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उद्यमी, व्यापारी और जीएसटी अधिकारी
Updated Wed, 25 Apr 2018 01:36 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
मंडलायुक्त अजय दीप सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को कमिश्नरी सभागार में ई वे बिल कार्यशाला हुई। जिसमें ई वे बिल बनाने के तरीके बताए गए। वाणिज्य कर अधिकारियों ने बताया कि ट्रांसपोर्ट अथवा ऑटोमोबाइल्स द्वारा तैयार उत्पाद, कच्चा माल एवं अन्य सामग्री को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने के लिए ई वे बिल कैसे बनाया जाएगा।
इसका पूरा तरीका प्रोजेक्टर के द्वारा समझाया गया। बहुत से व्यापारियों ने कहा कि वह लैपटॉप या कंप्यूटर तो दूर स्मार्ट मोबाइल भी नहीं इस्तेमाल नहीं करते। ऐसे व्यापारियों को भी ई-वे बिल को पोर्टल पर लोड करना और भरने का तरीका बताया गया। परंतु व्यापारी इससे संतुष्ट नहीं दिखे।
कार्यशाला के अंत में व्यवसायियों तथा जीएसटी अफसरों की सभी बातों और तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए मंडलायुक्त ने कहा कि व्यापारी और उद्यमी राष्ट्र की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। यह वर्ग ही राष्ट्र की संपत्ति स्थापित करने के साथ रोजगार देता है। अत: जीएसटी अधिकारियों को छोटी-मोटी गलतियाें को नजरंदाज करना चाहिए।
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उन्होंने उद्यमियों से कहा कि उनके कर से ही सरकार सड़क, अस्पताल, स्कूल और शौचालय आदि का निर्माण होता है। अत: कर व्यवस्था को व्यक्तिगत बाधा न मानकर इसे राष्ट्र की सेवा समझें। केंद्र सरकार उत्तर प्रदेश को बहुत अहमियत दे रही है। 2 अक्तूबर 2018 से पूर्व ही पूरे प्रदेश को ओडीएफ घोषित करने हेतु शौचालय निर्माण का काफ ी बजट दिया गया है।
अत: सभी मिलजुल कर काम करें। कार्यशाला में वाणिज्य कर के संयुक्त आयुक्त उत्तम सिंह, एचएन अग्रवाल, बीआर दिवाकर, सुधाता सिंह, अजय वर्मा, शिवानी गुप्ता के साथ व्यापारी नेता ज्ञानचंद्र वार्ष्णेय, ओपी राठी, अनिल सेंचुरी, मुकेश गुप्ता, हाजी असलम, हाजी सुलेमान, सरदार ढाल सिंह, भूपेंद्र वार्ष्णेय, शिवस्वरूप, ज्ञान स्वरूप किराना, रौनक गुप्ता, चंद्रशेखर शर्मा और लल्लू सिंह आदि मौजूद रहे।
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मंडलायुक्त अजय दीप सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को कमिश्नरी सभागार में ई वे बिल कार्यशाला हुई। जिसमें ई वे बिल बनाने के तरीके बताए गए। वाणिज्य कर अधिकारियों ने बताया कि ट्रांसपोर्ट अथवा ऑटोमोबाइल्स द्वारा तैयार उत्पाद, कच्चा माल एवं अन्य सामग्री को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने के लिए ई वे बिल कैसे बनाया जाएगा।
इसका पूरा तरीका प्रोजेक्टर के द्वारा समझाया गया। बहुत से व्यापारियों ने कहा कि वह लैपटॉप या कंप्यूटर तो दूर स्मार्ट मोबाइल भी नहीं इस्तेमाल नहीं करते। ऐसे व्यापारियों को भी ई-वे बिल को पोर्टल पर लोड करना और भरने का तरीका बताया गया। परंतु व्यापारी इससे संतुष्ट नहीं दिखे।
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कार्यशाला के अंत में व्यवसायियों तथा जीएसटी अफसरों की सभी बातों और तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए मंडलायुक्त ने कहा कि व्यापारी और उद्यमी राष्ट्र की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। यह वर्ग ही राष्ट्र की संपत्ति स्थापित करने के साथ रोजगार देता है। अत: जीएसटी अधिकारियों को छोटी-मोटी गलतियाें को नजरंदाज करना चाहिए।
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उन्होंने उद्यमियों से कहा कि उनके कर से ही सरकार सड़क, अस्पताल, स्कूल और शौचालय आदि का निर्माण होता है। अत: कर व्यवस्था को व्यक्तिगत बाधा न मानकर इसे राष्ट्र की सेवा समझें। केंद्र सरकार उत्तर प्रदेश को बहुत अहमियत दे रही है। 2 अक्तूबर 2018 से पूर्व ही पूरे प्रदेश को ओडीएफ घोषित करने हेतु शौचालय निर्माण का काफ ी बजट दिया गया है।
अत: सभी मिलजुल कर काम करें। कार्यशाला में वाणिज्य कर के संयुक्त आयुक्त उत्तम सिंह, एचएन अग्रवाल, बीआर दिवाकर, सुधाता सिंह, अजय वर्मा, शिवानी गुप्ता के साथ व्यापारी नेता ज्ञानचंद्र वार्ष्णेय, ओपी राठी, अनिल सेंचुरी, मुकेश गुप्ता, हाजी असलम, हाजी सुलेमान, सरदार ढाल सिंह, भूपेंद्र वार्ष्णेय, शिवस्वरूप, ज्ञान स्वरूप किराना, रौनक गुप्ता, चंद्रशेखर शर्मा और लल्लू सिंह आदि मौजूद रहे।