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सबका दिल जीतकर लौटे कोविंद-ᄋᄂ₩ᅦU¢₩
Updated Thu, 08 Mar 2018 02:28 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
दीक्षांत समारोह में पहुंचे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद एएमयू छात्रों एवं शिक्षकों का दिल जीतकर वापस लौटे। उनका भाषण सुनने के बाद छात्र एवं शिक्षक उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे हैं।
चंद छात्रों ने राष्ट्रपति के आगमन पर विरोध की बात कहकर माहौल को गर्म कर दिया था। लेकिन समारोह में सभी तरह की आशंकाएं निर्मूल साबित हुईं। कोविंद एवं राज्यपाल राम नाईक के आगमन के समय छात्र-छात्राओं ने ताली बजाकर गर्मजोशी से स्वागत किया।
राष्ट्रपति एवं राज्यपाल के भाषण के दौरान भी दर्शक दीर्घा में तालियां बजती रहीं। राष्ट्रपति एवं राज्यपाल द्वारा एएमयू के संस्थापक सर सैयद का नाम श्रद्धा से लेने एवं एएमयू के शानदार इतिहास एवं उपलब्धियों को रेखांकित किए जाने से अलीग बिरादरी के लोग गदगद हैं।
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राष्ट्रपति ने तो एएमयू के इंटरनेशनल कैरेक्टर को भी रेखांकित किया और भारत के बाहर के देशों से उसे जोड़ा। एएमयू जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों को किसी समुदाय से जोड़ने की मनाही किये जाने की टिप्पणी को कुछ लोग अल्पसंख्यक स्वरूप से जोड़ कर देख रहे हैं।
लेकिन कई लोग इसे सकारात्मक नजरिये से भी देख रहे हैं। एएमयू के शिक्षक डॉ. नवेद का कहना है कि राष्ट्रपति एएमयू को राष्ट्रीय नजरिये से देख रहे हैं। इसमें कुछ गलत नहीं है। एएमयू पीआरओ आफिस के एमआईसी प्रो. शाफे किदवई का कहना है कि राष्ट्रपति की टिप्पणी सिर्फ एएमयू के लिए नहीं बल्कि तमाम विश्वविद्यालयों के लिए है।
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दीक्षांत समारोह में पहुंचे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद एएमयू छात्रों एवं शिक्षकों का दिल जीतकर वापस लौटे। उनका भाषण सुनने के बाद छात्र एवं शिक्षक उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे हैं।
चंद छात्रों ने राष्ट्रपति के आगमन पर विरोध की बात कहकर माहौल को गर्म कर दिया था। लेकिन समारोह में सभी तरह की आशंकाएं निर्मूल साबित हुईं। कोविंद एवं राज्यपाल राम नाईक के आगमन के समय छात्र-छात्राओं ने ताली बजाकर गर्मजोशी से स्वागत किया।
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राष्ट्रपति एवं राज्यपाल के भाषण के दौरान भी दर्शक दीर्घा में तालियां बजती रहीं। राष्ट्रपति एवं राज्यपाल द्वारा एएमयू के संस्थापक सर सैयद का नाम श्रद्धा से लेने एवं एएमयू के शानदार इतिहास एवं उपलब्धियों को रेखांकित किए जाने से अलीग बिरादरी के लोग गदगद हैं।
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राष्ट्रपति ने तो एएमयू के इंटरनेशनल कैरेक्टर को भी रेखांकित किया और भारत के बाहर के देशों से उसे जोड़ा। एएमयू जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों को किसी समुदाय से जोड़ने की मनाही किये जाने की टिप्पणी को कुछ लोग अल्पसंख्यक स्वरूप से जोड़ कर देख रहे हैं।
लेकिन कई लोग इसे सकारात्मक नजरिये से भी देख रहे हैं। एएमयू के शिक्षक डॉ. नवेद का कहना है कि राष्ट्रपति एएमयू को राष्ट्रीय नजरिये से देख रहे हैं। इसमें कुछ गलत नहीं है। एएमयू पीआरओ आफिस के एमआईसी प्रो. शाफे किदवई का कहना है कि राष्ट्रपति की टिप्पणी सिर्फ एएमयू के लिए नहीं बल्कि तमाम विश्वविद्यालयों के लिए है।