास करना ही है, तो ग्रेस मार्क देना चाहिए। दोबारा परीक्षा से अव्यवस्था फैलेगी। वैसे, 33 फीसदी अंक पर परीक्षार्थी को पास कर दिया जाता है, लेकिन अगर इसमें और उदारता बरतनी है तो उत्तीर्ण प्रतिशत 25 या 30 प्रतिशत कर दिया जाए। जिन शिक्षकों की ड्यूटी लगेगी, वह शैक्षिक सत्र में इसके एवज में अवकाश लेंगे, जो उचित नहीं होगा।
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-डॉ. रक्षपाल सिंह, शिक्षाविद्
मध्य प्रदेश सरकार का सेकेंडरी व हायर सेकेंडरी की बोर्ड परीक्षाओं में फेल होने वाले छात्रों को उसी सत्र में पुनर्परीक्षा देने का अवसर प्रदान करना छात्र हित में उठाया गया एक सराहनीय कदम है। अक्सर देखने में आता है कि परीक्षा में फेल होने वाले छात्र मानसिक रूप से अवसाद ग्रस्त हो जाते हैं और कभी-कभी अवसाद की सघनता में आत्म हत्या जैसा घातक कदम भी उठा लेते हैं।
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-डॉ. वीपी पांडेय, शिक्षक, एसवी कॉलेज