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अलीगढ़... 11 नवंबर एक गीत की सालगिरह, ए भाई जरा देख के चलो
Updated Sat, 11 Nov 2017 02:22 AM IST
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11 नवंबर एक गीत की सालगिरह, ए भाई जरा देख के चलो
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
1965 में एक दिन अचानक मुंबई से ट्रंक काल आती है और उस समय डीएस कॉलेज के हिंदी विभाग में अध्यापन कर रहे गीतकार गोपाल दास नीरज से कहा जाता है कि राज कपूर की ओर से मैसेज है। उनकी एक फिल्म के लिए गीत लिखने हैं।
बाकी की सभी डिटेल के लिए खत भेज दिया गया है। खत में नीरज के लिए 11 नवंबर मुंबई पहुंचने का दिन था। यहां राजकपूर से मुलाकात हुई और फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ का गीत ए भाई जरा देख के चलो की बुनियाद पड़ी।
गोपाल दास नीरज कहते हैं कि उस समय वह एक हफ्ते की विशेष छुट्टी पर गए थे। मामला तब पेचीदा हो गया जब इसी गीत के लिए संगीतकार शंकर जयकिशन ने धुन बनाने से मना कर दिया था तो राजकपूर हैरत में पड़ गए थे।
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मैंने राजकपूर से कहा था कि जोकर कोई विशेषज्ञ गायक नहीं है। वह ठुमरी नहीं गाएगा, क्लासिकल नहीं गाएगा वह जो गाएगा वह आम बोलचाल की भाषा ही होगी।
राज कपूर को यह बात बेहद पसंद आयी और उन्होंने नीरज से कहा कि वह शंकर जयकिशन को अपने अंदाज में गीत गाकर सुनाएं। नीरज ने जिस तरह गीत सुनाया शंकर जयकिशन को वही धुन जंची और बाद में उसी धुन को मन्ना डे ने अपना स्वर दिया।
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ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
1965 में एक दिन अचानक मुंबई से ट्रंक काल आती है और उस समय डीएस कॉलेज के हिंदी विभाग में अध्यापन कर रहे गीतकार गोपाल दास नीरज से कहा जाता है कि राज कपूर की ओर से मैसेज है। उनकी एक फिल्म के लिए गीत लिखने हैं।
बाकी की सभी डिटेल के लिए खत भेज दिया गया है। खत में नीरज के लिए 11 नवंबर मुंबई पहुंचने का दिन था। यहां राजकपूर से मुलाकात हुई और फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ का गीत ए भाई जरा देख के चलो की बुनियाद पड़ी।
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गोपाल दास नीरज कहते हैं कि उस समय वह एक हफ्ते की विशेष छुट्टी पर गए थे। मामला तब पेचीदा हो गया जब इसी गीत के लिए संगीतकार शंकर जयकिशन ने धुन बनाने से मना कर दिया था तो राजकपूर हैरत में पड़ गए थे।
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मैंने राजकपूर से कहा था कि जोकर कोई विशेषज्ञ गायक नहीं है। वह ठुमरी नहीं गाएगा, क्लासिकल नहीं गाएगा वह जो गाएगा वह आम बोलचाल की भाषा ही होगी।
राज कपूर को यह बात बेहद पसंद आयी और उन्होंने नीरज से कहा कि वह शंकर जयकिशन को अपने अंदाज में गीत गाकर सुनाएं। नीरज ने जिस तरह गीत सुनाया शंकर जयकिशन को वही धुन जंची और बाद में उसी धुन को मन्ना डे ने अपना स्वर दिया।