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दूर दूर तक इस बार भी होली पर बिखरेगा हाथरस का रंग व गुलाल
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला हाथरस।
फाल्गुन माह शुरू हो गया है। ऐसे में हाथरस का रंग-गुलाल फाग मस्ती में अपना जलवा बिखरेगा। टेसू के फूल के अलावा हाथरस के हल्के व खुशबूदार रंग की बरसात होगी। साथ ही हाथरस के रंग गुलाल की बॉलीवुड में खासी पहचान है। होली नजदीक आने के साथ रंग गुलाल बनाने का अंतिम चरण में चल रहा है।
हाथरस में देखा जाए तो रंग व गुलाल का यह कारोबार करीब 80 साल पुराना है। यह काम बदस्तूर चल रहा है। शहर में कुल मिलाकर देखा जाए तो छोटी-बड़ी मिलाकर करीब 20 फैक्टरियां हैं। यह सीजनल काम है। जो दीपावली के बाद तेजी पकड़ता है और फैक्ट्रियों में हजारों लोग काम करते हैं।
रंग व गुलाल बनाने के लिए केमिकल अहमदाबाद, मुंबई और दिल्ली से आता है, तो वहीं स्टार्च व टोपियों को उत्तराखंड आदि से मंगाया जाता है। इस पर ही रंग व गुलाल को तैयार किया जा रहा था। यह रंग हल्का होता है। वहीं शरीर को नुकसान भी नहीं करता। स्टार्च व टोपियों में ही कलर मिलाया जाता है। शहर में कई स्थानों पर मैदान में सड़क सहारे गुलाल सूखता दिख रहा है।
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हाथरस के गुलाल की सर्वाधिक डिमांड फिल्म जगत में रहती है। महाराष्ट्र बिहार, हरियाणा, दिल्ली, गुजरात, मध्य प्रदेश में इसकी सबसे ज्यादा डिमांड रहती है। हालांकि उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक टैक्स की मार है।
यहां पर गुलाल पर पांच से पंद्रह प्रतिशत का टैक्स है। मथुरा, वृंदावन, बल्देव में होने वाली होली में हाथरस से भी रंग जाता है। हल्का और खुशबूदार गुलाल होने के कारण हाथरस के रंग-गुलाल की डिमांड रहती है।
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फाल्गुन माह शुरू हो गया है। ऐसे में हाथरस का रंग-गुलाल फाग मस्ती में अपना जलवा बिखरेगा। टेसू के फूल के अलावा हाथरस के हल्के व खुशबूदार रंग की बरसात होगी। साथ ही हाथरस के रंग गुलाल की बॉलीवुड में खासी पहचान है। होली नजदीक आने के साथ रंग गुलाल बनाने का अंतिम चरण में चल रहा है।
हाथरस में देखा जाए तो रंग व गुलाल का यह कारोबार करीब 80 साल पुराना है। यह काम बदस्तूर चल रहा है। शहर में कुल मिलाकर देखा जाए तो छोटी-बड़ी मिलाकर करीब 20 फैक्टरियां हैं। यह सीजनल काम है। जो दीपावली के बाद तेजी पकड़ता है और फैक्ट्रियों में हजारों लोग काम करते हैं।
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रंग व गुलाल बनाने के लिए केमिकल अहमदाबाद, मुंबई और दिल्ली से आता है, तो वहीं स्टार्च व टोपियों को उत्तराखंड आदि से मंगाया जाता है। इस पर ही रंग व गुलाल को तैयार किया जा रहा था। यह रंग हल्का होता है। वहीं शरीर को नुकसान भी नहीं करता। स्टार्च व टोपियों में ही कलर मिलाया जाता है। शहर में कई स्थानों पर मैदान में सड़क सहारे गुलाल सूखता दिख रहा है।
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हाथरस के गुलाल की सर्वाधिक डिमांड फिल्म जगत में रहती है। महाराष्ट्र बिहार, हरियाणा, दिल्ली, गुजरात, मध्य प्रदेश में इसकी सबसे ज्यादा डिमांड रहती है। हालांकि उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक टैक्स की मार है।
यहां पर गुलाल पर पांच से पंद्रह प्रतिशत का टैक्स है। मथुरा, वृंदावन, बल्देव में होने वाली होली में हाथरस से भी रंग जाता है। हल्का और खुशबूदार गुलाल होने के कारण हाथरस के रंग-गुलाल की डिमांड रहती है।