{"_id":"5b4a5e454f1c1b3f748b4c6a","slug":"111531600453-aligarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"राशन गोदामों में सड़ रहा हजारों क्विंटल अनाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राशन गोदामों में सड़ रहा हजारों क्विंटल अनाज
Updated Sun, 15 Jul 2018 02:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
जिले के राशन गोदामों में हजारों क्विंटल अनाज बेकार पड़ा है। यह स्थिति वर्ष 2014 में लागू और फरवरी 2016 में क्रियान्वित हुए खाद्य सुरक्षा कानून के बाद आए सब्सिडी के अंतर के चलते बनी है। इसके चलते पूर्ति विभाग न इस अनाज को गोदामों से निकाल पा रहा है और न ही इसे बिकवा पा रहा है।
शासन स्तर पर भी मामला कई बार उठने के बाद भी अब तक कोई शासनादेश जारी न होने से गोदामों के मेंटेन के लिए जिम्मेदार आवश्यक वस्तु निगम के अफसर असहाय हैं और येन केन प्रकारेन इस अनअपेक्षित अनाज को संरक्षित करने पर मजबूर हैं। बताते चलें कि पूर्ति विभाग के ब्लाकवार गोदामों में कुल मिलाकर एपीएल और बीपीएल का 1004.45 क्विंटल गेहूं तथा एपीएल और बीपीएल का 498.98 क्विंटल चावल डंप पड़ा है।
खाद्य सुरक्षा कानून से पहले एपीएल गेहूं का रेट-8.97 रुपये प्रति किलो
खाद्य सुरक्षा कानून से पहले चावल का रेट-11.80 रुपये प्रति किलो
खाद्य सुरक्षा कानून से पहले बीपीएल गेहूं का रेट-5 रुपये प्रति किलो
खाद्य सुरक्षा कानून से पहले बीपीएल चावल का रेट-7 रुपये प्रति किलो
वर्तमान रेट
खाद्य सुरक्षा कानून के बाद गेहूं का रेट-2.00 रुपये प्रति किलो
खाद्य सुरक्षा कानून के बाद चावल का रेट-3.00 रुपये प्रति किलो
स्टाक बदल कर बचाने पर मजबूर एसएफसी
अलीगढ़। गेहूं व चावल के संरक्षण के लिए जिम्मेदार एसएफसी (आवश्यक वस्तु निगम) के कर्मचारी एवं अधिकारी गेहूं को सड़ने से बचाने के लिए स्टाक बदलकर काम चला रहे हैं। यानि कि नया स्टाक आने पर उतनी मात्रा में नया स्टाक गोदाम में रख लिया जाता है और पुराना स्टाक निकालकर सप्लाई पर भेज दिया जाता है।
विज्ञापन
ब्लाकवार गोदामों की स्थिति
-जवां-
एपीएल-गेहूं-152 क्विंटल, बीपीएल गेहूं-03 क्विंटल, बीपीएल चावल-09 क्विंटल।
-गोंडा-
एपीएल-चावल-5.90 क्विंटल, बीपीएल गेहूं-69 क्विंटल, बीपीएल-चावल-58 किलो।
-इगलास-
एपीएल-गेहूं-13 क्विंटल, एपीएल चावल-61 क्विंटल, बीपीएल गेहूं-43 क्विंटल।
-लोधा-
एपीएल गेहूं-06 क्विंटल, बीपीएल-शून्य।
-खैर-
एपीएल-गेहूं-70 क्विंटल, बीपीएल-शून्य।
-टप्पल-
एपीएल-गेहूं-10 क्विंटल, बीपीएल-चावल-123 क्विंटल।
-अकराबाद-
एपीएल-गेहूं-79 क्विंटल, एपीएल-चावल-04 क्विंटल।
-धनीपुर-
एपीएल-गेहूं-249 क्विंटल, एपीएल-चावल-114 क्विंटल, बीपीएल-गेहूं-66 क्विंटल, चावल-100 क्विंटल
-बिजौली-
एपीएल-गेहूं-62 क्विंटल, बीपीएल-चावल-36 क्विंटल।
-अतरौली-
एपीएल-गेहूं-26.49 क्विंटल, बीपीएल गेहूं-50 किलो, बीपीएल-चावल-8.91 क्विंटल।
-छर्रा-
एपीएल-गेहूं-5.89 क्विंटल, बीपीएल चावल-30.23 क्विंटल।
-चंडौस-
एपीएल-गेहूं-78.53 किलो, बीपीएल-गेहूं-15.64 क्विंटल, बीपीएल-चावल-12.26 क्विंटल।
-वर्ष 2016 में खाद्य सुरक्षा कानून लागू होने के बाद एपीएल एवं बीपीएल श्रेणी खत्म कर इन्हें पात्र गृहस्थी श्रेणी में मर्ज कर दिया गया। इसके बाद गेहूं दो रुपये तथा चावल तीन रुपये किलो देने की व्यवस्था हुई। कानून लागू होने से पहले एपीएल गेहूं का रेट-8.97 रुपये किलो तथा चावल का रेट-11.80 रुपये प्रति किलो था। जबकि बीपीएल गेहूं का रेट-पांच रुपये तथा चावल का रेट सात रुपये किलो था। रेटों के इस अंतर के चलते कानून लागू होने से पहले का स्टाक रोक लिया गया। अब मजबूरी यह है कि पुराने रेट पर ग्राहक अनाज लेगा नहीं। इस मामले में शासन को कई बार लिखा जा चुका है, लेकिन कोई आदेश नहीं आया।
नीरज सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी
विज्ञापन
जिले के राशन गोदामों में हजारों क्विंटल अनाज बेकार पड़ा है। यह स्थिति वर्ष 2014 में लागू और फरवरी 2016 में क्रियान्वित हुए खाद्य सुरक्षा कानून के बाद आए सब्सिडी के अंतर के चलते बनी है। इसके चलते पूर्ति विभाग न इस अनाज को गोदामों से निकाल पा रहा है और न ही इसे बिकवा पा रहा है।
शासन स्तर पर भी मामला कई बार उठने के बाद भी अब तक कोई शासनादेश जारी न होने से गोदामों के मेंटेन के लिए जिम्मेदार आवश्यक वस्तु निगम के अफसर असहाय हैं और येन केन प्रकारेन इस अनअपेक्षित अनाज को संरक्षित करने पर मजबूर हैं। बताते चलें कि पूर्ति विभाग के ब्लाकवार गोदामों में कुल मिलाकर एपीएल और बीपीएल का 1004.45 क्विंटल गेहूं तथा एपीएल और बीपीएल का 498.98 क्विंटल चावल डंप पड़ा है।
विज्ञापन
खाद्य सुरक्षा कानून से पहले एपीएल गेहूं का रेट-8.97 रुपये प्रति किलो
खाद्य सुरक्षा कानून से पहले चावल का रेट-11.80 रुपये प्रति किलो
खाद्य सुरक्षा कानून से पहले बीपीएल गेहूं का रेट-5 रुपये प्रति किलो
खाद्य सुरक्षा कानून से पहले बीपीएल चावल का रेट-7 रुपये प्रति किलो
वर्तमान रेट
खाद्य सुरक्षा कानून के बाद गेहूं का रेट-2.00 रुपये प्रति किलो
खाद्य सुरक्षा कानून के बाद चावल का रेट-3.00 रुपये प्रति किलो
स्टाक बदल कर बचाने पर मजबूर एसएफसी
अलीगढ़। गेहूं व चावल के संरक्षण के लिए जिम्मेदार एसएफसी (आवश्यक वस्तु निगम) के कर्मचारी एवं अधिकारी गेहूं को सड़ने से बचाने के लिए स्टाक बदलकर काम चला रहे हैं। यानि कि नया स्टाक आने पर उतनी मात्रा में नया स्टाक गोदाम में रख लिया जाता है और पुराना स्टाक निकालकर सप्लाई पर भेज दिया जाता है।
विज्ञापन
ब्लाकवार गोदामों की स्थिति
-जवां-
एपीएल-गेहूं-152 क्विंटल, बीपीएल गेहूं-03 क्विंटल, बीपीएल चावल-09 क्विंटल।
-गोंडा-
एपीएल-चावल-5.90 क्विंटल, बीपीएल गेहूं-69 क्विंटल, बीपीएल-चावल-58 किलो।
-इगलास-
एपीएल-गेहूं-13 क्विंटल, एपीएल चावल-61 क्विंटल, बीपीएल गेहूं-43 क्विंटल।
-लोधा-
एपीएल गेहूं-06 क्विंटल, बीपीएल-शून्य।
-खैर-
एपीएल-गेहूं-70 क्विंटल, बीपीएल-शून्य।
-टप्पल-
एपीएल-गेहूं-10 क्विंटल, बीपीएल-चावल-123 क्विंटल।
-अकराबाद-
एपीएल-गेहूं-79 क्विंटल, एपीएल-चावल-04 क्विंटल।
-धनीपुर-
एपीएल-गेहूं-249 क्विंटल, एपीएल-चावल-114 क्विंटल, बीपीएल-गेहूं-66 क्विंटल, चावल-100 क्विंटल
-बिजौली-
एपीएल-गेहूं-62 क्विंटल, बीपीएल-चावल-36 क्विंटल।
-अतरौली-
एपीएल-गेहूं-26.49 क्विंटल, बीपीएल गेहूं-50 किलो, बीपीएल-चावल-8.91 क्विंटल।
-छर्रा-
एपीएल-गेहूं-5.89 क्विंटल, बीपीएल चावल-30.23 क्विंटल।
-चंडौस-
एपीएल-गेहूं-78.53 किलो, बीपीएल-गेहूं-15.64 क्विंटल, बीपीएल-चावल-12.26 क्विंटल।
-वर्ष 2016 में खाद्य सुरक्षा कानून लागू होने के बाद एपीएल एवं बीपीएल श्रेणी खत्म कर इन्हें पात्र गृहस्थी श्रेणी में मर्ज कर दिया गया। इसके बाद गेहूं दो रुपये तथा चावल तीन रुपये किलो देने की व्यवस्था हुई। कानून लागू होने से पहले एपीएल गेहूं का रेट-8.97 रुपये किलो तथा चावल का रेट-11.80 रुपये प्रति किलो था। जबकि बीपीएल गेहूं का रेट-पांच रुपये तथा चावल का रेट सात रुपये किलो था। रेटों के इस अंतर के चलते कानून लागू होने से पहले का स्टाक रोक लिया गया। अब मजबूरी यह है कि पुराने रेट पर ग्राहक अनाज लेगा नहीं। इस मामले में शासन को कई बार लिखा जा चुका है, लेकिन कोई आदेश नहीं आया।
नीरज सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी