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ओवैसी तो आए नहीं फ्रंट बनाने, एएमयू में हो गया बवाल

Thu, 14 Feb 2019 01:13 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 14 Feb 2019 01:13 AM IST
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ओवैसी तो आए नहीं फ्रंट बनाने, एएमयू में हो गया बवाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला अलीगढ़।
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मुस्लिम राजनीतिक दलों का फ्रंट बनाने असदुद्दीन ओवैसी एएमयू में नहीं आए, लेकिन बवाल जरूर हो गया। सभी लोग जानना चाहते हैं कि आखिर इस बवाल का शुरुआती कारण क्या है।

दरअसल सपा-बसपा गठबंधन में तवज्जों नहीं मिलने से एएमयू छात्र संघ एवं मुस्लिम पार्टियों के नेता नाराज हैं। वह सपा-बसपा को आइना दिखाना चाहते हैं कि मुस्लिम को सिर्फ मतदाता नहीं समझें। दोनों दलों पर दबाव बनाने तथा दूसरे दलों को मजबूत संदेश देने के लिए एएमयू छात्र संघ द्वारा प्रदेश में मुस्लिम राजनीतिक दलों का मुस्लिम फ्रंट बनाने के लिए 2 फरवरी को बैठक का आयोजन किया गया था।
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इसमें पीस पार्टी, इंडियन नेशनल लीग, राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल, भारतीय मजलिस, मुस्लिम मजलिस, परचम पार्टी, नेशनल अमन पार्टी, नेशनल लोकतांत्रिक पार्टी, इंडियन मुस्लिम रबिता काउंसिल आदि के नेता शामिल हुए। दूसरी बैठक 12 फरवरी को एएमयू सोशल साइंस फैकल्टी के कांफ्रेंस हॉल में आयोजित की गई। इसमें ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी को भी आमंत्रित किया गया था।
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इसकी भनक लगने के बाद एएमयू छात्र संघ का चुनाव लड़ चुके बरौली विधायक ठाकुर दलवीर सिंह के पौत्र ठाकुर अजय सिंह, भाजपा के जिला प्रवक्ता डॉ. निशित शर्मा एवं भाजपा युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष मुकेश सिंह आदि एएमयू में ओवैसी के आने का विरोध करने लगे। इन लोगों का कहना था कि अगर ओवैसी आ गए तो वापस नहीं जाएंगे। जिले की सीमा में ओवैसी को घुसने नहीं देंगे।

दिलचस्प पहलू यह है कि कार्यक्रम में ओवैसी के शामिल होने की संभावना नगण्य थी, क्योंकि उनके आने की सहमति नहीं मिली थी। हुआ भी वही और ओवैसी नहीं आए, लेकिन 12 फरवरी को 10 बजे ही अजय सिंह यूनिवर्सिटी सर्किल पर ओवैसी के आने पर विरोध करने पहुंच गए। दिल्ली से कुछ मीडियाकर्मी भी आ गए।

तथाकथित धर्म निरपेक्ष दलों के गठबंधन और उसमें मुसलमानों तथा हाशिये पर खड़े समाज के तबकों को नजर अंदाज किया गया। उसके बाद के हालात पर चर्चा करने तथा फ्रंट बनाकर लोेकसभा चुनाव लड़ने पर विचार करने के लिए बैठक का आयोजन किया गया था।

- हमजा सुफयान, उपाध्यक्ष छात्र संघ एवं कार्यक्रम संयोजक

अखिलेश यादव के साथ 7 प्रतिशत वोट हैं। मायावती का एक भी सांसद नहीं है, लेकिन मुसलमानों को नजर अंदाज किया जा रहा है। हमलोग चाहते हैं कि ऐसा फ्रंट बने जो फासीवादी ताकतों को पराजित करे। इसमें सिर्फ मुसलमान नहीं होंगे।
- बसिर अहमद, नेता इंडियन मुस्लिम लीग
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