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इस्लाम ने पहली बार महिलाओं को संपति में दिया अधिकार

Sun, 10 Mar 2019 02:14 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 10 Mar 2019 02:14 AM IST
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इस्लाम ने पहली बार महिलाओं को संपति में दिया अधिकार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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एएमयू के बेगम सुल्तान जहां हॉल में भारतीय संविधान एवं इस्लाम में महिलाओं के अधिकार विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। विधि विभाग के शिक्षक प्रो. शकील समदानी ने कहा कि भारतीय संविधान में महिलाओं को वो सारे अधिकार दिए हैं जो इंसान होने के नाते उन्हें प्राप्त होने चाहिए।

भारतीय संविधान न सिर्फ महिलाओं को बराबरी का अधिकार देता है। बल्कि उन्हें तरक्की के अधिक अवसर भी देता है। यदि विश्व के पांच उच्चतम संविधानों का जिक्र किया जाए तो भारत उसमें से एक है।
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उन्होंने कहा कि इस्लाम विश्व का पहला मजहब है जिसने औरत को इंसान समझा और मर्दों के बराबर अधिकार दिए। पैगंबर मोहम्मद ने जब मक्का में अपना मिशन शुरू किया तो उस समय महिलाओं की दशा इतनी खराब थी कि लोग अपनी नवजात बच्चियों को जिंदा दफन कर देते थे।
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लेकिन हजरत मोहम्मद के आने के बाद उनकी दिशा में मूलभूत सुधार हुआ और उन्हें पहली बार संपत्ति में भी अधिकार दिए गए। शादी एवं निकाह में उनकी मर्जी को जरूरी करार दिया गया और महर को उनका अनिवार्य अधिकार घोषित किया गया।


बेगम सुल्तान जहां हॉल की प्रवोस्ट प्रो. असमा अली ने प्रो. समदानी का स्वागत किया। संचालन जकिया खान एवं धन्यवाद प्रस्ताव हॉल की सीनियर हॉल फहमीना शकील ने किया।
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