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कामाख्या एक्सप्रेस से अलीगढ़ जंक्शन पर 11 बच्चे बरामद
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बिहार के कटिहार जिले से दिल्ली जाने वाली कामाख्या नार्थ-ईस्ट एक्सप्रेस से रविवार शाम को फिर से 11 नाबालिग बच्चों को बरामद किया गया। सभी बच्चे बिहार के हैं। इनको पढ़ाई, नौकरी दिलाने का लालच देकर दिल्ली, पंजाब में बाल मजदूरी कराने के लिए ले जाया जा रहा था। मौके से छह आरोपियों को भी गिरफ्तार किया। 10 बच्चे बिहार के पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज जिले के हैं, एक बालक पश्चिम बंगाल के रायगंज जिले का है। बचपन बचाओ आंदोलन की टीम के सदस्य अरशद मेहंदी की ओर से तहरीर दी गई।
वाकया शाम चार बजे करीब का है। आरपीएफ और जीआरपी को नार्थ-ईस्ट एक्सप्रेस में बिहार से मानव तस्कर गिरोह द्वारा कुछ बच्चों को दिल्ली, पंजाब ले जाए जाने की सूचना बचपन बचाओ आंदोलन की टीम की ओर से प्राप्त हुई। आरपीएफ इंस्पेक्टर चमन सिंह तोमर और जीआरपी प्रभारी इंस्पेक्टर सुरेश चंद्र अपनी टीम के साथ व चाइल्ड लाइन टीम ज्ञानेंद्र मिश्रा के नेतृत्व में पहुंची। टीम ने 11 बच्चों को बोगी संख्या एस-5, एस-4, डी-4 व अन्य बोगियों से बरामद किया। इनके साथ छह वयस्कों को भी पकड़ा गया। पूछताछ में प्रथम दृष्टया सामने आया कि दिल्ली के किसी गिरोह ने अपने नेटवर्क के अन्य सदस्यों के माध्यम से बिहार, पश्चिम बंगाल के गरीब परिवार के बच्चों को पढ़ाई और दिल्ली घुमाने का लालच देकर दिल्ली बुलाया था। इन सभी बच्चों की टिकट भी अपने नेटवर्क के अन्य सदस्यों के माध्यम से बुक कराई गई। बच्चे भी अपने विषय में अधिक न बता सकें। सभी के पास मिले पहचान संबंधी दस्तावेज भी संदिग्ध मिले। आरपीएफ इंस्पेक्टर चमन सिंह तोमर और जीआरपी प्रभारी इंस्पेक्टर सुरेश चंद्र ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ जारी है। बचपन बचाओ आंदोलन की टीम के द्वारा मामले की में तहरीर दी है। सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।
सात दिन में 33 बच्चे बरामद, सरगना का सुराग तक नहीं मिला
अलीगढ़ जंक्शन पर सात दिन के भीतर यह तीसरी बड़ी कार्रवाई है। बीते रविवार को सात, मंगलवार को 15 और फिर रविवार का 11 बच्चों नार्थ-ईस्ट एक्सप्रेस से बरामद किया गया है। कोई बड़ा गिरोह इसके पीछे काम रहा है, जो बिहार, पश्चिम बंगाल के गरीब परिवारों के बच्चों को टारगेट करते हुए लालच देकर दिल्ली व अन्य राज्यों में बुला रहा है। इस गिरोह के सरगना की तलाश की जा रही है। बिहार से लेकर दिल्ली, यूपी की पुलिस जांच में लगी हुई है। मगर, अभी तक उसका सुराग नहीं लगा है।
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वाकया शाम चार बजे करीब का है। आरपीएफ और जीआरपी को नार्थ-ईस्ट एक्सप्रेस में बिहार से मानव तस्कर गिरोह द्वारा कुछ बच्चों को दिल्ली, पंजाब ले जाए जाने की सूचना बचपन बचाओ आंदोलन की टीम की ओर से प्राप्त हुई। आरपीएफ इंस्पेक्टर चमन सिंह तोमर और जीआरपी प्रभारी इंस्पेक्टर सुरेश चंद्र अपनी टीम के साथ व चाइल्ड लाइन टीम ज्ञानेंद्र मिश्रा के नेतृत्व में पहुंची। टीम ने 11 बच्चों को बोगी संख्या एस-5, एस-4, डी-4 व अन्य बोगियों से बरामद किया। इनके साथ छह वयस्कों को भी पकड़ा गया। पूछताछ में प्रथम दृष्टया सामने आया कि दिल्ली के किसी गिरोह ने अपने नेटवर्क के अन्य सदस्यों के माध्यम से बिहार, पश्चिम बंगाल के गरीब परिवार के बच्चों को पढ़ाई और दिल्ली घुमाने का लालच देकर दिल्ली बुलाया था। इन सभी बच्चों की टिकट भी अपने नेटवर्क के अन्य सदस्यों के माध्यम से बुक कराई गई। बच्चे भी अपने विषय में अधिक न बता सकें। सभी के पास मिले पहचान संबंधी दस्तावेज भी संदिग्ध मिले। आरपीएफ इंस्पेक्टर चमन सिंह तोमर और जीआरपी प्रभारी इंस्पेक्टर सुरेश चंद्र ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ जारी है। बचपन बचाओ आंदोलन की टीम के द्वारा मामले की में तहरीर दी है। सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।
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सात दिन में 33 बच्चे बरामद, सरगना का सुराग तक नहीं मिला
अलीगढ़ जंक्शन पर सात दिन के भीतर यह तीसरी बड़ी कार्रवाई है। बीते रविवार को सात, मंगलवार को 15 और फिर रविवार का 11 बच्चों नार्थ-ईस्ट एक्सप्रेस से बरामद किया गया है। कोई बड़ा गिरोह इसके पीछे काम रहा है, जो बिहार, पश्चिम बंगाल के गरीब परिवारों के बच्चों को टारगेट करते हुए लालच देकर दिल्ली व अन्य राज्यों में बुला रहा है। इस गिरोह के सरगना की तलाश की जा रही है। बिहार से लेकर दिल्ली, यूपी की पुलिस जांच में लगी हुई है। मगर, अभी तक उसका सुराग नहीं लगा है।
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