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हमले के मुकदमे में 45 साल बाद बरी हुआ एक नामजद
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क्राइम न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़।
अतरौली के गांव काजिमाबाद में वर्ष 1974 में गांव की मुकदमेबाजी को लेकर हुई हमले की घटना के नामजद आरोपी को 45 साल बाद अदालत से बरी कर दिया गया। यह फैसला एडीजे-15 के विद्वान न्यायाधीश अच्छेलाल सरोज के न्यायालय से सुनाया गया है।
खास बात यह है कि मुकदमे के परीक्षण के दौरान खुद हमला पीड़ित, मुकदमे के वादी और दो नामजद आरोपियों की मौत हो गई। बाकी बचे साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर अदालत में आरोप तय नहीं हो पाया। ऐसे में शेष बचे नामजद आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया है।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी प्रमोद कुमार तोमर के अनुसार वाकया 13 अगस्त 1974 की रात 12 करीब का है। गांव काजिमाबाद निवासी रघुनाथ सिंह पुत्र ज्वाला सिंह ने गांव के ही विजय सिंह पुत्र नेम सिंह, कुंवरपाल पुत्र हीरा सिंह व रामस्वरूप उर्फ बोलू के खिलाफ धारा 307 के तहत मुकदमा दर्ज कराया।
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इस मुकदमे में आरोप था कि नामजदों ने मुकदमेबाजी की रंजिश को लेकर घेर में सो रहे उसके भाई प्रेम सिंह को जगाया और उस पर हमला बोल दिया। हमलावर हथियारों से लैस होकर आए थे। इस दौरान की गई फायरिंग में एक गोली प्रेम सिंह के कंधे में लगी।
मुकदमे के अनुसार उनके परिचित भी प्रेम सिंह के साथ घेर में सो रहे थे, जिन्होंने हमलावरों को पहचान लिया था। इसी आधार पर मुकदमा दर्ज कराया गया। पुलिस ने साक्ष्यों व गवाही के आधार पर तीनों नामजदों पर चार्जशीट दायर कर दी। दौरान-ए-सत्र परीक्षण दो आरोपी कुंवरपाल व रामस्वरूप की मौत हो गई।
इसी दौरान खुद घायल प्रेम सिंह व मुकदमे के वादी रघुनाथ की भी मृत्यु हो गई। बावजूद इसके अदालत ने एक बचे आरोपी विजय सिंह के खिलाफ गवाहों को तलब किया।
मगर यह गवाह भी आरोपों के अनुसार गवाही नहीं दे सके और घटना की पुष्टि नहीं कर सके। इस आधार पर अदालत ने विजय सिंह को बरी कर दिया है। यह फैसला 2 जनवरी को ही सुनाया गया है।
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अतरौली के गांव काजिमाबाद में वर्ष 1974 में गांव की मुकदमेबाजी को लेकर हुई हमले की घटना के नामजद आरोपी को 45 साल बाद अदालत से बरी कर दिया गया। यह फैसला एडीजे-15 के विद्वान न्यायाधीश अच्छेलाल सरोज के न्यायालय से सुनाया गया है।
खास बात यह है कि मुकदमे के परीक्षण के दौरान खुद हमला पीड़ित, मुकदमे के वादी और दो नामजद आरोपियों की मौत हो गई। बाकी बचे साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर अदालत में आरोप तय नहीं हो पाया। ऐसे में शेष बचे नामजद आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया है।
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अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी प्रमोद कुमार तोमर के अनुसार वाकया 13 अगस्त 1974 की रात 12 करीब का है। गांव काजिमाबाद निवासी रघुनाथ सिंह पुत्र ज्वाला सिंह ने गांव के ही विजय सिंह पुत्र नेम सिंह, कुंवरपाल पुत्र हीरा सिंह व रामस्वरूप उर्फ बोलू के खिलाफ धारा 307 के तहत मुकदमा दर्ज कराया।
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इस मुकदमे में आरोप था कि नामजदों ने मुकदमेबाजी की रंजिश को लेकर घेर में सो रहे उसके भाई प्रेम सिंह को जगाया और उस पर हमला बोल दिया। हमलावर हथियारों से लैस होकर आए थे। इस दौरान की गई फायरिंग में एक गोली प्रेम सिंह के कंधे में लगी।
मुकदमे के अनुसार उनके परिचित भी प्रेम सिंह के साथ घेर में सो रहे थे, जिन्होंने हमलावरों को पहचान लिया था। इसी आधार पर मुकदमा दर्ज कराया गया। पुलिस ने साक्ष्यों व गवाही के आधार पर तीनों नामजदों पर चार्जशीट दायर कर दी। दौरान-ए-सत्र परीक्षण दो आरोपी कुंवरपाल व रामस्वरूप की मौत हो गई।
इसी दौरान खुद घायल प्रेम सिंह व मुकदमे के वादी रघुनाथ की भी मृत्यु हो गई। बावजूद इसके अदालत ने एक बचे आरोपी विजय सिंह के खिलाफ गवाहों को तलब किया।
मगर यह गवाह भी आरोपों के अनुसार गवाही नहीं दे सके और घटना की पुष्टि नहीं कर सके। इस आधार पर अदालत ने विजय सिंह को बरी कर दिया है। यह फैसला 2 जनवरी को ही सुनाया गया है।