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पहलवानों को संजीवनी दे गईं दंगल व सुल्तान फिल्में
Updated Sat, 10 Nov 2018 02:20 AM IST
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इकराम वारिस, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
सिने अभिनेता आमिर खान अभिनीत ‘दंगल’ और सलमान खान अभिनीत ‘सुल्तान’ फिल्म ने अखाड़ा ही नहीं, बल्कि पहलवानों को संजीवनी दी है। इसके बाद पहलवानों में और निखार आया है। यह कहना है कि फिल्म ‘दंगल’ में गामा पहलवान की भूमिका निभाने वाले रामेश्वर पहलवान का। वे शुक्रवार को गांव महुआ खेड़ा में आयोजित दंगल प्रतियोगिता में शिरकत करने आए थे।
रामेश्वर ने पहलवानों के भविष्य व कॅरियर को लेकर अमर उजाला से खास बातचीत की। हाथरस जिले के गांव अकसौली के रहने वाले रामेश्वर ने कहा कि फिल्म दंगल व सुल्तान के बाद अब लोगों को दंगल बताना-समझाना नहीं पड़ता। सच में इन फिल्मों से इस खेल का स्तर ऊंचा हुआ है।
कहा, अगर इस खेल में पहलवान को भविष्य और कॅरियर बनाना है, तो मैट पर प्वाइंट वाली कुश्ती लड़नी होगी। नहीं, तो वे एक मनोरंजक बन रह जाएंगे। जब तक जान है, तो दंगल। बाद में खाली हाथ रहना पड़ जाएगा।
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रामेश्वर ने कहा कि दंगल में पहलवानों को खेलने के लिए मना नहीं कर रहे हैं। अलबत्ता, प्वाइंट वाली कुश्ती पर जोर हो। यह बात सही है गांव में मैट नहीं है, पर अखाड़े में ही प्वाइंट वाली कुश्ती की शुरुआत कर देनी चाहिए, जो फिल्म दंगल में भी दिखा है।
भूल नहीं सकता 20 दिन की यादें
रामेश्वर बताते हैं कि वे पटियाला (पंजाब) में एनआईएस कर रहे थे, तब फिल्म दंगल की शूटिंग होने से पहले आमिर खान की टीम के सदस्य वहां आए थे। 12 पहलवानों का ऑडिशन हुआ, जिसमें पांच पहलवान चुन लिए गए। उनमें एक वे भी थे।
फिल्म में पांच जगह दिखे हैं, जिसके लिए आमिर खान की टीम ने उन्हें 25 लाख रुपये दिए थे। 20 दिन तक मुंबई में शूटिंग चली। 20 दिन की यादें कभी भी नहीं भूल सकता। रामेश्वर ने कहा कि आमिर खान ने गामा पहलवान के किरदार को लेकर वजन बढ़ाने को कहा। उस समय मेरा वजन 118 किलो था। वजन बढ़ने के बाद उनका वजन 127 किलो हो गया था।
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सिने अभिनेता आमिर खान अभिनीत ‘दंगल’ और सलमान खान अभिनीत ‘सुल्तान’ फिल्म ने अखाड़ा ही नहीं, बल्कि पहलवानों को संजीवनी दी है। इसके बाद पहलवानों में और निखार आया है। यह कहना है कि फिल्म ‘दंगल’ में गामा पहलवान की भूमिका निभाने वाले रामेश्वर पहलवान का। वे शुक्रवार को गांव महुआ खेड़ा में आयोजित दंगल प्रतियोगिता में शिरकत करने आए थे।
रामेश्वर ने पहलवानों के भविष्य व कॅरियर को लेकर अमर उजाला से खास बातचीत की। हाथरस जिले के गांव अकसौली के रहने वाले रामेश्वर ने कहा कि फिल्म दंगल व सुल्तान के बाद अब लोगों को दंगल बताना-समझाना नहीं पड़ता। सच में इन फिल्मों से इस खेल का स्तर ऊंचा हुआ है।
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कहा, अगर इस खेल में पहलवान को भविष्य और कॅरियर बनाना है, तो मैट पर प्वाइंट वाली कुश्ती लड़नी होगी। नहीं, तो वे एक मनोरंजक बन रह जाएंगे। जब तक जान है, तो दंगल। बाद में खाली हाथ रहना पड़ जाएगा।
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रामेश्वर ने कहा कि दंगल में पहलवानों को खेलने के लिए मना नहीं कर रहे हैं। अलबत्ता, प्वाइंट वाली कुश्ती पर जोर हो। यह बात सही है गांव में मैट नहीं है, पर अखाड़े में ही प्वाइंट वाली कुश्ती की शुरुआत कर देनी चाहिए, जो फिल्म दंगल में भी दिखा है।
भूल नहीं सकता 20 दिन की यादें
रामेश्वर बताते हैं कि वे पटियाला (पंजाब) में एनआईएस कर रहे थे, तब फिल्म दंगल की शूटिंग होने से पहले आमिर खान की टीम के सदस्य वहां आए थे। 12 पहलवानों का ऑडिशन हुआ, जिसमें पांच पहलवान चुन लिए गए। उनमें एक वे भी थे।
फिल्म में पांच जगह दिखे हैं, जिसके लिए आमिर खान की टीम ने उन्हें 25 लाख रुपये दिए थे। 20 दिन तक मुंबई में शूटिंग चली। 20 दिन की यादें कभी भी नहीं भूल सकता। रामेश्वर ने कहा कि आमिर खान ने गामा पहलवान के किरदार को लेकर वजन बढ़ाने को कहा। उस समय मेरा वजन 118 किलो था। वजन बढ़ने के बाद उनका वजन 127 किलो हो गया था।