{"_id":"5a2af0244f1c1b72548c2168","slug":"11512763428-aligarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नामजद ननद को 12 दिन ‘कैद’ में रखने पर ब्योरा तलब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नामजद ननद को 12 दिन ‘कैद’ में रखने पर ब्योरा तलब
Updated Sat, 09 Dec 2017 01:33 AM IST
विज्ञापन
नामजद ननद को 12 दिन ‘कैद’ में रखने पर ब्योरा तलब
ब्यरो, अमर उजाला अलीगढ़।
गंगीरी क्षेत्र में भाभी की दहेज हत्या के मुकदमे में नामजद ननद को 12 दिन तक महिला थाने में ‘कैद’ करने का प्रकरण मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान ले लिया है। आयोग ने आरटीआई कार्यकर्ता एवं रालोद से मेयर प्रत्याशी रहे प्रतीक चौधरी एडवोकेट की शिकायत पर एसएसपी से चार सप्ताह में ब्योरा तलब किया है। यह मामला जब मीडिया में सुर्खियों में आया, तो पुलिस ने आननफानन नामजद की घर से गिरफ्तारी दिखाकर जेल भेजने की औपचारिकता पूरी की थी। हालांकि उस समय ही एसएसपी स्तर से मामले में सीओ व थाना प्रभारी के प्रति नाराजगी जताई गई थी। उनके दखल के बाद ही नामजद को जेल भेजा गया था।
गंगीरी के गांव बढ़ारी बुजुर्ग निवासी उमेश की पत्नी रचना की 15 अगस्त को जलने से मौत हो गई थी। रचना के मायके वालों ने पति आदि ससुरालियों पर दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें रचना की कथित नाबालिग ननद भी आरोपी थी। पुलिस ने घटना के समय ही नामजदों समेत ननद को हिरासत में ले लिया था। अन्य को जेल भेज दिया था, जबकि ननद अगले 12 दिन तक यानी 27 अगस्त तक महिला थाने में ही रही। चूंकि महिला थाने में किशोरी रो-रोकर दिन रात काट रही थी, तो लोगों की नजर उस पर पड़ी। जब मामले में सवाल-जवाब शुरू हुए तो महिला थाने से लेकर गंगीरी पुलिस तक हरकत में आई और 27 अगस्त को ही देर रात ही उसे महिला थाने से गंगीरी शिफ्ट कर दिया गया।
इधर, खबर एसएसपी तक पहुंची तो उन्होंने सख्ती दिखाई और नामजद को इस तरह हिरासत में रखने पर जमकर लताड़ा। इस पर पुलिस ने उसे बालिग बताकर कोर्ट में पेश कर दिया। साथ ही दस्तावेजों में गिरफ्तारी रविवार 27 अगस्त को ही नामजद के घर से दिखाई। इस मामले में प्रतीक चौधरी ने मानवाधिकार आयोग में शिकायत कर दी। आयोग के असिस्टेंट रजिस्ट्रार विधि की ओर से एसएसपी अलीगढ़ को अब पत्र भेजा गया है। इस पत्र में कहा गया है कि चार सप्ताह में इस प्रकरण का पूरा ब्योरा दिया जाए।
विज्ञापन
नोट : इस खबर में 28 अगस्त 2017 की पीडीएफ लग सकती है।
विज्ञापन
ब्यरो, अमर उजाला अलीगढ़।
गंगीरी क्षेत्र में भाभी की दहेज हत्या के मुकदमे में नामजद ननद को 12 दिन तक महिला थाने में ‘कैद’ करने का प्रकरण मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान ले लिया है। आयोग ने आरटीआई कार्यकर्ता एवं रालोद से मेयर प्रत्याशी रहे प्रतीक चौधरी एडवोकेट की शिकायत पर एसएसपी से चार सप्ताह में ब्योरा तलब किया है। यह मामला जब मीडिया में सुर्खियों में आया, तो पुलिस ने आननफानन नामजद की घर से गिरफ्तारी दिखाकर जेल भेजने की औपचारिकता पूरी की थी। हालांकि उस समय ही एसएसपी स्तर से मामले में सीओ व थाना प्रभारी के प्रति नाराजगी जताई गई थी। उनके दखल के बाद ही नामजद को जेल भेजा गया था।
गंगीरी के गांव बढ़ारी बुजुर्ग निवासी उमेश की पत्नी रचना की 15 अगस्त को जलने से मौत हो गई थी। रचना के मायके वालों ने पति आदि ससुरालियों पर दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें रचना की कथित नाबालिग ननद भी आरोपी थी। पुलिस ने घटना के समय ही नामजदों समेत ननद को हिरासत में ले लिया था। अन्य को जेल भेज दिया था, जबकि ननद अगले 12 दिन तक यानी 27 अगस्त तक महिला थाने में ही रही। चूंकि महिला थाने में किशोरी रो-रोकर दिन रात काट रही थी, तो लोगों की नजर उस पर पड़ी। जब मामले में सवाल-जवाब शुरू हुए तो महिला थाने से लेकर गंगीरी पुलिस तक हरकत में आई और 27 अगस्त को ही देर रात ही उसे महिला थाने से गंगीरी शिफ्ट कर दिया गया।
विज्ञापन
इधर, खबर एसएसपी तक पहुंची तो उन्होंने सख्ती दिखाई और नामजद को इस तरह हिरासत में रखने पर जमकर लताड़ा। इस पर पुलिस ने उसे बालिग बताकर कोर्ट में पेश कर दिया। साथ ही दस्तावेजों में गिरफ्तारी रविवार 27 अगस्त को ही नामजद के घर से दिखाई। इस मामले में प्रतीक चौधरी ने मानवाधिकार आयोग में शिकायत कर दी। आयोग के असिस्टेंट रजिस्ट्रार विधि की ओर से एसएसपी अलीगढ़ को अब पत्र भेजा गया है। इस पत्र में कहा गया है कि चार सप्ताह में इस प्रकरण का पूरा ब्योरा दिया जाए।
विज्ञापन
नोट : इस खबर में 28 अगस्त 2017 की पीडीएफ लग सकती है।