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दीपावली के बाद भी वायु प्रदूषण मानक से तीन गुणा अधिक
Updated Sat, 10 Nov 2018 02:12 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
दीपावली के बाद भी महानगर में वायु प्रदूषण मानक से करीब तीन गुणा अधिक है और मानव तथा जीव जंतुओं के स्वास्थ्य का बैंड बजा रहा है। दिल्ली एवं एनसीआर की तरह अलीगढ़ के लोग भी जानलेवा प्रदूषण की गिरफ्त में हैं। सांस के मरीजों में करीब 15 प्रतिशत तक इजाफा हुआ है।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी रामगोपाल का कहना है कि दीपावली के दिन महानगर (आवासीय क्षेत्र, ज्ञान सरोवर) में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़कर 407 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया था, जो पिछले साल 380 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की तुलना में बहुत अधिक है।
दीपावली के अगले दिन प्रदूषण का स्तर घटकर 280 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पर पहुंच गया हैं। हालांकि यह अभी भी मानक से करीब तीन गुणा अधिक है। उनका कहना है कि 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक वायु प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है।
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उल्लेखनीय है कि दीपावली के पहले से ही दिल्ली में चारो ओर प्रदूषण के धुंध की चादर फैली हुई है। एनसीआर की स्थिति भी चिंताजनक एवं खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका है। हाल ही में डब्लूएचओ द्वारा जारी दुनिया के सर्वाधिक प्रदूषित 15 शहरों में 14 भारत एवं उसमें से 4 उत्तर प्रदेश के हैं।
कानपुर को सबसे प्रदूषित शहर के रूप में चिन्हित किया गया है। इस सूची में फरीदाबाद, वाराणसी, लखनऊ एवं आगरा के अतिरिक्त दिल्ली भी शामिल है। अलीगढ़ में भी स्थिति बेहद खराब है और लोग इसकी वजह से तरह-तरह की बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
प्रदूषण के कारण बढ़ रहे हार्ट के मरीज
जेएन मेडिकल कॉलेज के हृदयरोग विशेषज्ञ प्रो. एमयू रब्बानी का कहना है कि प्रदूषण के कारण हृदय रोग के रोगी बढ़ रहे हैं। पहले प्रदूषण को रिस्क फैक्टर नहीं माना जाता था। लेकिन नए शोध से पता चला है कि प्रदूषण के कारण भी हार्ट के मरीज बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वातावरण में मौजूद कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाईऑक्साइड, हाईड्रो कार्बन और 2.5 माइक्रोन से कम के छोटे-छोटे पार्टिकल ब्लड सर्कुलेशन में चले जाते हैं। इसकी वजह से हार्ट की धमनियां क्षतिग्रस्त हो सकती है या उसमें सूजन आ सकती है। रक्त संचार में रुकावट पैदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि अधिक उम्र के लोग तुरंत प्रभाव में आ सकते है। जबकि लगातार प्रदूषित वातावरण में रहने वाले लोग धीरे-धीरे इसकी चपेट में आते हैं। उल्लेखनीय है कि गत दिन एएमयू में पहुंचे विख्यात हृदयरोग विशेषज्ञ पद्मश्री डॉ. अशोक सेठ ने भी कहा था कि प्रदूषण के कारण हार्ट के मरीज बढ़ रहे हैं।
सांस के मरीज में 15 प्रतिशत इजाफा
जेएन मेडिकल कॉलेज के टीबी एवं श्वसन तंत्र विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक प्रो. राकेश भार्गव कहते है कि प्रदूषण एवं मौसम में परिवर्तन के बाद सांस के मरीजों की संख्या में करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। प्रदूषण ने अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया है।
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दीपावली के बाद भी महानगर में वायु प्रदूषण मानक से करीब तीन गुणा अधिक है और मानव तथा जीव जंतुओं के स्वास्थ्य का बैंड बजा रहा है। दिल्ली एवं एनसीआर की तरह अलीगढ़ के लोग भी जानलेवा प्रदूषण की गिरफ्त में हैं। सांस के मरीजों में करीब 15 प्रतिशत तक इजाफा हुआ है।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी रामगोपाल का कहना है कि दीपावली के दिन महानगर (आवासीय क्षेत्र, ज्ञान सरोवर) में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़कर 407 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया था, जो पिछले साल 380 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की तुलना में बहुत अधिक है।
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दीपावली के अगले दिन प्रदूषण का स्तर घटकर 280 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पर पहुंच गया हैं। हालांकि यह अभी भी मानक से करीब तीन गुणा अधिक है। उनका कहना है कि 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक वायु प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है।
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उल्लेखनीय है कि दीपावली के पहले से ही दिल्ली में चारो ओर प्रदूषण के धुंध की चादर फैली हुई है। एनसीआर की स्थिति भी चिंताजनक एवं खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका है। हाल ही में डब्लूएचओ द्वारा जारी दुनिया के सर्वाधिक प्रदूषित 15 शहरों में 14 भारत एवं उसमें से 4 उत्तर प्रदेश के हैं।
कानपुर को सबसे प्रदूषित शहर के रूप में चिन्हित किया गया है। इस सूची में फरीदाबाद, वाराणसी, लखनऊ एवं आगरा के अतिरिक्त दिल्ली भी शामिल है। अलीगढ़ में भी स्थिति बेहद खराब है और लोग इसकी वजह से तरह-तरह की बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
प्रदूषण के कारण बढ़ रहे हार्ट के मरीज
जेएन मेडिकल कॉलेज के हृदयरोग विशेषज्ञ प्रो. एमयू रब्बानी का कहना है कि प्रदूषण के कारण हृदय रोग के रोगी बढ़ रहे हैं। पहले प्रदूषण को रिस्क फैक्टर नहीं माना जाता था। लेकिन नए शोध से पता चला है कि प्रदूषण के कारण भी हार्ट के मरीज बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वातावरण में मौजूद कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाईऑक्साइड, हाईड्रो कार्बन और 2.5 माइक्रोन से कम के छोटे-छोटे पार्टिकल ब्लड सर्कुलेशन में चले जाते हैं। इसकी वजह से हार्ट की धमनियां क्षतिग्रस्त हो सकती है या उसमें सूजन आ सकती है। रक्त संचार में रुकावट पैदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि अधिक उम्र के लोग तुरंत प्रभाव में आ सकते है। जबकि लगातार प्रदूषित वातावरण में रहने वाले लोग धीरे-धीरे इसकी चपेट में आते हैं। उल्लेखनीय है कि गत दिन एएमयू में पहुंचे विख्यात हृदयरोग विशेषज्ञ पद्मश्री डॉ. अशोक सेठ ने भी कहा था कि प्रदूषण के कारण हार्ट के मरीज बढ़ रहे हैं।
सांस के मरीज में 15 प्रतिशत इजाफा
जेएन मेडिकल कॉलेज के टीबी एवं श्वसन तंत्र विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक प्रो. राकेश भार्गव कहते है कि प्रदूषण एवं मौसम में परिवर्तन के बाद सांस के मरीजों की संख्या में करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। प्रदूषण ने अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया है।