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अलीगढ़ में जीएसटी पर कार्यशाला, निर्यात में होगी वृद्ध

Fri, 14 Jul 2017 02:07 AM IST
Updated Fri, 14 Jul 2017 02:07 AM IST
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अलीगढ़ में जीएसटी पर कार्यशाला, निर्यात में होगी वृद्ध
जीएसटी से निर्यात में होगी बढ़ोतरी
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ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।

वाणिज्य कर विभाग के एडिशनल कमिश्नर ग्रेड 2 (अपील) एवं जनपद प्रभारी एलआर गुप्ता ने कहा कि जीएसटी लगने से देश में निर्यात में बढ़ोतरी होगी। आयात में कमी आएगी। क्योंकि जीएसटी में यह व्यवस्था की गई है कि निर्यात होने वाली वस्तुओं पर देश के अंदर लगने वाला पूरा कर निर्यातकों को ऑनलाइन वापस कर दिया जाएगा।

वृहस्पतिवार को मैरिस रोड स्थित एक होटल में एलआर गुप्ता पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर जोनल मास्टर ट्रेनर एवं डिप्टी कमिश्नर एके वर्मा एवं आरएस विद्यार्थी समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे।
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अधिकारियों ने बताया कि देश के बाहर से आने वाले सामान पर भी उसी दर से जीएसटी लगेगा, जिस दर से देश में बनने वाली वस्तुओं पर लगना है। जीएसटी की इस व्यवस्था से मेक इन इंडिया को भी बढ़ावा मिलेगा। पूरे देश में एक कर प्रणाली लागू होने से प्रदेश में औद्योगीकरण को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
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अधिकारियों ने बताया कि अलीगढ़ जोन (अलीगढ़, हाथरस, एटा, कासगंज एवं मथुरा) में 43 हजार तथा अलीगढ़ जनपद में करीब 23 हजार 450 व्यापारी वैट के अंतर्गत पंजीकृत थे। अलीगढ़ में 23 हजार 450 में से करीब 19 हजार 100 व्यापारी जीएसटी में माइग्रेट कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त जीएसटी नंबर के लिए करीब 741 आवेदन आए हैं।

अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश के व्यापारी जीएसटी में एक साल के लिए पांच लाख की दुर्घटना बीमा से कवर है। यह सुविधा दूसरे राज्यों में नहीं है। वैट के समय से ही व्यापारी दुर्घटना बीमा से कवर है। इस अवसर पर विभाग के अधिकारी अरुण सिंह, शिवानी गुप्ता, राजीव कुमार, आशीष आदि मौजूद थे।

कुछ खास बिंदु

जीएसटी लागू होने के ठीक पूर्व राज्य वैट अथवा केंद्रीय उत्पाद कर/सेवा कर में वैध पैन होल्डर एवं पंजीकृत सभी डीलरों को प्रथम छह माह तक जीएसटी में प्रोविजनली पंजीकृत माना जाएगा।

जिन लोगों को प्रोविजनल आईडी प्राप्त नहीं हुआ है और वे राज्य वैट अथवा केंद्रीय उत्पाद कर/सेवा कर में पंजीकृत रहें हैं, ऐसे डीलर पुराने टिन के साथ इनवाइस पर ‘प्रोवि. आईडी अप्राप्त’ की मोहर लगाकर इनवाइस जारी करें और बाद में रिवाइज्ड इनवाइस जारी कर सकते हैं।

इनवाइस का कोई प्रारूप नियत नहीं है, लेकिन उसमें 16 आवश्यक सूचनाओं का समावेश होना आवश्यक है। अर्थात व्यापारी अपनी सुविधानुसार मैनुअली, कंप्यूटर जनित इनवाइस जिसमें 16 सूचनाएं सम्मिलत हैं, जारी करने के लिए स्वतंत्र हैं।

अपंजीकृत से खरीद के लिए पंजीकृत डीलर द्वारा रिसीट वाउचर जारी किया जाना है।

1.5 करोड़ तक के संव्यवहार के लिए एचएसएन कोड जारी करना आवश्यक नहीं है। पांच करोड़ तक के डीलरों के लिए एचएसएन कोड के प्रथम दो डिजिट लिखना व पांच करोड़ से अधिक के डीलरों को एचएसएन कोड के चार डिजिट लिखना आवश्यक है।


20 लाख वार्षिक टर्नओवर तक के डीलरों को जीएसटी में पंजीयन की बाध्यता नहीं है और 75 लाख रुपये टर्न ओवर तक के व्यापारियों के लिए समाधान योजना लागू की गई है, जिसमें उन्हें नियत दर से कर/रिटर्न त्रैमासिक ही देना है।
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