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इंश्योरेंस कंपनी को दिया भुगतान का आदेश
Updated Sun, 25 Feb 2018 02:24 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
स्थायी लोक अदालत ने आईसीआईसीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी को भुगतान का आदेश दिया है। एक आपरेशन में पूरा खर्चा न देने पर परिवादी ने इसे लेकर लोक अदालत में गुहार लगाई थी।
स्थानीय रामघाट रोड रमेश विहार कॉलोनी निवासी दलवीर सिंह पुत्र मोहर पाल सिंह ने आईसीआईसीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी से 20 अगस्त 2010 को एक हेल्थ पॉलिसी ली थी। इसका उसने प्रति वर्ष नवीनीकरण भी कराया गया।
अंतिम नवीनीकरण 03 सितंबर 2014 से दो सितंबर 2015 को कराया था। पॉलिसी लेने के बाद परिवादी सन 2015 के माह मई-जून से अस्वस्थ रहने लगे और 10 जुलाई 2015 को अपना स्वास्थ्य परीक्षण आईएसआईएस हॉस्पिटल ग्रेटर कैलाश-1 में कराया। वहां पर डॉक्टरों ने परिवादी को बेनियन हाइपर पलाज़िया प्रोस्टीटस की बीमारी होना बताया और यह कहा कि इसका ऑपरेशन तुरंत कराया जाए।
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इस पर दलवीर सिंह ने अपनी सर्जरी कराई। इसमें हॉस्पिटल द्वारा उसको 1,24,351 रुपये का बिल दिया गया। दलवीर सिंह ने बीमा कंपनी को यह बिल दिया तो कंपनी ने मात्र 55,000 ही स्वीकृत किए तथा शेष धनराशि 69,351 इस आधार पर अस्वीकृत कर दिए कि बीमारी की सीमा समाप्त हो गई है।
इस प्रकार बीमा कंपनी ने क्लेम को खारिज कर दिया। बीमा कंपनी की शर्तों एवं नियमों के अनुसार जब उसने अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद 60 दिन की दवाओं तथा जांच रिपोर्ट मैं खर्च हुए रुपयों का क्लेम किया तो उसको भी सब लिमिट एग्जॉस्ट कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया।
इसके बाद दलवीर सिंह ने स्थायी लोक अदालत में याचिका दायर की। इस पर स्थायी लोक अदालत की तीन सदस्यों पीठ में शामिल पूर्व जिला जज व अध्यक्ष रियासत हुसैन, वरिष्ठ सदस्य शाजिया सिद्दीकी, डॉ. मीना बंसल ने दलवीर सिंह के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कंपनी को एक माह के अंदर 69,000 रुपये देने का आदेश दिया है।
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स्थायी लोक अदालत ने आईसीआईसीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी को भुगतान का आदेश दिया है। एक आपरेशन में पूरा खर्चा न देने पर परिवादी ने इसे लेकर लोक अदालत में गुहार लगाई थी।
स्थानीय रामघाट रोड रमेश विहार कॉलोनी निवासी दलवीर सिंह पुत्र मोहर पाल सिंह ने आईसीआईसीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी से 20 अगस्त 2010 को एक हेल्थ पॉलिसी ली थी। इसका उसने प्रति वर्ष नवीनीकरण भी कराया गया।
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अंतिम नवीनीकरण 03 सितंबर 2014 से दो सितंबर 2015 को कराया था। पॉलिसी लेने के बाद परिवादी सन 2015 के माह मई-जून से अस्वस्थ रहने लगे और 10 जुलाई 2015 को अपना स्वास्थ्य परीक्षण आईएसआईएस हॉस्पिटल ग्रेटर कैलाश-1 में कराया। वहां पर डॉक्टरों ने परिवादी को बेनियन हाइपर पलाज़िया प्रोस्टीटस की बीमारी होना बताया और यह कहा कि इसका ऑपरेशन तुरंत कराया जाए।
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इस पर दलवीर सिंह ने अपनी सर्जरी कराई। इसमें हॉस्पिटल द्वारा उसको 1,24,351 रुपये का बिल दिया गया। दलवीर सिंह ने बीमा कंपनी को यह बिल दिया तो कंपनी ने मात्र 55,000 ही स्वीकृत किए तथा शेष धनराशि 69,351 इस आधार पर अस्वीकृत कर दिए कि बीमारी की सीमा समाप्त हो गई है।
इस प्रकार बीमा कंपनी ने क्लेम को खारिज कर दिया। बीमा कंपनी की शर्तों एवं नियमों के अनुसार जब उसने अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद 60 दिन की दवाओं तथा जांच रिपोर्ट मैं खर्च हुए रुपयों का क्लेम किया तो उसको भी सब लिमिट एग्जॉस्ट कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया।
इसके बाद दलवीर सिंह ने स्थायी लोक अदालत में याचिका दायर की। इस पर स्थायी लोक अदालत की तीन सदस्यों पीठ में शामिल पूर्व जिला जज व अध्यक्ष रियासत हुसैन, वरिष्ठ सदस्य शाजिया सिद्दीकी, डॉ. मीना बंसल ने दलवीर सिंह के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कंपनी को एक माह के अंदर 69,000 रुपये देने का आदेश दिया है।