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बीमा कंपनी को देना पड़ेगा ट्रक स्वामी को 13 लाख का भुगतान
Updated Tue, 12 Dec 2017 02:45 AM IST
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बीमा कंपनी को देना होगा ट्रक स्वामी को 13 लाख का भुगतान
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
स्थायी लोक अदालत ने बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि वह ट्रक मालिक को 13 लाख रुपये का भुगतान करे। यह ट्रक चोेरी हो गया था और उसका क्लेम बीमा कंपनी ने खारिज कर दिया था। इस पर ट्रक स्वामी ने लोक अदालत में गुहार लगाई थी।
वीरेंद्र कुमार निवासी जट्टारी पंच विशा, टप्पल खैर ने एक ट्रक इंडसइंड बैंक लिमिटेड से ऋण लेकर खरीदा था। इसकी महीने की किश्त 56, 600 रुपये थी।
ट्रक का बीमा नेशनल इंश्योरेंस कंपनी द्वारा कराया था। इसकी बीमा धनराशि 17,10,200 रुपये थी। इसकी वैधता दिनांक 28 अगस्त 2014 से 27.08.2014 तक थी। 22 अप्रैल 2015 को अचानक ट्रक चोरी हो गया। इसकी एफआईआर रजपुरा जावर, जिला गौतमबुद्ध नगर में दर्ज करा दी गई तथा बीमा कंपनी को भी इसके बारे में सूचना दे दी गई। साथ ही ट्रक चोरी से संबंधित दस्तावेज कंपनी को उपलब्ध करा दिए गए।
पुलिस ने मामले की तहकीकात की। जब कोई सुराग हाथ नही लगा तो पुलिस द्वारा अंतिम सूची लगाकर दिनांक 12 सितंबर 2015 को रिपोर्ट दे दी।
ट्रक मालिक लगातार बीमा कंपनी के चक्कर काटता रहा। अंत में बीमा कंपनी द्वारा ट्रक चोरी होने में ड्राईवर की लापरवाही मानते हुए बीमा क्लेम खारिज कर दिया।
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थक हार कर उसने स्थायी लोक अदालत मैं इंसाफ के लिए गुहार लगाई। न्याय के सिद्धांतों को मद्देनजर रखते हुए स्थायी लोक अदालत की तीन सदस्यीय पीठ पूर्व जिला जज रियासत हुसैन, वरिष्ठ सदस्य शाजिया सिद्दीकी और डॉक्टर मीना बंसल ने वीरेंद्र कुमार के हकमें फैसला सुनाते हुए तेरह लाख रुपये के भुगतान का बीमा कंपनी को आदेश सुनाया और एक महीने के अंदर रुपये अदा न करने की स्थिति में नौ प्रतिशत की ब्याज से देना भी नियत किया।
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ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
स्थायी लोक अदालत ने बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि वह ट्रक मालिक को 13 लाख रुपये का भुगतान करे। यह ट्रक चोेरी हो गया था और उसका क्लेम बीमा कंपनी ने खारिज कर दिया था। इस पर ट्रक स्वामी ने लोक अदालत में गुहार लगाई थी।
वीरेंद्र कुमार निवासी जट्टारी पंच विशा, टप्पल खैर ने एक ट्रक इंडसइंड बैंक लिमिटेड से ऋण लेकर खरीदा था। इसकी महीने की किश्त 56, 600 रुपये थी।
ट्रक का बीमा नेशनल इंश्योरेंस कंपनी द्वारा कराया था। इसकी बीमा धनराशि 17,10,200 रुपये थी। इसकी वैधता दिनांक 28 अगस्त 2014 से 27.08.2014 तक थी। 22 अप्रैल 2015 को अचानक ट्रक चोरी हो गया। इसकी एफआईआर रजपुरा जावर, जिला गौतमबुद्ध नगर में दर्ज करा दी गई तथा बीमा कंपनी को भी इसके बारे में सूचना दे दी गई। साथ ही ट्रक चोरी से संबंधित दस्तावेज कंपनी को उपलब्ध करा दिए गए।
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पुलिस ने मामले की तहकीकात की। जब कोई सुराग हाथ नही लगा तो पुलिस द्वारा अंतिम सूची लगाकर दिनांक 12 सितंबर 2015 को रिपोर्ट दे दी।
ट्रक मालिक लगातार बीमा कंपनी के चक्कर काटता रहा। अंत में बीमा कंपनी द्वारा ट्रक चोरी होने में ड्राईवर की लापरवाही मानते हुए बीमा क्लेम खारिज कर दिया।
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थक हार कर उसने स्थायी लोक अदालत मैं इंसाफ के लिए गुहार लगाई। न्याय के सिद्धांतों को मद्देनजर रखते हुए स्थायी लोक अदालत की तीन सदस्यीय पीठ पूर्व जिला जज रियासत हुसैन, वरिष्ठ सदस्य शाजिया सिद्दीकी और डॉक्टर मीना बंसल ने वीरेंद्र कुमार के हकमें फैसला सुनाते हुए तेरह लाख रुपये के भुगतान का बीमा कंपनी को आदेश सुनाया और एक महीने के अंदर रुपये अदा न करने की स्थिति में नौ प्रतिशत की ब्याज से देना भी नियत किया।