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जागते रहिये और जमाने को जगाते रहिये...
Updated Wed, 26 Jul 2017 01:19 AM IST
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जागते रहिये और जमाने को जगाते रहिये...
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
अलीगढ़। आयकर दिवस पर मैरिस रोड स्थित पाम ट्री होटल में मंगलवार शाम कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें पद्मभूषण गोपाल दास नीरज ने कहा कि ‘जागते रहिये जमाने को जगाते रहिये, मेरी आवाज में आवाज मिलाते रहिये’। वहीं कुंवर बेचैन ने ‘उसने मेरे छोटेपन की इस तरह इज्जत रखी.. मैंने दीवारें उठाई उसने इन पर छत रखी, क्यों हथेली की लकीरों से है आगे उंगलियां.. रब ने भी किस्मत से आगे आपकी मेहनत रखी’ सुनाकर वाह-वाही बटोरी। कवि हरीश बेताब ने कश्मीर की समस्या को कुछ इस तरह पेश किया ‘अब भी यारों कश्मीर में अपना झंडा जलता है, तब भी गद्दारों का मेरे देश में सिक्का चलता है...’।
कवि अशोक अंजुम ने एकता का संदेश देते हुए कहा कि ‘मंदिर में कहने लगी मस्जिद की दीवार, दुनिया लड़ती है तो लड़े मिटे न अपना प्यार’। वहीं गाजियाबाद से आए अली हसन मकरैंडिया ने ‘मंदिर से मस्जिद से निकलो, गिरजे व गुरुद्वारों से, करो देश की आज हिफाजत, भीतर के गद्दारों से’ सुनाकर दर्शकों की तालियां बटोरी। कार्यक्रम को प्रेम किशोर पटाखा, सूर्य कुमार पांडेय आदि ने संबोधित किया।
अध्यक्षता गोपाल दास नीरज एवं संचालन दिल्ली की कवियत्री डॉ. कीर्ति काले ने किया। इससे पूर्व कार्यक्रम का उद्घाटन मंडलायुक्त सुरेश चंद्र शर्मा, डीआईजी अलीगढ़ रेंज, प्रधान आयकर आयुक्त गाजियाबाद रजनी कांत गुप्ता, सीआईटी अपील एसके श्रीवास्तव, अलीगढ़ रेंज के अपील आयुक्त सुनील वाजपेयी, संयुक्त आयुक्त राधाकृष्ण ने दीप प्रज्जवलित कर किया। इस मौके पर सीए एसोसिएशन के अध्यक्ष सीए अवन कुमार सिंह, सीए विजय कुमार, सीए रघुवंश सहाय आदि मौजूद रहे।
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ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
अलीगढ़। आयकर दिवस पर मैरिस रोड स्थित पाम ट्री होटल में मंगलवार शाम कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें पद्मभूषण गोपाल दास नीरज ने कहा कि ‘जागते रहिये जमाने को जगाते रहिये, मेरी आवाज में आवाज मिलाते रहिये’। वहीं कुंवर बेचैन ने ‘उसने मेरे छोटेपन की इस तरह इज्जत रखी.. मैंने दीवारें उठाई उसने इन पर छत रखी, क्यों हथेली की लकीरों से है आगे उंगलियां.. रब ने भी किस्मत से आगे आपकी मेहनत रखी’ सुनाकर वाह-वाही बटोरी। कवि हरीश बेताब ने कश्मीर की समस्या को कुछ इस तरह पेश किया ‘अब भी यारों कश्मीर में अपना झंडा जलता है, तब भी गद्दारों का मेरे देश में सिक्का चलता है...’।
कवि अशोक अंजुम ने एकता का संदेश देते हुए कहा कि ‘मंदिर में कहने लगी मस्जिद की दीवार, दुनिया लड़ती है तो लड़े मिटे न अपना प्यार’। वहीं गाजियाबाद से आए अली हसन मकरैंडिया ने ‘मंदिर से मस्जिद से निकलो, गिरजे व गुरुद्वारों से, करो देश की आज हिफाजत, भीतर के गद्दारों से’ सुनाकर दर्शकों की तालियां बटोरी। कार्यक्रम को प्रेम किशोर पटाखा, सूर्य कुमार पांडेय आदि ने संबोधित किया।
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अध्यक्षता गोपाल दास नीरज एवं संचालन दिल्ली की कवियत्री डॉ. कीर्ति काले ने किया। इससे पूर्व कार्यक्रम का उद्घाटन मंडलायुक्त सुरेश चंद्र शर्मा, डीआईजी अलीगढ़ रेंज, प्रधान आयकर आयुक्त गाजियाबाद रजनी कांत गुप्ता, सीआईटी अपील एसके श्रीवास्तव, अलीगढ़ रेंज के अपील आयुक्त सुनील वाजपेयी, संयुक्त आयुक्त राधाकृष्ण ने दीप प्रज्जवलित कर किया। इस मौके पर सीए एसोसिएशन के अध्यक्ष सीए अवन कुमार सिंह, सीए विजय कुमार, सीए रघुवंश सहाय आदि मौजूद रहे।
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