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मौसम का मिजाज, बच्चों की तबियत कर रहा नासाज
Updated Wed, 08 Nov 2017 02:03 AM IST
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मौसम का मिजाज, बच्चों की तबियत कर रहा नासाज
ब्यूरो,अमर उजाला, अलीगढ़।
मौसम में अचानक आया बदलाव सेहत पर और खास तौर से बच्चों की सेहत को प्रभावित कर रहा है। दीनदयाल अस्पताल, मलखान सिंह जिला अस्पताल की ओपीडी के अलावा निजी क्लीनिकों पर भी मरीजों की भीड़ है।
डॉक्टरों की सलाह है कि बच्चों की सेहत को लेकर बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है। दूसरी ओर मंगलवार को शहर के कई सरकारी और निजी स्कूलों में ऐसे मामले प्रकाश में आए जिसमें बच्चों को अचानक बुखार या बुखार जैसे लक्षण होने पर अभिभावकों को फोन कर उन्हें घर भेजा गया।
मलखान सिंह जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. रामकिशन कहतेे हैं कि अस्पताल में प्रतिदिन करीब 1600 से 1800 तक ओपीडी होती है। लेकिन इन दिनों ओपीडी की संख्या 2 हजार तक पहुंच गई है।
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इसमें 50 फीसदी मामले बच्चों की सीजनल बीमारियों से संबंधित हैं। इन दिनों होता यह है कि मनुष्य का शरीर एक प्रकार के अनुकूलन से दूसरे प्रकार के अनुुकूलन में प्रवेश करता है। अगर इसके प्रति सावधानी बरती जाए तो ठीक है अगर खान पान और रहन सहन में थोड़ी भी लापरवाही हो जाती है तो बच्चों का और बुजुर्गों का स्वास्थ्य सबसे ज्यादा प्रभावित होता है।
यह रखें सावधानी-
- फ्रिज के ठंडे पानी का इस्तेमाल नहीं करें, सादा पानी का प्रयोग करें
- दोपहर में अगर तापमान थोड़ा बढ़ जाता है तो भी ठंडे पानी का प्रयोग नहीं करें
- नहाने के लिए ताजा पानी या गुनगुना पानी इस्तेमाल करें। स्टोर किए हुए पानी से बचें
- रखे हुए खाने से बचें। ताजा और गरम खाने को ही प्राथमिकता दें
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ब्यूरो,अमर उजाला, अलीगढ़।
मौसम में अचानक आया बदलाव सेहत पर और खास तौर से बच्चों की सेहत को प्रभावित कर रहा है। दीनदयाल अस्पताल, मलखान सिंह जिला अस्पताल की ओपीडी के अलावा निजी क्लीनिकों पर भी मरीजों की भीड़ है।
डॉक्टरों की सलाह है कि बच्चों की सेहत को लेकर बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है। दूसरी ओर मंगलवार को शहर के कई सरकारी और निजी स्कूलों में ऐसे मामले प्रकाश में आए जिसमें बच्चों को अचानक बुखार या बुखार जैसे लक्षण होने पर अभिभावकों को फोन कर उन्हें घर भेजा गया।
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मलखान सिंह जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. रामकिशन कहतेे हैं कि अस्पताल में प्रतिदिन करीब 1600 से 1800 तक ओपीडी होती है। लेकिन इन दिनों ओपीडी की संख्या 2 हजार तक पहुंच गई है।
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इसमें 50 फीसदी मामले बच्चों की सीजनल बीमारियों से संबंधित हैं। इन दिनों होता यह है कि मनुष्य का शरीर एक प्रकार के अनुकूलन से दूसरे प्रकार के अनुुकूलन में प्रवेश करता है। अगर इसके प्रति सावधानी बरती जाए तो ठीक है अगर खान पान और रहन सहन में थोड़ी भी लापरवाही हो जाती है तो बच्चों का और बुजुर्गों का स्वास्थ्य सबसे ज्यादा प्रभावित होता है।
यह रखें सावधानी-
- फ्रिज के ठंडे पानी का इस्तेमाल नहीं करें, सादा पानी का प्रयोग करें
- दोपहर में अगर तापमान थोड़ा बढ़ जाता है तो भी ठंडे पानी का प्रयोग नहीं करें
- नहाने के लिए ताजा पानी या गुनगुना पानी इस्तेमाल करें। स्टोर किए हुए पानी से बचें
- रखे हुए खाने से बचें। ताजा और गरम खाने को ही प्राथमिकता दें