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मिलते जुलते नाम के चलते प्रो. इरफान हबीब हुए परेशान
Updated Fri, 13 Jul 2018 02:13 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
प्रसिद्ध इतिहासकार प्रोफेसर इरफान हबीब के मिलते जुलते नाम के दिल्ली में रहने वाले एक शिक्षक के कांग्रेस पार्टी के एक कार्यक्रम में शामिल हुए। इसके बाद चर्चा यह फैल गई एएमयू के प्रोफेसर इरफान हबीब, जो कि कम्यूनिस्ट हैं, वह कांग्रेस के कार्यक्रम में शामिल हो गए हैं। उनकी वहां मौजूदगी को लेकर कई तरह के कयास लगाए जाने लगे। गुरुवार को स्वयं प्रोफेसर इरफान हबीब इन बातों का खंडन किया और स्थिति को स्पष्ट किया।
प्रो. इरफान हबीब ने गुरुवार को बताया कि दिल्ली में जो इरफान हबीब हैं उनका नाम प्रोफेसर सैयद इरफान हबीब है और वह दिल्ली की नेशनल यूनिवर्सिटी फार एजूकेशन, प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेेशन से रिटायर हैं।
वह भी इतिहासकार हैं। उनके पिता मेरे सहपाठी रहे हैं और मुझे सम्मान देने के लिए मेरे सहपाठी ने अपने पुत्र का नाम इरफान हबीब रख दिया था। यह पहली बार नहीं है जब नाम को लेकर इस तरह की स्थिति पैदा हुई है। वरिष्ठ इतिहासकार प्रो. शीरीन मूसवी कहती हैं कि एक बार स्पेन के मैड्रिड में इंटरनेशनल हिस्ट्री कांग्रेस का आयोजन था।
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जब मैं वहां पहुंची तो आयोजकों ने तो दिल्ली के प्रो. सैयद इरफान हबीब को एएमयू के इरफान हबीब समझ कर प्लेन में एग्जीक्यूटिव क्लास का टिकट भिजवा दिया था।
उन्होंने मुझसे पूछा कि प्रो. इरफान हबीब नहीं आए। मैंने बताया कि उन्हें तो यहां आना ही नहीं था। जब आयोजकों ने फोटो और अन्य दस्तावेज दिखाए तो तस्वीर साफ हुई।
इसी तरह एक बार दिल्ली से ही प्रो. सैयद इरफान हबीब ने कोई बयान दिया और वह उनकी फोटो सहित छपा, जिसमें सैयद इरफान हबीब की दाढ़ी भी थी। इस पर लखनऊ में रहने वालीं प्रो. इरफान हबीब की बहन बहुत नाराज हुईं कि इरफान ने दाढ़ी कैसे रख ली। इसी तरह के कई दिलचस्प वाकए हुए जिसको याद कर प्रो. इरफान हबीब अभी भी मुस्कुरा कर रह जाते हैं।
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प्रसिद्ध इतिहासकार प्रोफेसर इरफान हबीब के मिलते जुलते नाम के दिल्ली में रहने वाले एक शिक्षक के कांग्रेस पार्टी के एक कार्यक्रम में शामिल हुए। इसके बाद चर्चा यह फैल गई एएमयू के प्रोफेसर इरफान हबीब, जो कि कम्यूनिस्ट हैं, वह कांग्रेस के कार्यक्रम में शामिल हो गए हैं। उनकी वहां मौजूदगी को लेकर कई तरह के कयास लगाए जाने लगे। गुरुवार को स्वयं प्रोफेसर इरफान हबीब इन बातों का खंडन किया और स्थिति को स्पष्ट किया।
प्रो. इरफान हबीब ने गुरुवार को बताया कि दिल्ली में जो इरफान हबीब हैं उनका नाम प्रोफेसर सैयद इरफान हबीब है और वह दिल्ली की नेशनल यूनिवर्सिटी फार एजूकेशन, प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेेशन से रिटायर हैं।
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वह भी इतिहासकार हैं। उनके पिता मेरे सहपाठी रहे हैं और मुझे सम्मान देने के लिए मेरे सहपाठी ने अपने पुत्र का नाम इरफान हबीब रख दिया था। यह पहली बार नहीं है जब नाम को लेकर इस तरह की स्थिति पैदा हुई है। वरिष्ठ इतिहासकार प्रो. शीरीन मूसवी कहती हैं कि एक बार स्पेन के मैड्रिड में इंटरनेशनल हिस्ट्री कांग्रेस का आयोजन था।
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जब मैं वहां पहुंची तो आयोजकों ने तो दिल्ली के प्रो. सैयद इरफान हबीब को एएमयू के इरफान हबीब समझ कर प्लेन में एग्जीक्यूटिव क्लास का टिकट भिजवा दिया था।
उन्होंने मुझसे पूछा कि प्रो. इरफान हबीब नहीं आए। मैंने बताया कि उन्हें तो यहां आना ही नहीं था। जब आयोजकों ने फोटो और अन्य दस्तावेज दिखाए तो तस्वीर साफ हुई।
इसी तरह एक बार दिल्ली से ही प्रो. सैयद इरफान हबीब ने कोई बयान दिया और वह उनकी फोटो सहित छपा, जिसमें सैयद इरफान हबीब की दाढ़ी भी थी। इस पर लखनऊ में रहने वालीं प्रो. इरफान हबीब की बहन बहुत नाराज हुईं कि इरफान ने दाढ़ी कैसे रख ली। इसी तरह के कई दिलचस्प वाकए हुए जिसको याद कर प्रो. इरफान हबीब अभी भी मुस्कुरा कर रह जाते हैं।